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AI: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के खतरों से मिलकर निपटेंगे भारत-अमेरिका, पीएम मोदी ने किया था बार-बार जिक्र
Sat, 22 Jul 2023 08:46 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 22 Jul 2023 08:46 AM IST
सार
आरती प्रभाकर ने कहा कि हालिया पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच भी एआई तकनीक पर बात हुई।
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जो बाइडन की वैज्ञानिक सलाहकार आरती प्रभाकर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की वैज्ञानिक सलाहकार भारतीय मूल की आरती प्रभाकर का कहना है कि अमेरिका और समान सोच वाले देशों जैसे भारत को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। बता दें कि अमेरिका की सरकार तकनीक की दिग्गज कंपनियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल ना हो। इसके लिए शुक्रवार को तकनीकी कंपनियां साथ आईं और उन्होंने सरकार के साथ बातचीत की।
एआई पर क्या बोंली आरती प्रभाकर
इस दौरान आरती प्रभाकर ने कहा कि यह वैश्विक तकनीक का दौर है और तकनीक आज हर जगह है। सभी लोग इसमें शामिल हैं और तकनीक हर किसी की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। ऐसे में हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि समान सोच वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, उनके साथ मिलकर एआई तकनीक के क्षेत्र में काम किया जाए। आरती प्रभाकर ने कहा कि हालिया पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच भी एआई तकनीक पर बात हुई।
पीएम मोदी ने भी किया था बार-बार जिक्र
आरती प्रभाकर ने कहा कि जब वैश्विक नेता, राष्ट्रपति जो बाइडन से मिलते हैं तो उनके दिमाग में एआई का भी मुद्दा होता है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था, तब भी उन्होंने एआई पर बात की। साथ ही स्टेट डिनर और अन्य कार्यक्रमों में भी पीएम मोदी ने बार-बार एआई की बात की।
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ये भी पढ़ें- USA: व्हाइट हाउस ने कहा- भारत के साथ अमेरिका के संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत, PM मोदी की यात्रा महत्वपूर्ण
एआई तकनीक के नुकसानों को रोकने की चुनौती
डॉ. प्रभाकर ने कहा कि हम इस दिशा में काम कर रहे हैं कि कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाए और आज इस दिशा में अहम प्रगति हुई है। हम एआई के लिए कानून बनाने की भी तैयारी कर रहे हैं। इससे एआई के नुकसानों से निपटने की हमारी क्षमता में इजाफा होगा। हम एआई के सुरक्षित और विश्वासपात्र बनाना चाहते हैं ताकि यह लोगों की बेहतरी में इस्तेमाल हो सके।
तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही सरकार
बता दें कि शुक्रवार को जिन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अमेरिकी सरकार से मुलाकात की, उनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा, और कुछ अन्य छोटी एआई कंपनियों के प्रतिनिधि थे। आरती प्रभाकर ने कहा कि एआई तकनीक से धोखाधड़ी आसान हो गई है। साइबर अपराध बढ़ रहे हैं और समय के साथ ये बढ़ते जाएंगे। ऐसे में हम एआई तकनीक के नुकसानों को रोकने और इससे होने वाले फायदों को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रभाकर ने कहा कि एआई मौजूदा समय की सबसे ताकतवर तकनीक है।
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एआई पर क्या बोंली आरती प्रभाकर
इस दौरान आरती प्रभाकर ने कहा कि यह वैश्विक तकनीक का दौर है और तकनीक आज हर जगह है। सभी लोग इसमें शामिल हैं और तकनीक हर किसी की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। ऐसे में हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि समान सोच वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, उनके साथ मिलकर एआई तकनीक के क्षेत्र में काम किया जाए। आरती प्रभाकर ने कहा कि हालिया पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच भी एआई तकनीक पर बात हुई।
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पीएम मोदी ने भी किया था बार-बार जिक्र
आरती प्रभाकर ने कहा कि जब वैश्विक नेता, राष्ट्रपति जो बाइडन से मिलते हैं तो उनके दिमाग में एआई का भी मुद्दा होता है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था, तब भी उन्होंने एआई पर बात की। साथ ही स्टेट डिनर और अन्य कार्यक्रमों में भी पीएम मोदी ने बार-बार एआई की बात की।
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एआई तकनीक के नुकसानों को रोकने की चुनौती
डॉ. प्रभाकर ने कहा कि हम इस दिशा में काम कर रहे हैं कि कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाए और आज इस दिशा में अहम प्रगति हुई है। हम एआई के लिए कानून बनाने की भी तैयारी कर रहे हैं। इससे एआई के नुकसानों से निपटने की हमारी क्षमता में इजाफा होगा। हम एआई के सुरक्षित और विश्वासपात्र बनाना चाहते हैं ताकि यह लोगों की बेहतरी में इस्तेमाल हो सके।
तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही सरकार
बता दें कि शुक्रवार को जिन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अमेरिकी सरकार से मुलाकात की, उनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा, और कुछ अन्य छोटी एआई कंपनियों के प्रतिनिधि थे। आरती प्रभाकर ने कहा कि एआई तकनीक से धोखाधड़ी आसान हो गई है। साइबर अपराध बढ़ रहे हैं और समय के साथ ये बढ़ते जाएंगे। ऐसे में हम एआई तकनीक के नुकसानों को रोकने और इससे होने वाले फायदों को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रभाकर ने कहा कि एआई मौजूदा समय की सबसे ताकतवर तकनीक है।