फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Indian Captain smit machhar Four Passengers bank ceo plumber doctor Who Helped Save 174 Lives

भारतीय कैप्टन के साथ किन चार यात्रियों ने संभाला मोर्चा?: प्लंबर से सीईओ तक; चाकूबाजी के बीच ये बने संकटमोचक

Thu, 01 Oct 2026 04:40 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 01 Oct 2026 04:40 PM IST
सार

दुबई से इस्राइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमानी सह-पायलट के हमले के बाद 174 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई थी। इस बीच भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार घायल होने के बावजूद डटे रहे। उनके साथ प्लंबर यानिव हयून, बैंक सीईओ ज्विका मानेस, इंश्योरेंस एजेंसी मालिक असफ राजुआन और दंत चिकित्सक शोटा मुसायेव ने मोर्चा संभाला। आखिर किसने हमलावर को दबोचा, किसने विमान संभाला और किसने कैप्टन का इलाज किया?

विज्ञापन
Indian Captain smit machhar Four Passengers bank ceo plumber doctor Who Helped Save 174 Lives
चाकूबाजी के बीच ये बने संकटमोचक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

जाको राखे साईंया, मार सके ना कोय... दुबई से इस्राइल जा रही उड़ान में बैठे 174 लोग इस कहावत की जीती-जागती मिसाल बन गए। एक विमान हजारों फीट की ऊंचाई पर आसमान में उड़ रहा था। सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक कॉकपिट में ऐसी घटना हुई कि विमान में बैठे यात्रियों की जान सांसत में आ गई। पायलट और सह-पायलट के बीच हुई चाकूबाजी के बाद हालात बिगड़ते चले गए और विमान के नीचे की ओर जाने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। भारतीय कैप्टन ने आखिरी दम तक अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाले रखा।

विज्ञापन


ऐसे वक्त में जब हर किसी को अपनी जान की चिंता थी। उस संकट के समय चार यात्री संकटमोचक बने। इनमें कोई प्लंबर था तो कोई सीईओ, कोई कारोबारी था तो कोई डॉक्टर। इन चारों ने मिलकर न सिर्फ हमलावर को काबू करने में मदद की, बल्कि घायल कैप्टन और विमान में सवार लोगों की जिंदगी बचाने में भी अहम भूमिका निभाई। आखिर कौन थे ये चार यात्री और चाकूबाजी के बीच इन्होंने कैसे संभाला मोर्चा? आइए एक-एक कड़ी को विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन


विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। उड़ान के दौरान कॉकपिट से आपातकालीन संकेत मिलने के बाद हाईजैक की आशंका पैदा हो गई। विमान तेजी से नीचे जाने लगा और यात्रियों में अफरातफरी मच गई। इसी दौरान कैप्टन स्मित मच्छार और ओमानी सह-पायलट के बीच संघर्ष हुआ। सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन पर हमला कर दिया। चाकुओं के वार झेलने के बावजूद बुरी तरह से घायल हुए कैप्टन ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। इसी बीच जब कॉकपिट खुला तो लहूलुहान कैप्टन को देख सभी यात्री सहम गए। इनमें चार यात्री तुरंत स्मित की मदद के लिए पहुंचे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


प्लंबर यानिव हयून ने कॉकपिट में पहुंचकर क्या किया?
यानिव हयून पेशे से प्लंबर हैं। उन्होंने बताया कि विमान में अफरातफरी के बीच वह कॉकपिट की ओर दौड़े। उनके मुताबिक, कॉकपिट का दरवाजा उस समय बंद नहीं था। उनका मानना था कि घायल कैप्टन स्मित मच्छार ने गिरने से पहले दरवाजा खोल दिया था। इससे यात्रियों को अंदर जाने का मौका मिला। हयून ने कॉकपिट में ओमानी सह-पायलट को देखा और उसे विमान के नियंत्रण से छेड़छाड़ करते हुए पाया। उन्होंने हमलावर को पकड़ लिया और उसे कॉकपिट से बाहर खींचने की कोशिश की। 
 
कौन सा टीवी शो देखकर संभाला विमान? 
इसके बाद उन्होंने दूसरे यात्रियों को बुलाया और सभी ने मिलकर उसे जमीन पर दबोच लिया। हयून का काम यहीं खत्म नहीं हुआ। वह दोबारा कॉकपिट में पहुंचे, क्योंकि विमान अभी भी नियंत्रण खो रहा था। उन्होंने बताया कि वह टीवी पर एयर क्रैश इन्वेस्टिगेशन कार्यक्रम देखते हैं। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने विमान के नियंत्रण को संभालने की कोशिश की और विमान को सीधा करने में मदद की। इसके बाद विमान में यात्रा कर रहे दो पायलटों ने कॉकपिट की कमान संभाली और विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की। हयून ने कहा कि उन्होंने शायद अपने बच्चों के बारे में सोचकर ऐसा किया।

बैंक सीईओ ने हमलावर को कैसे काबू किया?
ज्विका मानेस बैंक ल्यूमी की अंडरराइटिंग कंपनी के सीईओ हैं। उन्होंने बताया कि वो भी कॉकपिट की ओर जाने वाले यात्रियों में शामिल थे। वहां उन्होंने खून देखा और घायल कैप्टन को भी देखा। उन्होंने दूसरे यात्रियों के साथ मिलकर ओमानी सह-पायलट को पकड़ने और काबू करने में मदद की। हमलावर लगातार छूटने की कोशिश कर रहा था, इसलिए यात्रियों ने उसे बांधने के लिए विमान में दिए गए मल्टीमीडिया हेडफोन की केबल का इस्तेमाल किया।

मानेस ने आगे बताया कि उसे काबू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद डॉक्टर और नर्स ने घायल भारतीय कैप्टन की तरफ ध्यान दिया। मानेस ने बताया कि विमान तेजी से नीचे जा रहा था और यात्रियों को ऐसा लग रहा था जैसे वे किसी डरावनी फिल्म में फंस गए हों। उनके मुताबिक, कुछ यात्रियों ने दरवाजों को रोका और हमलावर को काबू में रखने में मदद की। सभी का मकसद एक ही था कि विमान में मौजूद लोगों की जान बचाई जा सके।

इंश्योरेंस एजेंसी मालिक असफ राजुआन ने क्या देखा?

  • असफ राजुआन छुट्टी मनाकर थाईलैंड से लौट रहे थे। उनके मुताबिक, विमान लगभग 90 डिग्री के कोण पर नीचे जाने लगा। यात्रियों को लगा कि विमान का नियंत्रण खत्म हो गया। इसके बाद राजुआन भी कॉकपिट की तरफ पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि कॉकपिट में खून फैला हुआ था और कई यात्री हमलावर को काबू करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने ज्विका मानेस और दो अन्य यात्रियों के साथ मिलकर ओमानी सह-पायलट को पकड़ने में मदद की। 
  • चालक दल के सदस्यों ने भी इस दौरान यात्रियों की मदद की। राजुआन के अनुसार, यात्रियों और चालक दल ने करीब 50 मिनट तक हमलावर को काबू में रखा और विमान को सऊदी अरब में उतारने तक स्थिति संभाले रखी। उन्होंने इस घटना को बेहद डरावना बताया। कुछ घंटे पहले तक वह छुट्टी पर थे, लेकिन अचानक खुद को ऐसी स्थिति में पाया जहां उन्हें अपनी और परिवार की जिंदगी के लिए संघर्ष करना पड़ा।


दंत चिकित्सक ने घायल भारतीय कैप्टन को कैसे बचाया?
शोटा मुसायेव पेशे से दंत चिकित्सक हैं। उन्होंने भी पायलट को देखकर कॉकपिट की तरफ दौड़ लगाई। शुरुआत में उन्होंने हमलावर को काबू करने में मदद की। जब सह-पायलट को बांध दिया गया तो मुसायेव ने घायल भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की तरफ ध्यान दिया। उनके मुताबिक, कैप्टन के सिर और हाथों से काफी खून निकल रहा था। मुसायेव ने प्राथमिक उपचार देते हुए खून बहना रोकने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि वह विमान में मौजूद एकमात्र डॉक्टर थे। 

उन्होंने बताया कि कैप्टन काफी देर तक होश में थे और उनसे बातचीत भी कर पा रहे थे। हालांकि, लैंडिंग के करीब उनकी हालत कुछ बिगड़ी। मुसायेव ने बताया कि हमलावर को कई बार बांधना पड़ा, क्योंकि वह लगातार खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। आखिरकार यात्रियों ने उसके हाथ-पैर अच्छी तरह बांध दिए और उसे काबू में रखा। इसके बाद सऊदी अरब में विमान उतरने पर कैप्टन को मेडिकल टीम के पास पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मित मच्छार की सर्जरी हुई और उनकी हालत अब स्थिर है।

ऐसे मुश्किल हालातों के बीच किसने क्या किया? बिंदुवार तरीके से समझें...

  • यानिव हयून ने हमलावर को पकड़ने के साथ विमान के नियंत्रण को संभालने में मदद की। 
  • ज्विका मानेस ने हमलावर को दबोचने और बांधने में मदद की। 
  • असफ राजुआन ने दूसरे यात्रियों के साथ मिलकर हमलावर को काबू किया। 
  • शोटा मुसायेव ने घायल भारतीय कैप्टन का खून रोकने और प्राथमिक उपचार देने में मदद की।
  • कैप्टन स्मित मच्छार ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का रास्ता यात्रियों के लिए खुला किया। 
  • विमान में यात्रा कर रहे दो अन्य पायलटों ने बाद में कॉकपिट संभाला और विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की।


इस पूरी घटना में बाकी लोगों की क्या भूमिका रही?
घटना के दौरान केवल इन चार यात्रियों ने ही मदद नहीं की। यात्रियों के मुताबिक, ताली मैंस ने कॉकपिट से आ रही आवाजें सुनीं और आसपास के लोगों का ध्यान इस तरफ खींचा। इसके बाद कई लोग कॉकपिट की तरफ पहुंचे। विमान में यात्रा कर रहे दो वैकल्पिक पायलटों ने भी बाद में कॉकपिट की कमान संभाली और विमान को सुरक्षित लैंडिंग तक पहुंचाया। इस पूरी घटना में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका भी बेहद अहम रही। उनके गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा यात्रियों के लिए पहुंच योग्य होना बाकी लोगों के अंदर जाने का रास्ता बना।



इसके बाद यात्रियों ने हमलावर को काबू किया और विमान के नियंत्रण में मदद की। इस्राइल के राष्ट्रपति ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस, दृढ़ता और उन कदमों के लिए आभार जताया, जिनसे कई लोगों की जान बचाने में मदद मिली। चार यात्रियों यानिव हयून, ज्विका मानेस, असफ राजुआन और डॉक्टर शोटा मुसायेव के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई। इस पूरी घटना में अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग जिम्मेदारी संभाली, लेकिन उनका साझा मकसद विमान में मौजूद लोगों की जान बचाना था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed