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पश्चिम एशिया संकट: एनएसए डोभाल बोले- तनाव से डगमगाया वैश्विक व्यापार, भारत शांति बहाल करने के लिए तैयार

Fri, 29 May 2026 03:30 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, मॉस्को
एएनआई, मॉस्को Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 29 May 2026 03:30 AM IST
सार

मॉस्को सुरक्षा सम्मेलन में भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने पश्चिम एशिया संकट पर चिंता जताते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में सुरक्षित व्यापार की मांग की है। उन्होंने ईरान-अमेरिका तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र के 1945 के पुराने ढांचे में तत्काल सुधार की बात कही, जिसका समर्थन पीएम मोदी भी कर चुके हैं।
 

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india stands ready to support efforts to reduce tensions doval calls for uninterrupted flow of trade
अजीत डोभाल, भारत के एनएसए - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई है। मॉस्को में आयोजित सुरक्षा मामलों के उच्च पदस्थ अधिकारियों की बैठक में भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने वैश्विक व्यापार को बिना किसी बाधा के जारी रखने की जोरदार वकालत की। उन्होंने खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
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तेल-गैस सप्लाई ठप होने से दुनिया संकट में
अजीत डोभाल ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का जिक्र करना इस समय बेहद जरूरी है। क्षेत्र में जारी तनाव गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। समुद्री यातायात पर मंडराता खतरा और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में आ रही रुकावटें यह दर्शाती हैं कि मौजूदा स्थिति कितनी नाजुक है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के जरिए होने वाला अंतरराष्ट्रीय व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है। भारत इस तनाव को कम करने और क्षेत्र में शांति बहाली के हर प्रयास में रचनात्मक योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य बना नया फ्लैशपॉइंट
यह संकट तब और गहरा गया जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला कर दिया। इसके जवाब में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर दी, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई। ईरान इस कदम के जरिए अमेरिका पर संघर्षविराम का दबाव बना रहा है।
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भू-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ईरान अब ओमान के साथ मिलकर इस जलमार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर एक टोलिंग प्रणाली लागू करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अमेरिका ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ऐसी किसी भी टोलिंग प्रणाली को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

यह भी पढ़ें: अमेरिका का फरमान: ईरानी विमानों की लैंडिंग और रीफ्यूलिंग पर सख्त पाबंदी, मदद करने वाले देशों पर भी गिरेगी गाज


संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर उठे सवाल
बैठक में अजीत डोभाल ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस समय गहरे संकट से गुजर रहा है। साल 1945 में बने इसके पुराने ढांचे आज की वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। इसलिए संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने के लिए इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की वकालत की थी। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में पीएम मोदी ने कहा था कि यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, भारत हमेशा शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में बदलाव अब बेहद जरूरी हो चुका है। 


 
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