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NASA: भारत के आरोह ने किया नासा के साउंडिंग रॉकेट मिशन का नेतृत्व, सूर्य ग्रहण के दौरान लॉन्च किए तीन रॉकेट
Thu, 11 Apr 2024 07:27 PM IST
मिथिलेश नौटियाल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: मिथिलेश नौटियाल
Updated Thu, 11 Apr 2024 07:27 PM IST
सार
NASA: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूर्य ग्रहण के दौरान साउंडिंग रॉकेट मिशन को लॉन्च किया था। इस अभियान का नेतृत्व भारत में जन्मे आरोह बड़जात्या ने किया है।
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नासा
- फोटो : iStock
विस्तार
भारत में जन्मे आरोह बड़जात्या ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मिशन में अहम भूमिका निभाई है। हाल ही में पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान नासा ने साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किया था। इस मिशन का नेतृत्व भारत में जन्मे शोधकर्ता आरोह बड़जात्या ने किया। आरोह के परिवार का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका जाने से पहले आरोह ने भारत के अलग अलग शहरों में अध्ययन किया था।
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नासा ने अपने बयान में बताई यह बात
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने 8 अप्रैल को उत्तरी अमेरिका में दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण के दौरान तीन साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किए, ताकि यह अध्ययन किया जा सके कि जब ग्रह के एक हिस्से पर सूरज की रोशनी क्षण भर के लिए कम हो जाती है तो पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल कैसे प्रभावित होता है। नासा ने एक बयान में कहा है कि इस मिशन का प्रोफेसर आरोह बड़जात्या ने किया, जो कि फ्लोरिडा में एम्ब्री-रिडल एयरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग भौतिकी के प्रोफेसर हैं। इस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर आरोह अंतरिक्ष और वायुमंडलीय इंस्ट्रुमेंटेशन लैब का निर्देशन करते हैं।
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प्रोफेसर आरोह ने सोशल मीडिया पर लिखा- धन्यवाद
प्रोफेसर आरोह ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में अपने सभी साथी शोधकर्ताओं और एम्ब्री-रिडल एयरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों को धन्यवाद कहा है। उन्होंने आगे लिखा है ’छह महीने में छह जटिल रॉकेट मिशन।’
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कैमिकल इंजीनियर हैं आरोह के पिता
आरोह बड़जात्या के पिता अशोक कुमार बड़जात्या पेशे से कैमिकल इंजीनियर हैं और उनकी मां राजेश्वरी एक कुशल गृहणी हैं। आरोह ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई, हैदराबाद, जयपुर, पिलानी, सोलापुर के पास पातालगंगा में की । इसके बाद वालचंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सोलापुर से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उनकी बहन अपूर्वा बड़जात्या भी मैकेनिकल इंजीनियर हैं। अपूर्वा ने कहा कि आरोह 2001 में अमेरिका चले गए और वहां उन्होंने यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री पूरी की। इसके बाद आरोह ने उसी विश्वविद्यालय से अंतरिक्ष यान उपकरणीकरण में पीएचडी पूरी की।