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कंपनियों का बढ़ रहा मुनाफा: बढ़ती महंगाई के बीच गरमाएगा ‘कॉरपोरेट ग्रीड’ का मुद्दा?

Tue, 26 Apr 2022 02:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 26 Apr 2022 02:20 PM IST
सार

एकाउंटेबल यूएस की रिपोर्ट में अमेजन कंपनी का उदाहरण दिया गया है। इस कंपनी ने वेतन में बढ़ोतरी का तर्क देते हुए अपनी प्राइम मेंबरशिप फीस को बढ़ा दिया। जबकि असलियत यह है कि कंपनी के सीईओ एंडी जेसी को 21 करोड़ 20 लाख डॉलर का नया वेतन पैकेज दिया गया। इनमें शेयर ऑप्शन भी शामिल हैं...

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Inflation has risen more sharply after the Russian invasion of Ukraine, corporate greed issue is arising in US
अमेरिका की बड़ी कंपनियां - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूक्रेन पर रूसी हमले के पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने देश में बढ़ रही महंगाई के लिए कई बार बड़ी कंपनियों के बढ़ते मुनाफे को जिम्मेदार ठहराया था। तब कॉरपोरेट सेक्टर की तरफ से उनकी कड़ी आलोचना की गई थी। उधर रिपब्लिकन पार्टी ने कहा था कि ऐसे बयान देकर बाइडन अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

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यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद महंगाई और भी तेजी से बढ़ी है। लेकिन इस बीच ‘कॉरपोरेट ग्रीड’ (कंपनियों का लालच) का मुद्दा दबा रहा है। बाइडन से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया तक में मुद्रास्फीति दर के हर महीने बनते रिकॉर्ड को ‘पुतिन इन्फ्लेशन’ (पुतिन की की दी हुई महंगाई) कहा जा रहा है। लेकिन अब थिंक टैंक इकोनॉमिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ईपीआई) की एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट ने फिर कॉरपोरेट ग्रीड के मसले को चर्चा में ला दिया है।

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कॉरपोरेट मुनाफे का हिस्सा 53.9 फीसदी रहा

इस रिपोर्ट के मुताबिक 2020 की दूसरी तिमाही से 2021 की चौथी तिमाही तक बढ़ी महंगाई में कॉरपोरेट मुनाफे का हिस्सा 53.9 फीसदी रहा। इसमें उत्पादन में लगने वाली सामग्रियों की बढ़ी लागत का हिस्सा 38.3 फीसदी रहा। जबकि बढ़ी मजदूरी का हिस्सा सिर्फ 7.9 फीसदी रहा। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना महामारी के काल में कॉरपोरेट मुनाफे में असाधारण वृद्धि हुई।

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रिपोर्ट के मुताबिक 1979 से 2019 तक मुद्रास्फीति दर बढ़ने के पीछे कॉरपोरेट मुनाफे का हिस्सा औसतन 11.4 फीसदी ही रहा था। इस दौरान लेबर कॉस्ट (मजदूरी) का हिस्सा 61.8 फीसदी था। लेकिन कोरोना काल में ये ट्रेंड बिल्कुल पलट गया। इस बात की पुष्टि अरबपतियों के धन में हुई अकूत बढ़ोतरी से भी होती है।

इस बीच एक अन्य थिंक टैंक- एकाउंटेबल यूए- की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना काल में कंपनियों ने आम कर्मचारियों ने वेतन और भत्तों में भारी कटौती की। जबकि इसी दौरान सीईओ और अन्य प्रबंधकों के वेतन-भत्तों में भारी इजाफा किया गया। इससे कंपनियों के भीतर वेतन की खाई (वेज गैप) बहुत बढ़ गया है। ऐसा जिन कंपनियों में ऐसा हुआ है, उनमें अमेजन, एपल, मैकडोनाल्ड, कोका-कोला, वेरिजोन और स्टारबक्स शामिल हैं।

अमेजन सीईओ का पैकेज बढ़ा

एकाउंटेबल यूएस की रिपोर्ट में अमेजन कंपनी का उदाहरण दिया गया है। इस कंपनी ने वेतन में बढ़ोतरी का तर्क देते हुए अपनी प्राइम मेंबरशिप फीस को बढ़ा दिया। जबकि असलियत यह है कि कंपनी के सीईओ एंडी जेसी को 21 करोड़ 20 लाख डॉलर का नया वेतन पैकेज दिया गया। इनमें शेयर ऑप्शन भी शामिल हैं। कुल मिला कर 2021 की तुलना में उनके पैकेज में छह गुना बढ़ोतरी हुई। यही ट्रेंड अन्य बड़ी कंपनियों में भी रहा है।

एकाउंटेबल-यूएस के अध्यक्ष काइल हेरिंग ने वेबसाइट सालोन.कॉम से कहा- ‘अति मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में हम यह दुर्भाग्यपूर्ण रूझान देख रहे हैं कि वे अपने निवेशकों और प्रबंधकों के छोटे समूह का धन बढ़ाने में जुटी हुई हैं। ऐसा ग्राहकों और आम कर्मचारियों की कीमत पर किया जा रहा है।’



ईपीआई की रिपोर्ट में कहा गया है- ‘फिलहाल आमदनी में श्रम के हिस्से और वास्तविक वेतन में तेजी से गिरावट आ रही है। ऐसा बेरोजगारी घटने के बावजूद हो रहा है। जबकि ऐतिहासिक रूप से महंगाई के दौर में ट्रेंड इसके विपरीत रहता था। लेकिन इस बार बात अलग है।’

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