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USA: 'मणिपुर हिंसा में हिंदुओं की छवि खराब करने का प्रयास', कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी राजश्री ने कही यह बात

Wed, 25 Oct 2023 05:38 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 25 Oct 2023 05:38 PM IST
सार

भारतीय-अमेरिकी राजश्री कीशम ने कहा कि हिंसा, अविश्वास और सामाजिक-राजनीतिक तनाव और उग्रवाद, नशीले पदार्थों और अवैध घुसपैठ का एक घातक जटिल जाल है। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है।

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Indian American woman says that conflict in Manipur projected as religious clash to malign image of Hindus
अमेरिका का झंडा - फोटो : Social media

विस्तार

मणिपुर में जातीय हिंसा पर भारतीय-अमेरिकी महिला ने कांग्रेस में खुलकर बोला है। उन्होंने कांग्रेस में बोलते हुए कहा कि दो आदिवासी समुदायों के बीच चल रहे संकट को महज एक धार्मिक संघर्ष के रूप में पेश करने और हिंदू छवि को खराब करने के प्रयास किए गए। हिंसा के वास्तविक कारण को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। अमेरिका और कनाडा दोनों में बढ़ती यहूदी विरोधी भावना, हिंदू भय और हिंदू विरोधी कट्टरता को संबोधित करने के लिए हिंदूएक्शन और नमस्ते शालोम मल्टी-फेथ एलायंस द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
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भारतीय-अमेरिकी राजश्री कीशम ने कहा कि हिंसा, अविश्वास और सामाजिक-राजनीतिक तनाव और उग्रवाद, नशीले पदार्थों और अवैध घुसपैठ का एक घातक जटिल जाल है। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है। उन्होंने कहा, मणिपुर के हिंदू समुदाय में पंजाबी, बिहारी, तमिलियन, नेपाली और अन्य सहित अन्य जातियां हैं। इसी तरह ईसाई समुदाय में नागा, कुकी और मैतेई भी शामिल हैं।
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साथ ही उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि मणिपुर में निरर्थक हिंसा खत्म हो जाएगी और समाधान की आशा है। हमारी आशा है कि हिंदुओं के प्रति किसी भी मौजूदा पूर्वाग्रह या आशंका को कम किया जाए और एक रचनात्मक समाधान प्राप्त किया जाए। एक भारतीय-अमेरिकी महिला ने कांग्रेस की सुनवाई में कहा कि विविधता विभाजन का स्रोत नहीं है, बल्कि सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रमाण है, जो पीढ़ियों से मणिपुर की विशेषता रही है। 
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बता दें तीन मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 180 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सैकड़ों घायल हुए हैं। बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च आयोजित किया गया था। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी नागा और कुकी 40 प्रतिशत से कुछ अधिक हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
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