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UNSC: परोक्ष वीटो को लेकर भारत का चीन पर निशाना, वैश्विक आतंकियों के सूचीबद्ध नहीं होने की भी बताई वजह

Thu, 25 Apr 2024 04:56 AM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 25 Apr 2024 04:56 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, हममें से जो लोग मंजूरी समितियों की कार्य प्रणाली और ‘रोक व अवरोध’ लगाने की इसकी परंपरा से परिचित हैं, वे जानते हैं कि ये उन मामलों पर एक प्रकार की छिपी हुई वीटो शक्ति हैं।

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India targets China in UNSC regarding indirect veto
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज - फोटो : एक्स/रुचिरा कंबोज

विस्तार

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चीन पर परोक्ष रूप से निशाना साधा है। भारत ने उस पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समितियों में प्रस्तावों पर लगाई गईं रोक एक प्रकार का ‘छिपा हुआ वीटो’ है और इसकी आड़ में पाकिस्तान स्थित वैश्विक आतंकियों को सूचीबद्ध करने जैसे मामलों पर परिषद के कुछ सदस्य देश कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे।

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संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा, किसी भी संस्थान के काम करने के तरीकों को उसके सामने आने वाली चुनौतियों का जवाब देना चाहिए। साथ ही, बढ़ती हुई चुनौतियों का मुकाबला करने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रिकॉर्ड काफी निराशाजनक रहा है। कंबोज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) द्वारा ‘वीटो पहल- संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को मजबूत करना’ प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अपनाने की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर महासभा में कहा, सुरक्षा परिषद ने वीटो को छिपाने के लिए अपने कामकाज के तरीके का उपयोग किया। उसने इस काम को अपनी समितियों की तदर्थ कार्य प्रणालियों के माध्यम से छिपाने का प्रयास किया, जो उसकी तरफ से काम तो करती है लेकिन उसकी जवाबदेही बहुत कम है। 
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चीनी रोक पर तीखी टिप्पणी
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, हममें से जो लोग मंजूरी समितियों की कार्य प्रणाली और ‘रोक व अवरोध’ लगाने की इसकी परंपरा से परिचित हैं, वे जानते हैं कि ये उन मामलों पर एक प्रकार की छिपी हुई वीटो शक्ति हैं। इन पर कुछ परिषद सदस्य कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे और उन्हें अपने निर्णयों की व्याख्या करने की जरूरत नहीं होती है। यह टिप्पणी चीन के संदर्भ में है, क्योंकि उसने सुरक्षा परिषद में आतंकियों को नामित करने के लिए भारत व अमेरिकी प्रस्तावों पर बार-बार रोक लगाई है। 
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संघर्ष-संबंधित यौन हिंसा से निपटना अहम
कंबोज ने बुधवार को यूएनएससी में संघर्ष-संबंधित यौन हिंसा (सीआरएसवी) को रोकने पर एक खुली बहस को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, महिला शांति-सुरक्षा एजेंडे के प्रति भारत का समर्पण संघर्ष संबंधी यौन हिंसा का मुकाबला करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण दिखाता है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग, राष्ट्रीय नीति सुधार और जमीनी स्तर की पहल शामिल हैं। भारतीय महिला शांति सैनिकों ने संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा को रोकने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है।

आम सहमति पर जोर
कंबोज ने कहा, यूएनजीए प्रस्ताव में परिषद के कामकाज के तरीकों की अपारदर्शिता को संबोधित करने और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को प्रतिबिंबित करने वाली भावना का स्वागत है। इसलिए हम चाहेंगे कि इन प्रयासों को ऐसे करें, ताकि उंगली उठाने के बजाय आम सहमति बनाने का सकारात्मक माहौल बने।


रुचिरा कंबोज ने महिलाओं की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को लेकर बात की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, राष्ट्रीय नीति सुधारों और जमीनी स्तर की पहल के लिए देश के समर्पण पर जोर दिया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा महिलाओं के लिए राष्ट्रीय व राज्य विधानसभाओं में 1/3 सीटें आरक्षित करने के लिए संविधान संशोधन का भी जिक्र किया।

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