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ग्लोबल स्टॉकटेक: भारत ने अमीर देशों की आलोचना की, जलवायु परिवर्तन पर निष्क्रियता का लगाया आरोप

Fri, 29 Sep 2023 12:27 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 29 Sep 2023 12:27 PM IST
सार

भारत ने कहा कि ग्लोबल स्टॉकटेक के परिणामों को दुनिया से गरीबी उन्मूलन, सतत विकास, आर्थिक विविधीकरण प्रयासों के साथ ही विकसित और विकासशील देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक अंतरों को कम करने को बढ़ावा देना चाहिए। 

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india slam rich nations on climate inaction call for focus on pre 2020 gaps global stocktake
जलवायु परिवर्तन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत ने कहा है कि पहले ग्लोबल स्टॉकटेक की प्राथमिकता 2020 से पहले के अंतरालों को निदान करना, इक्विटी लाना और विकसित देशों की जलवायु के प्रति निष्क्रियता की कमी के बारे में बताना होना चाहिए। बता दें कि ग्लोबल स्टॉकटेक, संयुक्त राष्ट्र की दो वर्षीय  समीक्षा है, जिसमें पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है, इसकी समीक्षा की जाएगी। यह समीक्षा दुबई COP28 के अंत तक पूरी होगी। 
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भारत ने विकसित देशों की आलोचना की
यूएन के 'यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेंट चेंज' में अपनी अपेक्षाओं को रेखांकित करते हुए भारत ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित देशों को उनकी जिम्मेदारियों के मुताबिक अपने उत्सर्जन को कम करने और वित्त, प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण के मामले में विकासशील देशों की मदद और क्षमता निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। भारत ने कहा कि ग्लोबल स्टॉकटेक के परिणामों को दुनिया से गरीबी उन्मूलन, सतत विकास, आर्थिक विविधीकरण प्रयासों के साथ ही विकसित और विकासशील देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक अंतरों को कम करने को बढ़ावा देना चाहिए। 
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'पूर्व में हुए उत्सर्जन की अनदेखी नहीं होनी चाहिए'
भारत ने कहा कि ग्लोबल स्टॉकटेक के परिणामों को ऐतिहासिक जिम्मेदारियों और 2020 से पहले के उत्सर्जन की अनदेखी करके सिर्फ भविष्य की मध्यस्थता पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। पेरिस समझौते की अखंडता की रक्षा करते हुए 2020 से पहले के अंतराल को प्राथमिकता के रूप में संबोधित किया जाना चाहिए। भारत ने कहा कि समानता का सिद्धांत यह  सुनिश्चित करता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित देशों के पूर्व में, वर्तमान में और भविष्य में होने वाले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का भी ध्यान रखा जाएगा। 
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पेरिस समझौते का गलत फायदा उठा रहे विकसित देश
भारत ने संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज में दिए अपने सबमिशन में कहा कि यह अनुचित है कि कुछ विकसित देश पेरिस समझौते के एक अनुच्छेद की आड़ में विकासशील देशों में जीवाश्म ईंधन के विकास को बाधित कर रहे हैं और खुद जीवाश्म ईंधन में निवेश कर रहे हैं। भारत ने कहा कि विकसित देश पेरिस समझौते के अनुच्छेद 2.1(सी) को अलग-थलग करके देख रहे हैं और जलवायु वित्त पर अन्य सभी प्रावधानों की अनदेखी कर रहे हैं और विकासशील देशों को धन उपलब्ध  कराने की अपनी प्रतिबद्धताओं से दूर जा रहे हैं। 

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