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Britain: भारतीय छात्रों का ब्रिटेन के विश्वविद्यालय से हुआ मोहभंग, आवेदकों की संख्या घटी; UCAS के आंकड़े जारी

Thu, 15 Feb 2024 10:59 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, लंदन Published by: आदर्श शर्मा Updated Thu, 15 Feb 2024 10:59 PM IST
सार

अध्ययन-कार्य वीजा को लेकर सुनक सरकार की समीक्षा के बीच अब भारतीय छात्रों का ब्रिटेन के विश्वविद्यालय से मोहभंग हो गया है। एक आंकड़ों के मुताबिक, आवेदकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। 

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Indian students turning away from United kingdom universities, latest figures show
छात्र (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ब्रिटेन में अध्ययन के बाद कार्य वीजा के लिए चल रही समीक्षा और सरकार द्वारा वित्त पोषित छात्रवृत्ति पर आश्रितों पर प्रतिबंधों के बीच गुरुवार को एक नवीनतम आंकड़े जारी हुए। जिसमें पता चला कि बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों का ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों से मोहभंग हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक, जिसमें चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 
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ब्रिटेन में भारतीय छात्रों की संख्या में आई कमी
विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रवेश सेवा(यूसीएएस) के आंकड़ों के मुताबिक, स्नातक के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या में मात्र 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हाल के दिनों में वृद्धि के बावजूद नाजीरियाई और भारतीय छात्रों के प्रवेश में गिरावट दर्ज की गई। भारत से आवेदन पिछले वर्ष की तुलना में चार प्रतिशत गिरकर 8,770 और नाइजीरिया से 46 प्रतिशत गिरकर 1,590 रह गए हैं। 
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नीति की समीक्षा गिरावट का कारण हो सकती है- विशेषज्ञ
जारी आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा आवेदक चीन, तुर्की, कनाडा से हुए। जबकि भारत और नाइजीरिया के आवेदकों में खासा कमी आई है। हालांकि ब्रिटेन की उच्च शिक्षा वैश्विक स्तर पर अभी भी आकर्ष बनी हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो इस गिरावट का कारण सुनक सरकार द्वारा ग्रेजुएट रुट वीजा की चल रही समीक्षा हो सकती है। जिसके तहत स्नातकों को उनकी डिग्री के बाद कम से कम दो साल तक रहने और काम का मौका दिया जाता है। 
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गौरतलब है कि अध्ययन-कार्य वीजा की समीक्षा करने के लिए गृह कार्यालय द्वारा स्वतंत्र प्रवासन सलाहकार समिति(एमएसी) को नियुक्त किया गया है। छात्र वीजा श्रेणी के तहत बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भारत से ब्रिटेन जाकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, पिछले साल अनुदान का 43 प्रतिशत था। गिरावट के पीछे एक अन्य कारक पिछले महीने से विदेशी छात्रों पर स्नातकोत्तर अनुसंधान पाठ्यक्रमों और सरकार द्वारा वित्त पोषित छात्रवृत्ति के साथ यूके में आश्रितों या करीबी परिवार के सदस्यों को लाने वाले सभी पाठ्यक्रमों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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