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रामायण, संस्कृति और हिंदुत्व: इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने क्यों कही अपने अंदर भारतीय DNA होने की बात, जानें सच
Tue, 28 Jan 2025 03:54 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 28 Jan 2025 03:54 PM IST
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इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
गणतंत्र दिवस पर भारत के मुख्य अतिथि रहे राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एक बैठक के दौरान कहा है कि उनके अंदर भारत का डीएनए मौजूद है। उनके इस बयान के बाद बैठक में साथ मौजूद पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति धनखड़ खिलखिला कर हंस पड़े। प्रबोवो सुबियांतो के इस बयान की पूरे देश में चर्चा जारी है।भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों की बात करते हुए सुबियांतो यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, "भारत और इंडोनेशिया के आपसी संबंधों का इतिहास बेहद पुराना है। दोनों देशों की सभ्यताओं में भी जुड़ाव रहा है, यहां तक कि हमारी भाषा के कई अहम शब्द संस्कृत भाषा के हैं। हमारे कई नाम भी संस्कृत भाषा के हैं। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में भी प्राचीन भारतीय सभ्यता का प्रभाव है। यहां तक कि हमारे जीन्स में भी समानता है।' इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने कहा कि "कुछ हफ्ते पहले ही मैंने अपनी जेनेटिक्स सीक्वेंसिंग और डीएनए टेस्ट कराया। मुझे बताया गया कि मेरा डीएनए भारतीय है। सभी जानते हैं कि जैसे ही मैं भारतीय संगीत सुनता हूं, तभी मैं थिरकना शुरू कर देता हूं।"
सुबियांतो के इस बयान के बाद यह जानना अहम है कि आखिर भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों का दायरा आधुनिक युग से कितना पीछे तक स्थापित है? इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति की छाप कहां-कहां मिलती है? इसके अलावा इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने संस्कृत का जिक्र क्यों किया है? आइये जानते हैं....
क्या है भारत-इंडोनेशिया के रिश्तों का इतिहास?
भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों का इतिहास करीब दो शताब्दियों से भी ज्यादा पुराना है। इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास की वेबसाइट के मुताबिक, यह रिश्ते रामायण और महाभारत के काल से हैं। भारत की तरह ही इंडोनेशिया में लोक कला और नाट्यों में इन दोनों ग्रंथों से जुड़ी घटनाओं का जिक्र मिलता है। इतना ही नहीं इंडोनेशिया में हिंदुत्व, बौद्ध धर्म और बाद में इस्लाम धर्म का आगमन भी भारत से ही हुआ। इंडोनेशिया की बड़ी आबादी एक समय हिंदू-बौद्ध धर्म को मानती थी। हालांकि, समय के साथ इस्लाम धर्म पूरे इंडोनेशिया में प्रसारित हुआ।
भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों का इतिहास करीब दो शताब्दियों से भी ज्यादा पुराना है। इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास की वेबसाइट के मुताबिक, यह रिश्ते रामायण और महाभारत के काल से हैं। भारत की तरह ही इंडोनेशिया में लोक कला और नाट्यों में इन दोनों ग्रंथों से जुड़ी घटनाओं का जिक्र मिलता है। इतना ही नहीं इंडोनेशिया में हिंदुत्व, बौद्ध धर्म और बाद में इस्लाम धर्म का आगमन भी भारत से ही हुआ। इंडोनेशिया की बड़ी आबादी एक समय हिंदू-बौद्ध धर्म को मानती थी। हालांकि, समय के साथ इस्लाम धर्म पूरे इंडोनेशिया में प्रसारित हुआ।
किन भारतीय ग्रंथों का इंडोनेशिया में जिक्र मौजूद?
इंडोनेशिया की सरकारी यूनिवर्सिटी- यूनिवर्सिटास नेगेरी सेमारंग में 2018 में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते रामायण और महाभारत काल से जुड़े होने के कई सबूत मिले हैं। खासकर इंडोनेशिया में मौजूद कलाकृतियां और आर्किटेक्चर, जिनमें भारत की पौराणिक काल के इतिहास का जिक्र मौजूद है।
बताया जाता है कि भारत में प्रचलित त्रेता युग के ग्रंथ- रामायण में जावा का जिक्र मिलता है। रामायण में इस जगह को यवद्वीप के नाम से जाना गया है। यहां प्रभु राम की सेना के प्रमुख सुग्रीव ने माता सीता की खोज के लिए अपनी एक टुकड़ी भेजी थी।
इंडोनेशिया की सरकारी यूनिवर्सिटी- यूनिवर्सिटास नेगेरी सेमारंग में 2018 में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते रामायण और महाभारत काल से जुड़े होने के कई सबूत मिले हैं। खासकर इंडोनेशिया में मौजूद कलाकृतियां और आर्किटेक्चर, जिनमें भारत की पौराणिक काल के इतिहास का जिक्र मौजूद है।
बताया जाता है कि भारत में प्रचलित त्रेता युग के ग्रंथ- रामायण में जावा का जिक्र मिलता है। रामायण में इस जगह को यवद्वीप के नाम से जाना गया है। यहां प्रभु राम की सेना के प्रमुख सुग्रीव ने माता सीता की खोज के लिए अपनी एक टुकड़ी भेजी थी।
इंडोनेशिया नाम में भी भारत की छाप
इसी रिसर्च में कहा गया है कि हिंदू और बौद्ध धर्म भारत से ही इंडोनेशिया में फैले। इन्हीं के जरिए भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रही संस्कृत और ब्राह्मी लिपियों ने भी इंडोनेशिया में जगह बनाई। आज भी इंडोनेशिया में प्रचलित भाषाओं में भारत की संस्कृत से लेकर तमिल शब्दों की झलक तक दिख जाती है।
इस देश में भारत का प्रभाव कितना ज्यादा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेशी यात्रियों ने इंडोनेशिया का नाम भारत के जरिए ही पहचाना गया। इंडोनेशिया नाम लातिन शब्द इंडस (यानी भारत) और ग्रीक शब्द नेसोस (यानी द्वीप) को मिला कर बना। 18वीं सदी से इंडोनेशिया का नाम पूरी दुनिया में चलन में रहा है।
इसी रिसर्च में कहा गया है कि हिंदू और बौद्ध धर्म भारत से ही इंडोनेशिया में फैले। इन्हीं के जरिए भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रही संस्कृत और ब्राह्मी लिपियों ने भी इंडोनेशिया में जगह बनाई। आज भी इंडोनेशिया में प्रचलित भाषाओं में भारत की संस्कृत से लेकर तमिल शब्दों की झलक तक दिख जाती है।
इस देश में भारत का प्रभाव कितना ज्यादा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेशी यात्रियों ने इंडोनेशिया का नाम भारत के जरिए ही पहचाना गया। इंडोनेशिया नाम लातिन शब्द इंडस (यानी भारत) और ग्रीक शब्द नेसोस (यानी द्वीप) को मिला कर बना। 18वीं सदी से इंडोनेशिया का नाम पूरी दुनिया में चलन में रहा है।
इंडोनेशिया के मंदिरों, कलाओं और नाट्यों में भारतीय संस्कृति की झलक
पुरातनकाल के भारतीय संस्कृत और ब्राह्मी अभिलेखों को इंडोनेशिया ले गए। इसी के जरिए रामायाण और महाभारत जैसे ग्रंथों को इंडोनेशिया में प्रचार मिला। आज भी इंडोनेशिया के जावा में नाटकों में कई ओपन थिएटर बने हैं, जहां इंडोनेशिया के मुस्लिम समुदाय के लोग पूर्णिमा पर रामायण से जुड़े नृत्य में हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा इंडोनेशिया में कई मंदिर भी हैं, जिनकी कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखती है।
पुरातनकाल के भारतीय संस्कृत और ब्राह्मी अभिलेखों को इंडोनेशिया ले गए। इसी के जरिए रामायाण और महाभारत जैसे ग्रंथों को इंडोनेशिया में प्रचार मिला। आज भी इंडोनेशिया के जावा में नाटकों में कई ओपन थिएटर बने हैं, जहां इंडोनेशिया के मुस्लिम समुदाय के लोग पूर्णिमा पर रामायण से जुड़े नृत्य में हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा इंडोनेशिया में कई मंदिर भी हैं, जिनकी कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखती है।
नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ने आते थे इंडोनेशिया के लोग
एक और स्टडी के मुताबिक, इंडोनेशिया में जब हिंदू-बौद्ध धर्म पूरी तरह फैला था, तब कई इंडोनेशियाई नागरिक भारत में नालंदा यूनिवर्सिटी में पढ़ने पहुंचते थे। इसी दौरान भारत का प्रभाव भी इंडोनेशिया पर तेजी से बढ़ा था। बताया जाता है कि इंडोनेशिया में प्राचीन समय में हिंदुत्व, मध्यकाल में बौद्ध धर्म और 12वीं सदी के बाद इस्लाम धर्म तेजी से फैला।
इस्लाम धर्म भारत के गुजरात से इंडोनेशिया के सुमात्रा पहुंचा। 15वीं सदी तक यह धर्म पूरे जावा में फैल गया। हालांकि, भारत और इंडोनेशिया का यह जुड़ाव सिर्फ धर्म और कला के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहा। व्यापार के मामले में भी दोनों देशों ने संपर्क जारी रखा। इसके बाद 15वीं सदी से 20वीं सदी का समय ऐसा रहा, जब दोनों देशों के रिश्तों में ठहराव आ गया। इस दौरान संपर्क बरकरार तो रहे, लेकिन यह स्थिर थे।
एक और स्टडी के मुताबिक, इंडोनेशिया में जब हिंदू-बौद्ध धर्म पूरी तरह फैला था, तब कई इंडोनेशियाई नागरिक भारत में नालंदा यूनिवर्सिटी में पढ़ने पहुंचते थे। इसी दौरान भारत का प्रभाव भी इंडोनेशिया पर तेजी से बढ़ा था। बताया जाता है कि इंडोनेशिया में प्राचीन समय में हिंदुत्व, मध्यकाल में बौद्ध धर्म और 12वीं सदी के बाद इस्लाम धर्म तेजी से फैला।
इस्लाम धर्म भारत के गुजरात से इंडोनेशिया के सुमात्रा पहुंचा। 15वीं सदी तक यह धर्म पूरे जावा में फैल गया। हालांकि, भारत और इंडोनेशिया का यह जुड़ाव सिर्फ धर्म और कला के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहा। व्यापार के मामले में भी दोनों देशों ने संपर्क जारी रखा। इसके बाद 15वीं सदी से 20वीं सदी का समय ऐसा रहा, जब दोनों देशों के रिश्तों में ठहराव आ गया। इस दौरान संपर्क बरकरार तो रहे, लेकिन यह स्थिर थे।
रविंद्रनाथ टैगोर ने की संस्कृति की तारीफ और फिर बढ़ निकला करीबी संबंधों का कारवां
- 20वीं सदी में एक बार फिर भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में सुधार की शुरुआत हुई। यही वह दौर था, जब रविंद्रनाथ टैगोर बाली पहुंचे थे और उन्होंने यहां भारतीय संस्कृति की झलक देख इसकी जबरदस्त तारीफ की थी।
- भारत की आजादी के बाद दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बढ़े और पहले गणतंत्र दिवस में भारत ने इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया। 1951 में भारत और इंडोनेशिया ने दोस्ती की संधि पर हस्ताक्षर किए।
- 1955 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो गुट-निरपेक्ष आंदोलन (नॉन-अलाइंड मूवमेंट) के पांच संस्थापकों में शामिल रहे थे।
- 2011 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसिलो बामबांग युधोयोनो गणतंत्र दिवस पर भारत के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए गए थे।