भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार भारतीय उद्योग: डेलॉयट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) की बैठक के पहले दिन वैश्विक कंस्लटेंसी दिग्गज डेलॉइट द्वारा जारी सर्वे रिपोर्ट में भारतीय उद्योगों को भविष्य के लिए तैयार बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चौथी औद्योगिक क्रांति के संदर्भ में समाज, रणनीति, तकनीक और प्रतिभा को लेकर आने वाले चुनौतियों से निपटने की बात करें तो भारतीय उद्योग दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा ज्यादा तेजी से प्रगति कर रहे हैं।
डेलॉयट ने स्विट्जरलैंड के पहाड़ी शहर दावोस में सोमवार को सालाना रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक चौथी औद्योगिक क्रांति (उद्योग 4.0) के दौर में दुनिया कैसे चले और काम करे इसे लेकर औद्योगिक नेताओं के सामने व्यवसाय और कार्यबल को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने का दबाव है। ऐसे समय में भारतीय उद्योग अपने कार्यबल को प्रशिक्षित करने के लिए सक्रिय हैं। इस बार दुनिया के 19 देशों से 2000 प्रतिनिधि इस सर्वे में शामिल हुए। भारत से 130 ने सर्वे में सवालों के जवाब दिए।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने चौथी औद्योगिक क्रांति में सफलता के लिए सही योग्यता का प्रदर्शन किया है। इसका कारण भारतीय उद्योग का कर्मचारी केंद्रित दृष्टिकोण, ग्राहकों की संतुष्टि का सामाजिक प्रभाव और मुनाफे से जोड़ना है। साथ ही भारतीय उद्योग प्रौद्योगिकी के नैतिक उपयोग को लेकर सबसे ज्यादा सजग है। पांच दिन की इस बैठक में भारत के 100 से अधिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सहित दुनियाभर से औद्योगिक और सियासी जगत की 3000 हस्तियां शामिल हो रही हैं।
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर कुमार कंदास्वामी के मुताबिक खराब निर्णय प्रक्रिया के चलते वैश्विक स्तर पर कंई कंपनियां पीछे छूट रही हैं, लेकिन भारत में यह असर नहीं दिखता। ग्राहकों की संतुष्टि को सामाजिक प्रभाव में बदलने की मान्यता भारत में बाकी दुनिया की तुलना में अधिक है।
मौजूदा कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में आगे
- वैश्विक स्तर पर सर्वे में शामिल 34 फीसदी उत्तरदाताओं ने सामाजिक प्रभाव को सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना। जबकि 29 फीसदी भारतीय अधिकारियों के लिए यह प्राथमिकता है।
- भारत में 85 ने बताया कि उनके संस्थान ने ऐसा उत्पाद या सर्विस तैयार की जिससे समाज पर ज्यादा सकारात्मक प्रभाव पड़ें। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 73 प्रतिशत रहा।
- 58 प्रतिशत भारतीय अधिकारियों ने बताया कि उनके संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया स्पष्ट परिभाषित है। यह आंकड़ा सर्वे में शामिल किसी भी देश के जवाब देने वालों में सबसे ज्यादा है।
- 65 प्रतिशत भारतीय उत्तरदाताओं ने बताया कि उनका नेतृत्व इस बात की अनुमति देता है कि नवाचार में फेल रहने पर सीखने को मिलेगा। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 69 फीसदी रहा।
- 55 फीसदी भारतीय अधिकारी ‘उद्योग 4.0’ में प्रौद्योगिकी के नैतिक उपयोग को लेकर चिंतित हैं और इसे लेकर जरूरी कदम उठा रहे हैं। जबकि वैश्विक स्तर पर यह चिंता 30 फीसदी में ही है।
- भारतीय अधिकारी इस बात को लेकर कम आश्वस्त हैं कि उन्हें भविष्य के लिए किस तरह के कुशल कार्यबल की जरूरत है। भारतीयों में आंकड़ा 53 जबकि वैश्विक स्तर पर 63 फीसदी है।
- भारत के 72 फीसदी अधिकारियों ने कहा कि वे अपने मौजूदा कर्मचारियों को भविष्य की जरूरतों के लिए प्रशिक्षित करेंगे जबकि वैश्विक स्तर पर ऐसा जवाब देने वाले केवल 43 फीसदी ही रहे।