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Sri Lanka: दुनिया के सबसे खाली एयरपोर्ट को संभालेगा भारत-रूस का संयुक्त उद्यम, घाटे में चल रहा है यह एयरपोर्ट

Wed, 03 Jul 2024 09:05 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 03 Jul 2024 09:05 PM IST
सार

श्रीलंका के विमानन मंत्री निमल सिरिपाला डी सिल्वा ने हंबनटोटा में घाटे में चल रहे मट्टाला अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को चलाने के लिए अगले कुछ हफ्तों के दौरान भारत-रूस के संयुक्त उद्यम को सौंप देगा।

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India-Russia joint venture to get to run Mattala airport in Sri Lanka soon: Aviation minister
घाटे में चल रहा है श्रीलंका का मट्टाला एयरपोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

भारत-रूस संयुक्त उद्यम को अप्रैल में दक्षिणी श्रीलंका के हंबनटोटा में मट्टाला अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का प्रबंधन सौंपा गया था। 209 मिलियन अमरीकी डॉलर की लागत वाली इस सुविधा को कभी उड़ानों की कमी के कारण 'दुनिया का सबसे खाली हवाई अड्डा' कहा जाता था। श्रीलंका के विमानन मंत्री डी सिल्वा ने पत्रकारों से कहा,  कि घाटे में चल रहे मट्टाला अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को भारत-रूस संयुक्त उद्यम को सौंपने के लिए अगले कुछ हफ्तों के दौरान कार्रवाई की जाएगी।
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30 साल के लिए दोनों उद्यम को सौंपा गया
इससे पहले, 9 जनवरी को हुई श्रीलंकाई कैबिनेट ने संभावित पक्षों की तरफ से रुचि पत्र आमंत्रित करने को मंजूरी दी थी। इसलिए पांच प्रस्ताव प्राप्त हुए, और कैबिनेट की तरफ से नियुक्त सलाहकार समिति ने भारत की शौर्य एयरोनॉटिक्स (प्राइवेट) लिमिटेड और रूस की एयरपोर्ट्स ऑफ रीजन्स मैनेजमेंट कंपनी को 30 साल का प्रबंधन अनुबंध देने का फैसला किया।
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राजपक्षे परिवार का गृहनगर हंबनटोटा 
मट्टाला हवाई अड्डा, जिसका नाम देश के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नाम पर रखा गया है, राजपक्षे के लगभग एक दशक लंबे शासन की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक था। हंबनटोटा राजपक्षे परिवार का गृहनगर है, जो 2022 में द्वीप राष्ट्र में अभूतपूर्व वित्तीय उथल-पुथल से पहले काफी शक्ति रखता था।
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2016 से सरकार तलाश रही थी भागीदार
इस परियोजना को उच्च-ब्याज वाले चीनी वाणिज्यिक ऋणों के माध्यम से वित्त पोषित किया गया था। इसे 209 मिलियन अमरीकी डालर की लागत से बनाया गया था, जिसमें से 190 मिलियन अमरीकी डालर चीन के एक्ज़िम बैंक से उच्च-ब्याज ऋण से आए थे। हालांकि, 2016 से सरकार हवाई अड्डे के प्रबंधन के लिए वाणिज्यिक भागीदारों की तलाश कर रही है क्योंकि यह भारी घाटे में चल रहा था। बुधवार को विमानन मंत्री ने यह भी कहा कि 69 मिलियन अमेरिकी डॉलर की भारतीय सहायता से उत्तरी कांकेसंतुराई बंदरगाह का विकास जारी है।
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