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India-US Ties: तल्खी के बीच ट्रंप के मंत्री के बेतुके बोल, भारत का नाम लेकर कहा- कुछ देशों को सुधारना जरूरी

Sun, 28 Sep 2025 08:48 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 28 Sep 2025 08:48 PM IST
सार

भारत और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ट्रंप के करीबी हावर्ड लुटनिक ने एक विवादित टिप्पणी कर अपना बड़बोलापन दिखाया है। लुटनिक ने कहा कि भारत, ब्राजील जैसे देशों को सुधारने की जरूरत है। उन्होंने टैरिफ विवाद पर बोलते हुए कहा कि यदि अमेरिकी बाजार में व्यापार करना है, तो अमेरिका के शर्तों पर चलना होगा।

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India US Trump minister makes absurd remarks amid tensions mentions India says some countries need reformed
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के चलते दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है। इसी बीच एक बार फिर अमेरिका के वाणिज्य मंत्री और राष्ट्रपति ट्र्ंप के करीबी माने जाने वाले हावर्ड लुटनिक का बड़बोलापन देखने को मिला है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि कुछ देशों को सुधारने की जरूरत है। लुटनिक ने अपने बयान में भारत, बाजील जैसे देशों का नाम लिया। 

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लुटनिक ने अपने बड़बोलेपन में यहां तक कह दिया कि अमेरिका को भारत, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों को सुधारने की जरूरत होगी। उनका कहना है कि इन देशों को अमेरिकी हितों के खिलाफ कदम उठाने बंद करने चाहिए और अपने बाजार अमेरिका के लिए खोलने चाहिए।

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अमेरिकी बाजार को लेकर क्या बोले लुटनिक?
इसके साथ ही लुटनिक ने कहा कि भारत, ब्राजील, स्विट्जरलैंड जैसे देशों को अमेरिका के साथ सही तरीके से पेश आना चाहिए। अगर वे अमेरिकी उपभोक्ताओं को अपने उत्पाद बेचना चाहते हैं, तो उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति की शर्तों पर चलना होगा। बता दें कि ये पूरा मामला टैरिफ तनाव से जुड़ा है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% तक के टैरिफ लगाए, जिनमें रूसी तेल की खरीद पर 25% शुल्क भी शामिल है। यह विश्व में किसी भी देश पर लगाए गए सबसे अधिक शुल्कों में से एक है।

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भारत पहले ही साफ कर चुका है अपना रुख
देखा जाए तो अमेरिका के इस फैसले की भारत ने हमेशा से ही आलोचना की है। साथ ही मामले में अपने रुख साफ किया है कि उसका ऊर्जा खरीद नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित और बाजार की स्थिति पर आधारित है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया, जो उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है।


हालांकि एक तरफ जहां तनाव के माहौल बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापार मोर्चे पर भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत बने हुए हैं। 2024-25 में अमेरिका लगातार चौथे साल भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा, दोनों देशों के बीच 131.84 अरब डॉलर का व्यापार हुआ।

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द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर जारी है बातचीत
गौरतलब है कि टैरिफ के चलते तनाव के बीच भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसका पहला चरण अक्तबूर-नवंबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। दोनों देश 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहे हैं। हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क गया था और 16 सितंबर को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय के अधिकारी भारत दौरे पर आए थे, जहां व्यापार समझौते पर चर्चा हुई।

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