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रक्षा कारोबार: हथियारों के लिए भारत पर निर्भर हो रहे अफ्रीकी देश, 2017 से जल-थल-नभ की सुरक्षा में निभाई भूमिका
Thu, 03 Nov 2022 06:47 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोहानसबर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोहानसबर्ग
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Thu, 03 Nov 2022 06:47 AM IST
सार
2017 से 2021 के दौरान अफ्रीका के तटीय देशों की सामुद्रिक व वायु सुरक्षा और सैन्य जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका रही
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S-400 Air Defense System
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विस्तार
अफ्रीकी देशों की सामुद्रिक और वायु सुरक्षा व रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत एक अहम देश बनकर उभरा है। बीते वर्षों में वह इन देशों के लिए अहम रक्षा व सैन्य उत्पाद निर्यातक बना है। इनमें मॉरीशस, मोजाम्बिक, सेशल्स शामिल हैं, जिन्होंने 2017 से 2021 के दौरान भारत से सबसे ज्यादा रक्षा उत्पाद खरीदे।
यह जानकारी इंडियन एक्जिम बैंक ने अपनी नई रिपोर्ट में दी है। इसमें भारत और दक्षिणी अफ्रीकी देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों को विषय बनाया गया। भारत और अफ्रीकी देशों की बढ़ती साझेदारी पर सीआईआई व एक्जिम बैंक द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कॉन्क्लेव में यह रिपोर्ट जारी हुई। कॉन्क्लेव में विभिन्न सरकारी अधिकारी, उद्योगों के प्रतिनिधि और कारोबारी शामिल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अफ्रीकी देशों की जरूरतों के अनुसार रक्षा सहयोग दे रहा है तो उनकी क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षण और मानवीय मदद में भी शामिल है। उपकरण व जहाजों के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है। एजेंसी
भारत का विश्व में 23वां स्थान
हथियारों के निर्यात का डाटाबेस रखने वाले संस्थान स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार 2017 से 2021 की अवधि में भारत विश्व का 23वां सबसे बड़ा रक्षा निर्यातक बन चुका है।
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संगठनों की मजबूती पर दे रहे जोर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रक्षा मंत्रालय हिंद महासागर के किनारे मौजूद देशों की एसोसिएशन (आईओआरए) को भी मजबूत बना रहा है। इनसे दक्षिण अफ्रीका, केन्या, तंजानिया, मॉरीशस, सेशेल्स और मैडागास्कर में नये प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।
लक्ष्य और निर्यात
-2017 से 2021 के दौरान देश से शस्त्र निर्यात में 6.6 प्रतिशत मॉरीशस, 5 प्रतिशत मोजाम्बिक और 2.3 प्रतिशत सेशेल्स का हिस्सा था।
-टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड के बनाए सैन्य वाहन अफ्रीकी देशों को निर्यात हो रहे हैं।
-समुद्र के भीतर व वायु सुरक्षा और निगरानी काम आने वाले मानव रहित उपकरण, ड्रोन, भी निर्यात हो सकते हैं।
-2025 तक भारत ने अपना रक्षा निर्यात 500 करोड़ डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
-हिंद महासागर क्षेत्र के नौ तटीय अफ्रीकी देशों के समूह (आईओएलसी) सहित कई अन्य देशों को सुरक्षित सामुद्रिक वातावरण भारत देता आया है।
-आईओएलसी देश केन्या, कोमोरोस, मैडागास्कर, मॉरिशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और सोमालिया हैं।
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यह जानकारी इंडियन एक्जिम बैंक ने अपनी नई रिपोर्ट में दी है। इसमें भारत और दक्षिणी अफ्रीकी देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों को विषय बनाया गया। भारत और अफ्रीकी देशों की बढ़ती साझेदारी पर सीआईआई व एक्जिम बैंक द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कॉन्क्लेव में यह रिपोर्ट जारी हुई। कॉन्क्लेव में विभिन्न सरकारी अधिकारी, उद्योगों के प्रतिनिधि और कारोबारी शामिल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अफ्रीकी देशों की जरूरतों के अनुसार रक्षा सहयोग दे रहा है तो उनकी क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षण और मानवीय मदद में भी शामिल है। उपकरण व जहाजों के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है। एजेंसी
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भारत का विश्व में 23वां स्थान
हथियारों के निर्यात का डाटाबेस रखने वाले संस्थान स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार 2017 से 2021 की अवधि में भारत विश्व का 23वां सबसे बड़ा रक्षा निर्यातक बन चुका है।
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संगठनों की मजबूती पर दे रहे जोर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रक्षा मंत्रालय हिंद महासागर के किनारे मौजूद देशों की एसोसिएशन (आईओआरए) को भी मजबूत बना रहा है। इनसे दक्षिण अफ्रीका, केन्या, तंजानिया, मॉरीशस, सेशेल्स और मैडागास्कर में नये प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।
लक्ष्य और निर्यात
-2017 से 2021 के दौरान देश से शस्त्र निर्यात में 6.6 प्रतिशत मॉरीशस, 5 प्रतिशत मोजाम्बिक और 2.3 प्रतिशत सेशेल्स का हिस्सा था।
-टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड के बनाए सैन्य वाहन अफ्रीकी देशों को निर्यात हो रहे हैं।
-समुद्र के भीतर व वायु सुरक्षा और निगरानी काम आने वाले मानव रहित उपकरण, ड्रोन, भी निर्यात हो सकते हैं।
-2025 तक भारत ने अपना रक्षा निर्यात 500 करोड़ डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
-हिंद महासागर क्षेत्र के नौ तटीय अफ्रीकी देशों के समूह (आईओएलसी) सहित कई अन्य देशों को सुरक्षित सामुद्रिक वातावरण भारत देता आया है।
-आईओएलसी देश केन्या, कोमोरोस, मैडागास्कर, मॉरिशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और सोमालिया हैं।