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होर्मुज पर भारत का रुख क्या?: मुश्किल वैश्विक हालात में UAE के साथ समझौते, विशेषज्ञ बोले- होंगे दूरगामी प्रभाव
Sat, 16 May 2026 05:23 AM IST
Jyoti Bhaskar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Jyoti Bhaskar
Updated Sat, 16 May 2026 05:23 AM IST
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पीएम मोदी की यात्रा के दौरान यूएई के साथ अहम समझौते
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली के लिए भारत हर संभव सहायता देने को तैयार है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात के दौरान मोदी ने आश्वस्त किया कि भारत हर परिस्थिति में यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है और भविष्य में भी ऐसा ही करता रहेगा। उन्होंने होर्मुज से सुरक्षित पारगमन मार्ग और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने के पक्ष में भारत का स्पष्ट रुख भी व्यक्त किया, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के साथ-साथ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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होर्मुज खुला रखना बड़ी प्राथमिकता
पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया की परिस्थितियों का प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहा है। उन्होंने सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से होर्मुज जलमार्ग का जिक्र कर कहा कि इसे खुला और सुरक्षित बनाए रखना भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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मुश्किल वैश्विक हालात में हुए हैं महत्वपूर्ण समझौते
एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े ये करार ऐसे समय हुए हैं जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। हाल ही में देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचत की अपील की थी, जिनमें घर से काम करना, कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे उपाय शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर जोर दिया और कहा कि भारत शांति और स्थिरता के लिए हर संभव सहयोग देने कि लिए तैयार है। साथ ही इस पर विशेष जोर दिया कि होर््मुज जलमार्ग में सुरक्षित व स्वतंत्र नौवहन अनिवार्य है। इस दौरान नाह्यान ने भी पीएम मोदी की बातों पर सहमति जताई।
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देखने को मिलेगा दूरगामी प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा को को रणनीतिक विशेषज्ञ काफी अहम मान रहे हैं। रणनीतिक व सामरिक विशेषक्षों का कहना है कि इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े जो भी अहम समझौते हुए हैं, उनके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ये समझौते भारत को मौजूदा ऊर्जा संकट से राहत दिलाने वाले साबित होेंगे। साथ ही आने वाले समय में इसका असर भारत में साफ दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी करीब 87% कच्चे तेल की जरूरत विदेशों से पूरी करता है। इस दृष्टि से भी यूएई से हुआ समझौता महत्वपूर्ण है।