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अतीत: प्रथम विश्व युद्ध के संघर्ष विराम में भारतीय सैनिकों की थी अहम भूमिका, ब्रिटिश इतिहासकार ने खोजा सबूत
Thu, 26 Dec 2024 05:09 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: शुभम कुमार
Updated Thu, 26 Dec 2024 05:09 AM IST
सार
इतिहासकार और गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर पीटर डॉयल ने पाया कि ये डिब्बे भारतीय सैनिकों के लिए क्रिसमस के खास तोहफे थे जो जर्मन सैनिकों के पास पहुंच गए थे। युद्ध विराम के दौरान सैनिकों ने युद्ध क्षेत्र पार करके एक-दूसरे से हाथ मिलाए और तोहफे साझा किए और यहां तक कि फुटबॉल खेला।
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प्रोफेसर पीटर डॉयल
- फोटो : गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन
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विस्तार
एक ब्रिटिश इतिहासकार ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की भागीदारी का एक और अहम सबूत खोजा है। उन्हें 1914 के क्रिसमस युद्ध विराम में भारतीय सैनिकों को दिए गए मसाले के डिब्बे मिले हैं। ये मसाले के डिब्बे राजा जॉर्ज पंचम की 17 साल की बेटी राजकुमारी मैरी के दिए गए क्रिसमस तोहफे की योजना का हिस्सा थे।
इतिहासकार और गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर पीटर डॉयल ने पाया कि ये डिब्बे भारतीय सैनिकों के लिए क्रिसमस के खास तोहफे थे जो जर्मन सैनिकों के पास पहुंच गए थे। युद्ध विराम के दौरान सैनिकों ने युद्ध क्षेत्र पार करके एक-दूसरे से हाथ मिलाए और तोहफे साझा किए और यहां तक कि फुटबॉल खेला।
ब्रिटिश अखबार का लेख
बुधवार को ब्रिटिश अखबार द टाइम्स ने प्रोफेसर पीटर डॉयल के हवाले से लिखा है कि उनके नए शोध से पता चला है कि ये मसाले के डिब्बे जर्मन सैनिकों के हाथों में आ गए थे, जब 110 साल पहले पश्चिमी मोर्चे पर शांति थी और सैनिक नो मैन्स लैंड को पार कर हाथ मिलाने,उपहार देने और फुटबॉल खेलने के लिए जा रहे थे। डॉयल ने एक प्रदर्शनी में इन डिब्बों और युद्ध विराम से जुड़े उनके रिश्तों को दिखाया।
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उन्होंने कहा कि यह युद्धविराम केवल ब्रिटिश और जर्मन सैनिकों के बीच नहीं था, बल्कि इसमें भारतीय सैनिक भी शामिल थे और वे भी इसके गवाह बन रहे थे। फॉर एवरी सेलर अफ्लोट,एवरी सोल्जर एट द फ्रंट: प्रिंसेस मैरीज क्रिसमस गिफ्ट-1914 के लेखक डॉयल ने बताया कि उनकी किताब युद्ध के दौरान एक अनौपचारिक ट्रूस इन नो मैन्स लैंड की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
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इतिहासकार और गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर पीटर डॉयल ने पाया कि ये डिब्बे भारतीय सैनिकों के लिए क्रिसमस के खास तोहफे थे जो जर्मन सैनिकों के पास पहुंच गए थे। युद्ध विराम के दौरान सैनिकों ने युद्ध क्षेत्र पार करके एक-दूसरे से हाथ मिलाए और तोहफे साझा किए और यहां तक कि फुटबॉल खेला।
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ब्रिटिश अखबार का लेख
बुधवार को ब्रिटिश अखबार द टाइम्स ने प्रोफेसर पीटर डॉयल के हवाले से लिखा है कि उनके नए शोध से पता चला है कि ये मसाले के डिब्बे जर्मन सैनिकों के हाथों में आ गए थे, जब 110 साल पहले पश्चिमी मोर्चे पर शांति थी और सैनिक नो मैन्स लैंड को पार कर हाथ मिलाने,उपहार देने और फुटबॉल खेलने के लिए जा रहे थे। डॉयल ने एक प्रदर्शनी में इन डिब्बों और युद्ध विराम से जुड़े उनके रिश्तों को दिखाया।
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उन्होंने कहा कि यह युद्धविराम केवल ब्रिटिश और जर्मन सैनिकों के बीच नहीं था, बल्कि इसमें भारतीय सैनिक भी शामिल थे और वे भी इसके गवाह बन रहे थे। फॉर एवरी सेलर अफ्लोट,एवरी सोल्जर एट द फ्रंट: प्रिंसेस मैरीज क्रिसमस गिफ्ट-1914 के लेखक डॉयल ने बताया कि उनकी किताब युद्ध के दौरान एक अनौपचारिक ट्रूस इन नो मैन्स लैंड की पृष्ठभूमि पर आधारित है।