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डेल्टा का कहर: इंडोनेशिया में क्यों बेकाबू हो गया कोरोना संक्रमण, पॉजिटिविटी दर पहुंची 27 फीसदी

Mon, 19 Jul 2021 05:02 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 19 Jul 2021 05:02 PM IST
सार

स्थानीय मीडिया के मुताबिक देश में कोरोना महामारी पर काबू पाने की राह में गलत सूचनाओं का प्रसार एक बड़ी बाधा है। व्हाट्सएप के जरिए देश में कोरोना के इलाज के असर और वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों के बारे में गलत सूचनाएं व्यापक रूप से फैलाई गई हैं...

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Indonesia become a major hotspot of corona in the world, thousands of people are getting infected every day and hundreds of people are dying
इंडोनेशिया में कोविड मामले - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

इंडोनेशिया इस समय दुनिया में कोरोना संक्रमण का बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है। 27 करोड़ आबादी वाले इस देश में रोजाना हजारों लोग संक्रमित हो रहे हैं और सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है। जानकारों के मुताबिक देश पर ये कहर कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने ढाया है।

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इंडोनेशिया में सोशल मीडिया कोविड-19 की वजह से मरे लोगों की तस्वीरों से पटा हुआ है। अस्पतालों में बिस्तरों की कमी है। कई जगहों पर कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह की कमी पड़ गई है। देश में टीकाकरण धीमी गति से आगे बढ़ा है। अब तक लगभग छह फीसदी आबादी का ही पूरा टीकाकरण हुआ है। उधर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक देश में अफवाहों का बाजार भी गर्म है, जिससे लोगों में वैक्सीन को लेकर भ्रम फैल रहे हैं। इंडोनेशिया में अब तक 27 लाख लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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पिछले साल जब कोरोना की पहली लहर आई, तब इंडोनशिया ने अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से उसे संभाल लिया था। लेकिन इस साल जून से वहां हालत बिगड़ने लगे। तभी इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसायटी ने चेतावनी दी थी कि इंडोनेशिया कोरोना विनाश के कगार पर पहुंच गया है। लेकिन देश में प्रतिबंध लागू नहीं किए गए। लोगों ने उत्सव मनाना जारी रखा। विशेषज्ञों के मुताबिक अब उसकी ही कीमत देश को चुकानी पड़ रही है।

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इंडोनेशिया में लॉकडाउन पिछले 10 जुलाई को लागू किया गया। तब तक रोजाना नए संक्रमण के 30 हजार से ज्यादा मामले सामने आने लगे थे। तब सरकार ने दूसरे देशों से ऑक्सीजन मंगाने के लिए पहल की। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण और मौत के जो आंकड़े सरकार बता रही है, वे असली सूरत नहीं बताते। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक देश में पॉजिटिविटी दर 27 फीसदी है। यह इस समय दुनिया की सबसे ऊंची पॉजिटिविटी दर है।

बीते शनिवार को जारी एक सर्वे में अनुमान लगाया गया कि जकार्ता की आधी आबादी कोविड-19 से संक्रमित हो चुकी है। ये संख्या सरकारी तौर पर बताई गई संख्या से 12 गुना ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है- ‘पर्याप्त संख्या में टेस्ट न होने के कारण कई प्रांतों में असल में संक्रमित हो चुके लोगों को आइसोलेट नहीं किया जा रहा है।’ बताया जाता है कि देश के कई इलाकों में लोग कोरोना संक्रमण के लक्षणों को साधारण जुकाम या बुखार मान रहे हैं।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक देश में कोरोना महामारी पर काबू पाने की राह में गलत सूचनाओं का प्रसार एक बड़ी बाधा है। व्हाट्सएप के जरिए देश में कोरोना के इलाज के असर और वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों के बारे में गलत सूचनाएं व्यापक रूप से फैलाई गई हैं। इस कारण बहुत से लोग इलाज कराने और वैक्सीन लेने में अनिच्छुक हो गए हैँ।

जानकारी के अभाव के कारण बहुत से लोग यह मान कर चल रहे हैं कि बच्चों को कोरोना संक्रमण नहीं होता। जबकि बड़ी संख्या में बच्चे इससे पीड़ित हुए हैं, जिनमें कुछ दो-ढाई महीने के शिशु भी हैं। इंडोनेशिया में बाल रोग डॉक्टरों के संघ के अध्यक्ष अमन बी पुलुंगन ने एक टीवी चैनल से कहा कि माता-पिता बच्चों को संक्रमण से बचाने के उपाय नहीं कर रहे हैं। उन्हें ये मालूम नहीं है कि बच्चे भी इससे संक्रमित हो सकते हैं।

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