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What US Think On India-China Ties: भारत से चीन की नजदीकी देख घबराया अमेरिका, यूएस की रिपोर्ट में हुए ये खुलासे

Wed, 24 Dec 2025 06:02 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Wed, 24 Dec 2025 06:02 PM IST
सार

अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन एलएसी पर तनाव कम होने का फायदा उठाकर भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है। ऐसे में ये भी कहा जा सकता है कि अमेरिका भारत-चीन नजदीकी से चिंतित है, इसलिए इस रिपोर्ट को अमेरिका की रणनीतिक चाल के रूप में भी देखा जा सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर अमेरिका क्यों ऐसा करना चाहता है?
 

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India-China closeness not suiting to america us report claim jinping wants ties by taking advantage on LAC
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पीएम नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। - फोटो : ANI

विस्तार

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव में आई कमी को लेकर अमेरिका ने एक रिपोर्ट जारी की है। अमेरिका के रक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इस शांति का फायदा उठाकर भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है और अमेरिका-भारत की बढ़ती नजदीकी को रोकने की कोशिश कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह रिपोर्ट सिर्फ आकलन है या इसके पीछे अमेरिका की कोई रणनीतिक चाल भी छिपी है।

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अमेरिकी रक्षा विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2024 में भारत और चीन ने एलएसी पर बचे हुए टकराव वाले इलाकों से पीछे हटने का समझौता किया था। यह समझौता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुआ, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात हुई। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन, सीधी उड़ानों, वीजा सुविधा और लोगों के आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर बातचीत तेज हुई।
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रिपोर्ट में अमेरिका का क्या कह रहा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम होने के बाद चीन इस स्थिति का लाभ उठाकर भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को स्थिर करना चाहता है और अमेरिका-भारत की बढ़ती नजदीकी को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत चीन की मंशा को लेकर सतर्क बना हुआ है और आपसी अविश्वास के कारण रिश्तों में सीमाएं बनी रहेंगी। इस रिपोर्ट से साफ लग रहा है जैसे अमेरिका जानबूझकर दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्तें नहीं चाहता।
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भारत-चीन करीब आए तो एशिया की ताकत बदलेगी
ऐसे में कहा जा सकता है कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर भारत और चीन वास्तव में करीब आ गए, तो एशिया में एक ऐसी बड़ी शक्ति उभर सकती है, जो अमेरिका के प्रभाव को चुनौती दे सके। भारत की जनसंख्या, बाजार और रणनीतिक स्थिति, और चीन की आर्थिक व सैन्य ताकत अगर ये दोनों देश साथ आ गए, तो एशिया में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।

रूस के साथ त्रिकोण बना तो अमेरिका कमजोर पड़ेगा
अमेरिका की चिंता यहीं खत्म नहीं होती। अगर भारत और चीन के साथ रूस भी किसी स्तर पर जुड़ गया, तो यह त्रिकोण न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया में अमेरिका के वर्चस्व को सीधी चुनौती दे सकता है। ऊर्जा, रक्षा और कूटनीति-तीनों मोर्चों पर यह गठजोड़ अमेरिका के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि भारत और चीन के बीच अविश्वास बना रहे और दोनों देश पूरी तरह करीब न आ पाएं।


विश्लेषण या रणनीतिक हथकंडा?
इसी संदर्भ में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह अमेरिकी रिपोर्ट केवल चीन की मंशा का निष्पक्ष विश्लेषण है या फिर एक सोची-समझी रणनीति। रिपोर्ट में बार-बार यह कहा गया है कि भारत चीन की नीयत को लेकर संशय में है और दोनों देशों के रिश्ते सीमित रहेंगे। इससे एक संदेश यह भी जाता है कि भारत को चीन से दूरी बनाए रखनी चाहिए और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

हिंद-प्रशांत में ताकत का संतुलन बनाए रखना चाहता है अमेरिका
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ताकत के जरिए शांति बनाए रखना चाहता है। अमेरिका का दावा है कि वह किसी देश को अपमानित नहीं करना चाहता, लेकिन किसी को भी क्षेत्रीय प्रभुत्व जमाने नहीं देगा। इसी नीति के तहत भारत-चीन नजदीकी पर नजर रखना और ऐसी रिपोर्ट जारी करना अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


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