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COP 29: भारत की अमीर देशों से मांग, कहा- वैश्विक दक्षिण में जलवायु न्याय के सिद्धांत पर आधारित हो वित्त लक्ष्य
Tue, 19 Nov 2024 08:52 PM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाकू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाकू
Published by: बशु जैन
Updated Tue, 19 Nov 2024 08:52 PM IST
सार
भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि कुछ विकसित देशों के प्रतिबंधात्मक एकतरफा व्यापार उपाय विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई में बाधा डाल रहे हैं।
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कॉप-29 (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अजरबैजान के बाकू में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के 29वें सम्मेलन में मंगलवार को भारत ने कहा कि वैश्विक दक्षिण के लिए नए जलवायु वित्त लक्ष्य को जलवायु न्याय के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। भारत ने अमीर देशों से मांग की कि वे शमन में अग्रणी भूमिका निभाएं और विकासशील देशों के लिए पर्याप्त कार्बन स्पेस दें।
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भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि कुछ विकसित देशों के प्रतिबंधात्मक एकतरफा व्यापार उपाय विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम यहां नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर जो भी निर्णय लेते हैं, वह जलवायु न्याय के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए। यह निर्णय महत्वाकांक्षी और स्पष्ट हों, जिसमें विकासशील देशों की उभरती जरूरतों और प्राथमिकताओं और सतत विकास और गरीबी उन्मूलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को ध्यान में रखा जाए।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक दक्षिण में जलवायु महत्वाकांक्षा को बढ़ाने के लिए मुफ्त ग्रीन टेक्नोलॉजी और वित्त उपलब्धता जरूरी है। मगर कुछ विकसित देशों ने एकतरफा उपायों का सहारा लिया है। इससे वैश्विक दक्षिण देशों के लिए जलवायु कार्रवाई और अधिक कठिन हो गई है। हम जिस उभरती स्थिति में हैं, वैश्विक दक्षिण में प्रौद्योगिकी, वित्त और क्षमता के प्रवाह के लिए सभी बाधाओं को तोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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सिंह ने कहा कि दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए कार्बन बजट का उल्लंघन करने जा रही है। इसलिए विकसित देशों को अपने शुद्ध शून्य लक्ष्यों को आगे बढ़ाकर और हमारे जैसे विकासशील देशों के विकास के लिए पर्याप्त कार्बन स्थान प्रदान करके शमन कार्यों में नेतृत्व दिखाना चाहिए।
'मजबूत और सतत भविष्य बनाने के लिए आवश्यक'
भारत ने सोमवार को अमीर देशों से अपील की थी कि वे तकनीकी हस्तांतरण पर लगी बाधाएं खत्म करें, जलवायु वित्त (क्लाइमेट फाइनेंस) में बढ़ोतरी करें, और जलवायु कार्रवाई के नाम पर लागू किए जा रहे अनुचित व्यापारिक कदमों से बचें। यह अपील संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता (यूएन क्लाइमेट टॉक्स) में 2030 से पहले के लक्ष्यों पर आयोजित एक उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक में की गई थी। भारत की पर्यावरण सचिव लीना नंदन ने अमीर देशों से कहा था कि वे उत्सर्जन में कटौती और 2030 तक नेट-जीरो हासिल करने में नेतृत्व दिखाएं।