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India Iran: तेहरान में विदेश सचिव क्वात्रा और ईरान के विदेश मंत्री की मुलाकात; द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत
Sun, 26 Nov 2023 10:06 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 26 Nov 2023 10:06 PM IST
सार
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, चाबहार बंदरगाह के माध्यम से कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने समेत कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात हुई।
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भारत और ईरान के उच्च अधिकारियों की मुलाकात (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
विदेश मंत्रालय ने बताया है कि भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर ईरान के विदेश मंत्री और विदेश सचिव क्वात्रा के बीच विस्तार से बातें हुईं। रविवार को हुई मुलाकात के बाद जारी बयान के अनुसार भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह से जुड़े मुद्दों के अलावा पश्चिमी एशिया (मध्य पूर्व) के हालात पर भी बातें हुईं।
ईरान के विदेश मंत्री के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान विदेश सचिव क्वात्रा ने हमास-इस्राइल संघर्ष से उत्पन्न हालात पर भी चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया, दोनों पक्ष भारत और ईरान के सहयोग को और मजबूत करने पर सहमत हुए।
बागची ने कहा, तेहरान में विदेश सचिव विनय क्वात्रा और ईरान के विदेश मंत्री अमीराबदोलाहियान की मुलाकात के दौरान चाबहार बंदरगाह सहित कई और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर चर्चा की गई। मौजूदा चुनौतियों पर दोनों देशों ने अपने दृष्टिकोण भी साझा किए।
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बता दें कि विनय क्वात्रा की तेहरान यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान के विदेश मंत्री के साथ उनकी बैठक हमास और इस्राइल के हिंसक संघर्ष के बीच हुई है। दोनों पक्षों के बीच बीते 50 दिनों से टकराव जारी है। दोनों की शत्रुता के कारण वैश्विक चिंताएं भी बढ़ रही हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि तेहरान में क्वात्रा ने ईरान के उप विदेश मंत्री मेहदी सफारी से भी मुलाकात की। सफारी आर्थिक कूटनीति के मामलों को भी देखते हैं। दोनों की मुलाकात के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत की भागीदारी को ठोस स्वरूप देने पर भी बातें हुईं। दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने के उपायों पर भी मंथन हुआ।
बता दें कि चाबहार बंदरगाह कनेक्टिविटी और व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने के नजरिए से बेहद अहम है। भारत और ईरान मिलकर इसका विकास कर रहे हैं। हालांकि, इस पर चीन की भी नजरें हैं। दरअसल, चाबहार ऊर्जा संपन्न ईरान के दक्षिणी तट पर है, ऐसे में विस्तारवादी नीतियों वाला देश चीन सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के इस बंदरगाह पर भी अपनी हेकड़ी दिखाने की ताक में है। भौगोलिक रूप से संवेदनशील इस जगह को लेकर पाकिस्तान और चीन के रूख अक्सर चर्चा में रहे हैं।
गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर साल 2021 में उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद दौरे पर गए थे। उन्होंने चाबहार को प्रमुख क्षेत्रीय रास्ते / पारगमन केंद्र (Transit) के रूप में पेश किया था। इस कनेक्टिविटी सम्मेलन में इस बात का भी जिक्र हुआ था कि चाबहार बंदरगाह से भारत-ईरान के अलावा अफगानिस्तान व अन्य क्षेत्रीय ताकतों के हित भी जुड़े हैं।
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ईरान के विदेश मंत्री के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान विदेश सचिव क्वात्रा ने हमास-इस्राइल संघर्ष से उत्पन्न हालात पर भी चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया, दोनों पक्ष भारत और ईरान के सहयोग को और मजबूत करने पर सहमत हुए।
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बागची ने कहा, तेहरान में विदेश सचिव विनय क्वात्रा और ईरान के विदेश मंत्री अमीराबदोलाहियान की मुलाकात के दौरान चाबहार बंदरगाह सहित कई और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर चर्चा की गई। मौजूदा चुनौतियों पर दोनों देशों ने अपने दृष्टिकोण भी साझा किए।
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बता दें कि विनय क्वात्रा की तेहरान यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान के विदेश मंत्री के साथ उनकी बैठक हमास और इस्राइल के हिंसक संघर्ष के बीच हुई है। दोनों पक्षों के बीच बीते 50 दिनों से टकराव जारी है। दोनों की शत्रुता के कारण वैश्विक चिंताएं भी बढ़ रही हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि तेहरान में क्वात्रा ने ईरान के उप विदेश मंत्री मेहदी सफारी से भी मुलाकात की। सफारी आर्थिक कूटनीति के मामलों को भी देखते हैं। दोनों की मुलाकात के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत की भागीदारी को ठोस स्वरूप देने पर भी बातें हुईं। दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने के उपायों पर भी मंथन हुआ।
बता दें कि चाबहार बंदरगाह कनेक्टिविटी और व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने के नजरिए से बेहद अहम है। भारत और ईरान मिलकर इसका विकास कर रहे हैं। हालांकि, इस पर चीन की भी नजरें हैं। दरअसल, चाबहार ऊर्जा संपन्न ईरान के दक्षिणी तट पर है, ऐसे में विस्तारवादी नीतियों वाला देश चीन सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के इस बंदरगाह पर भी अपनी हेकड़ी दिखाने की ताक में है। भौगोलिक रूप से संवेदनशील इस जगह को लेकर पाकिस्तान और चीन के रूख अक्सर चर्चा में रहे हैं।
गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर साल 2021 में उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद दौरे पर गए थे। उन्होंने चाबहार को प्रमुख क्षेत्रीय रास्ते / पारगमन केंद्र (Transit) के रूप में पेश किया था। इस कनेक्टिविटी सम्मेलन में इस बात का भी जिक्र हुआ था कि चाबहार बंदरगाह से भारत-ईरान के अलावा अफगानिस्तान व अन्य क्षेत्रीय ताकतों के हित भी जुड़े हैं।