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यूएनएससी में भारत ने उठाया आतंकी संगठनों में बच्चों को भर्ती किए जाने का मुद्दा
Sat, 30 Jan 2021 04:07 AM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 30 Jan 2021 04:07 AM IST
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
- फोटो : UNSC
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भारत ने कहा है कि बच्चों के लिए ‘विदेशी आतंकवादी लड़ाके’ शब्द का इस्तेमाल करने से उन्हें कलंकित करने तथा उनके प्रति अमानवीयता बरतने जैसा है। इसके साथ ही भारत ने सशस्त्र संघर्षों से प्रभावित किशोर बच्चों को उनके देश भेजने, उनके पुनर्वास तथा उनके परिवारों से उन्हें दोबारा मिलाने जैसे पहले से तैयार एवं संघर्षों के लिहाज से संवेदनशील तरीकों को अपनाने पर जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी उप प्रतिनिधि राजदूत के नागराज नायडू ने संरा सुरक्षा परिषद की ‘बच्चे एवं सशस्त्र संघर्ष’ विषय पर ओपन एरिया फार्मूला बैठक में कहा कि परिषद का संकल्प 2178 (2014) विदेशी आतंकवादी लड़ाके (एफटीएफ) शब्द को परिभाषित करता है। नायडू ने कहा, उनके परिवारों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करने का आम चलन है। हालांकि, एफटीएफ शब्द का इस्तेमाल बच्चों के लिए करना उन्हें कलंकित करने तथा उनके प्रति अमानवीय रुख अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।
उन्होंने बैठक में कहा कि भारत मानता है कि विदेशी आतंकवादी लड़ाकों के बच्चों के अभियोजन, वापसी और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों द्वारा अनुकूल, संघर्षों के संदर्भ में संवेदनशील प्रयासों की तत्काल जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, कई बच्चों का कानूनी दस्तावेजीकरण नहीं होने से स्थिति और जटिल हो गई है। ऐसा भी हो सकता है कि किसी सदस्य देश की कट्टरता को समाप्त करने या पुन: एकीकरण की कोई नीति ही नहीं हो।
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नागराज नायडू ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद में नया ट्रेंड उभरकर सामने आ रहा है। आतंकी संगठन अपने नापाक इरादों के लिए अब बच्चों की भर्ती कर रहे हैं।
आतंकी संगठनों के लिए बच्चों को फुसलाना सबसे आसान है, चाहे बात आतंकी गतिविधियों में उन्हें शामिल करने की हो या उन्हें ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने की।
उन्होंने कहा, भारत की सोच है कि ऐसे आतंकी संगठनों की जल्द पहचान हो, उनके खिलाफ कार्रवाई हो, जो अपने नापाक इरादों के लिए बच्चों को इस्तेमाल कर रहे हैं।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी उप प्रतिनिधि राजदूत के नागराज नायडू ने संरा सुरक्षा परिषद की ‘बच्चे एवं सशस्त्र संघर्ष’ विषय पर ओपन एरिया फार्मूला बैठक में कहा कि परिषद का संकल्प 2178 (2014) विदेशी आतंकवादी लड़ाके (एफटीएफ) शब्द को परिभाषित करता है। नायडू ने कहा, उनके परिवारों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करने का आम चलन है। हालांकि, एफटीएफ शब्द का इस्तेमाल बच्चों के लिए करना उन्हें कलंकित करने तथा उनके प्रति अमानवीय रुख अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।
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उन्होंने बैठक में कहा कि भारत मानता है कि विदेशी आतंकवादी लड़ाकों के बच्चों के अभियोजन, वापसी और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों द्वारा अनुकूल, संघर्षों के संदर्भ में संवेदनशील प्रयासों की तत्काल जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, कई बच्चों का कानूनी दस्तावेजीकरण नहीं होने से स्थिति और जटिल हो गई है। ऐसा भी हो सकता है कि किसी सदस्य देश की कट्टरता को समाप्त करने या पुन: एकीकरण की कोई नीति ही नहीं हो।
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नागराज नायडू ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद में नया ट्रेंड उभरकर सामने आ रहा है। आतंकी संगठन अपने नापाक इरादों के लिए अब बच्चों की भर्ती कर रहे हैं।
आतंकी संगठनों के लिए बच्चों को फुसलाना सबसे आसान है, चाहे बात आतंकी गतिविधियों में उन्हें शामिल करने की हो या उन्हें ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने की।
For terror groups, children are most susceptible to manipulation, whether as active participants in terror or as human shields to protect perpetrators of terror: Ambassador K Nagaraj Naidu, Dy Permanent Representative at United Nations https://t.co/JX5K8jXvn2
— ANI (@ANI) January 29, 2021
उन्होंने कहा, भारत की सोच है कि ऐसे आतंकी संगठनों की जल्द पहचान हो, उनके खिलाफ कार्रवाई हो, जो अपने नापाक इरादों के लिए बच्चों को इस्तेमाल कर रहे हैं।