USA: ‘चीन से निपटने के लिए भारत-अमेरिका संबंध मजबूत करना जरूरी’, बोले विवेक रामास्वामी
विवेक रामास्वामी ने मंगलवार को अपनी योजनाओं और विदेश नीति के विचारों को उजागर किया। इस दौरान उन्होंने निक्की हेली पर भी निशाना साधा। दरअसल, हेली ने विदेश नीति के मुद्दों पर रामास्वामी की अनुभवहीनता के लिए आलोचना की थी।
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अमेरिका में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी का कहना है कि भारत और अमेरिका के मजबूत संबंध, अमेरिका की चीन और ताइवान पर निर्भरता खत्म कर सकते हैं। उन्होंने भारत, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मजबूत संबंधों का आह्वान किया।
रामास्वामी की अनुभवहीनता के लिए आलोचना
बता दें, पिछले हफ्ते राष्ट्रपति पद के लिए प्राथमिक बहस आयोजित की गई थी। इसमें सभी उम्मीदवारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। बहस के बाद 38 वर्षीय रामास्वामी को समर्थन देने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। भारतवंशी रामास्वामी ने मंगलवार को अपनी योजनाओं और विदेश नीति के विचारों को उजागर किया। इस दौरान उन्होंने निक्की हेली पर भी निशाना साधा। दरअसल, हेली ने विदेश नीति के मुद्दों पर रामास्वामी की अनुभवहीनता के लिए आलोचना की थी।
सहयोगियों के साथ मजबूत साझेदारी जरूरी
रामास्वामी ने कहा कि अमेरिका आज चीन पर आर्थिक रूप से निर्भर है, लेकिन भारत के साथ मजबूत संबंधों की मदद से चीनी संबंधों से आजादी घोषित करना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अंडमान सागर में सैन्य संबंध समेत भारत के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध भी रखने चाहिए। यदि आवश्यक हुआ तो भारत मलक्का जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर सकता है, जहां से वास्तव में चीन को अधिकतर पश्चिम एशियाई तेल की आपूर्ति मिलती है। इसलिए अमेरिका-भारत संबंधों में ये सुधार के वास्तविक क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि चीन-ताइवान पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए दक्षिण कोरिया और जापान सहित अन्य सहयोगियों के साथ मजबूत साझेदारी करेंगे।
ताइवान की रक्षा करना आवश्यक
उद्यमी से राजनेता बने रामास्वामी ने कहा कि जब तक अमेरिका सेमीकंडक्टर हासिल नहीं कर लेता, तब तक अमेरिका को ताइवान की सख्ती से रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका कुछ चीजों को लेकर ताइवान पर निर्भर है। इसलिए चीन को पूरी तरह से कब्जा नहीं करने दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि ताइवान को खुद अपनी सेना को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी मातृभूमि की रक्षा को भी मजबूत करना चाहिए।
उनके अभियान में कहा गया कि रामास्वामी अब तक के एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं जिन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा। वहीं, रामास्वामी के समर्थकों का कहना है कि धन जुटाने की कोशिश में लगी हेली इस्राइल को लेकर जानबूझकर रामास्वामी के बारे में झूठ बोल रही हैं।
रामास्वामी ने कहा कि अगर इस्राइल को कभी भविष्य में अमेरिकी वित्तीय सहायता की जरूरत नहीं पड़ती है, तो यह उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि जबतक इस्राइल नहीं कहता कि उसे जरूरत नहीं है, तब तक उस दी जाने वाली सहायता में कभी कटौती नहीं की जाएगी।
गौरतलब है, यह सब लगभग एक सप्ताह पहले शुरू हुआ जब हेली ने बहस के मंच पर रामास्वामी पर विदेश नीति का कोई अनुभव नहीं होने का आरोप लगाया था। तब से ओहियो स्थित भारतीय अमेरिकी पर विदेश नीति पर उनकी अनुभवहीनता के लिए मीडिया और उनके राजनीतिक विरोधियों दोनों द्वारा हमला किया जा रहा है।
हेली का वार
मंगलवार को रामास्वामी ने अपनी वेबसाइट पर निक्की हेली के 'नम्रता रंधावा' नाम का इस्तेमाल किया। इस पर हेली ने पलटवार किया कहा कि मैं इन बचकाने खेल में शामिल नहीं होने जा रहा हूं। यह बहुत दयनीय है। सबसे पहले, मेरे जन्म प्रमाण पत्र पर निक्की नाम है और शादी होने के बाद मेरा नाम निक्की हेली हुआ। हेली ने आगे कहा कि उन्हें जो करना है जो बोलना है, बोलें। मैं कुछ नहीं कह रही। लेकिन यह सच है कि उन्होंने इस्राइल को नजरअंदाज करने की बात कही थी।
हेली ने कहा कि ऐसा नहीं है कि इस्राइल को अमेरिका की जरूरत है। यह दोनों ओर से समान है। अमेरिका को भी इस्राइल की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि इस्राइल को हमास से, हिजबुल्लाह से, ईरान से, सीरिया से नरसंहार के खतरों का सामना करना पड़ता है। आपको एक ऐसे राष्ट्रपति की जरूरत है जो यह समझता हो कि जब ईरान में इस्लामी आतंकवाद से निपटने की बात आती है तो इस्राइल सबसे आगे है, जो मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि वह इस बात को समझ ही नहीं पा रहे हैं।
रामास्वामी का पलटवार
बाद में, रामास्वामी के अभियान ने हेली के खिलाफ एक बयान जारी किया। कहा गया कि हम यह देखते हुए कि संयुक्त राष्ट्र में थोड़े से ही समय में अमेरिकी राजदूत के रूप में उन्होंने तेजी से संपत्ति जुटाई है। इसके लिए राजदूत हेली और उनके परिवार को निजी क्षेत्र में उनके भविष्य के करियर के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
रामास्वामी ने कहा कि इस्राइल के साथ अमेरिकी संबंध इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय रिश्ते को कैसे काम करने चाहिए।