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India China Tension: चीन की नई करतूत, गलवां में मारे गए सैनिकों के नाम पर पुलों-गांवों के नाम रखे

Fri, 04 Nov 2022 11:06 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 04 Nov 2022 11:06 PM IST
सार

चीनी मीडिया की रिपोर्ट की मानें तो इन सैन्यकर्मियों के नाम अब तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र तक जी-219 राजमार्ग के साथ सड़क के संकेतक पर दिखाई देते हैं। 

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India China Tension China change name bridges and villages after the soldiers killed in Galwan
भारत-चीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन ने शिनजियांग और तिब्बत प्रांतों को जोड़ने वाले राजमार्ग से लगे पुलों और गांवों का नाम गलवां में मारे गए सैनिकों के नाम पर रख दिए हैं। ये नाम उन चार सैनिकों के नाम पर रखे गए हैं, जो 2020 में गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ संघर्ष में मारे गए थे।

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चीनी मीडिया की रिपोर्ट की मानें तो इन सैन्यकर्मियों के नाम अब तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र तक जी-219 राजमार्ग के साथ सड़क के संकेतक पर दिखाई देते हैं। उन सैनिकों के गृहनगर के अलावा जी-219 राजमार्ग के साथ 11 पुलों का नामकरण इन सैन्यकर्मियों के नाम पर किया गया है।
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सीपीसी में शामिल हुआ था चीनी सैन्य कमांडर
बता दें कि सैनिकों की याद में स्थानों के नामकरण के कुछ दिन पहले चीनी सैन्य कमांडर क्यूई फाबाओ सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की कांग्रेस में एक प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुआ था। फाबाओ जून 2020 में भारतीय सैनिकों के साथ गालवां घाटी में हुए संघर्ष में घायल हो गया था।
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बिग स्क्रीन पर दिखाया गया था गलवां संघर्ष
इससे पहले पीएलए के गलवां संघर्ष के वीडियो फुटेज का एक हिस्सा सीपीसी की कांग्रेस के उद्घाटन के दिन 16 अक्तूबर को ‘ग्रेट हॉल ऑफ पीपल’ में विशाल स्क्रीन पर दिखाया गया था। इस वीडियो में फाबाओ भी दिखा था। सीपीसी की कांग्रेस में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को रिकॉर्ड तीसरे कार्यकाल के लिए पार्टी का महासचिव चुना गया।


भारत की दो टूक
मामले में भारत लगातार कहता रहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अमन और चैन द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय और चीनी सेनाओं ने लंबे समय से सीमा पर जारी गतिरोध को हल करने के लिए कोर कमांडर स्तर की 16 दौर की वार्ता की है। पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद पांच मई 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध शुरू हुआ था।

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