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Sri Lanka: श्रीलंका दौरे पर कोलंबो पहुंचे भारतीय नौसेना प्रमुख, रक्षा सहयोग-समुद्री सुरक्षा पर होगी चर्चा
Tue, 23 Sep 2025 05:41 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 23 Sep 2025 05:41 AM IST
सार
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी अपने चार दिन के श्रीलंका दौरे कोलंबो पहुंचे। जहां वे प्रधानमंत्री डॉ हरिनी अमरसूर्या और सेना के शीर्ष अधिकारियों से मिलकर समुद्री सुरक्षा, क्षमता वृद्धि व प्रशिक्षण पर द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। वे गॉल डायलॉग 2025 में भी हिस्सा लेंगे, जहां हिंद महासागर के बदलते परिदृश्य पर विचार होगा।
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एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, नौसेना प्रमुख
- फोटो : ANI
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विस्तार
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी चार दिवसीय दौरे पर श्रीलंका रवाना हो गए हैं। इस दौरे में एडमिरल त्रिपाठी श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात करेंगे। साथ ही रक्षा सहयोग पर श्रीलंका के तीनों सेना अध्यक्षों के साथ उनकी द्विपक्षीय चर्चा भी होगी, जिनमें समुद्री सुरक्षा, क्षमता वृद्धि, प्रशिक्षण और सहयोग की मजबूती पर ज़ोर दिया जाएगा।
नौसेना प्रमुख कोलंबो में गॉल डायलॉग 2025 के 12वें संस्करण में भी भाग लेंगे। इस अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक सम्मेलन का विषय ‘मैरिटाइम आउटलुक ऑफ द इंडियन ओशन अंडर चेंजिंग डायनैमिक्स’ रखा गया है। भारतीय नौसेना श्रीलंका की नौसेना के साथ नियमित रूप से वार्षिक रक्षा वार्ता, स्टाफ वार्ता और अन्य ऑपरेशनल चर्चा करती है। भारतीय और श्रीलंकाई नौसेनाओं के बीच साझा नौसेनिक अभ्यास (स्लिनेक्स), जलमार्ग अभ्यास, प्रशिक्षण और हाइड्रोग्राफी संबंधी सहयोग भी हैं।
ये भी पढ़ें:- US: ट्रंप के एजेंसियों पर नियंत्रण का विवाद, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट 90 साल पुराने फैसले की करेगा समीक्षा
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इसके अलावा दोनों नौसेनाएं इंडियन ओशन नेवल सिम्पोज़ियम, गॉल डायलॉग, मिलान, गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव, कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव जैसे बहुपक्षीय कार्यक्रमों में भी भाग लेती हैं। भारतीय नौसेना का स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा भी रविवार को कोलंबो पहुंचा है। इस दौरान सतपुड़ा के चालक दल अपने श्रीलंकाई समकक्षों के साथ साझा नौसैनिक अभ्यास करेगा। साथ ही दोनों पक्षों के बीच योगाभ्यास और दोस्ताना खेलकूद सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
ये भी पढ़ें:- गृहयुद्ध से ग्लोबल डिप्लोमेसी तक: नई कूटनीति की शुरुआत कर रहे अल-शरा; UN में 60 साल बाद अमेरिका से हुई वार्ता
क्यों अहम है भारत-श्रीलंका सहयोग?
नौसेना प्रमुख की श्रीलंका यात्रा दोनों देशों के बीच सामरिक सहयोग बढ़ाने के लिए हो रही है। दरअसल चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह में भारी निवेश किया है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई हैं। श्रीलंका में चीन का प्रभाव अन्य पड़ोसी देशों जैसे मालदीव और बांग्लादेश को भी प्रभावित कर सकता है, जो भारत के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए ठीक नहीं है। भारत, चीन के प्रभाव का जवाब अपनी रणनीतिक सक्रियता बढ़ाकर दे रहा है। इसमें मौजूदा परियोजनाओं को गति देना, आर्थिक सहायता बढ़ाना और रक्षा सहयोग मजबूत करना शामिल है।
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नौसेना प्रमुख कोलंबो में गॉल डायलॉग 2025 के 12वें संस्करण में भी भाग लेंगे। इस अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक सम्मेलन का विषय ‘मैरिटाइम आउटलुक ऑफ द इंडियन ओशन अंडर चेंजिंग डायनैमिक्स’ रखा गया है। भारतीय नौसेना श्रीलंका की नौसेना के साथ नियमित रूप से वार्षिक रक्षा वार्ता, स्टाफ वार्ता और अन्य ऑपरेशनल चर्चा करती है। भारतीय और श्रीलंकाई नौसेनाओं के बीच साझा नौसेनिक अभ्यास (स्लिनेक्स), जलमार्ग अभ्यास, प्रशिक्षण और हाइड्रोग्राफी संबंधी सहयोग भी हैं।
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इसके अलावा दोनों नौसेनाएं इंडियन ओशन नेवल सिम्पोज़ियम, गॉल डायलॉग, मिलान, गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव, कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव जैसे बहुपक्षीय कार्यक्रमों में भी भाग लेती हैं। भारतीय नौसेना का स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा भी रविवार को कोलंबो पहुंचा है। इस दौरान सतपुड़ा के चालक दल अपने श्रीलंकाई समकक्षों के साथ साझा नौसैनिक अभ्यास करेगा। साथ ही दोनों पक्षों के बीच योगाभ्यास और दोस्ताना खेलकूद सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
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क्यों अहम है भारत-श्रीलंका सहयोग?
नौसेना प्रमुख की श्रीलंका यात्रा दोनों देशों के बीच सामरिक सहयोग बढ़ाने के लिए हो रही है। दरअसल चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह में भारी निवेश किया है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई हैं। श्रीलंका में चीन का प्रभाव अन्य पड़ोसी देशों जैसे मालदीव और बांग्लादेश को भी प्रभावित कर सकता है, जो भारत के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए ठीक नहीं है। भारत, चीन के प्रभाव का जवाब अपनी रणनीतिक सक्रियता बढ़ाकर दे रहा है। इसमें मौजूदा परियोजनाओं को गति देना, आर्थिक सहायता बढ़ाना और रक्षा सहयोग मजबूत करना शामिल है।