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UNICEF: पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में निर्धनता से पीड़ित बच्चों की संख्या में वृद्धि

Thu, 20 Oct 2022 06:03 PM IST
शैलजा श्रीवास्तव यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: शैलजा श्रीवास्तव Updated Thu, 20 Oct 2022 06:03 PM IST
सार

अन्तरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस पर सोमवार को प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के एक अध्ययन के अनुसार, बढ़ती मुद्रास्फीति और यूक्रेन युद्ध के कारण पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में बाल निर्धनता में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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Increase in poverty stricken children in Eastern Europe and Central Asia says new study by unicef
यूक्रेन में हिंसा के कारण भागने के लिए मजबूर, एक मां अपने बच्चे के साथ शरणार्थी केन्द्र में - फोटो : UNICEF

विस्तार

The impact of the war in Ukraine and subsequent economic downturn on child poverty in eastern Europe and Central Asia शीर्षक की इस रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों और शिशुओं की मृत्यु दर में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है। पूरे क्षेत्र के 22 देशों से जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि रूस के यूक्रेन पर 24 फरवरी के आक्रमण से उपजे आर्थिक संकट का सबसे बड़ा खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं। हालांकि वे आबादी का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही हैं, लेकिन इस वर्ष गरीबी झेल रहे 1 करोड़ 4 लाख अतिरिक्त लोगों का लगभग 40 प्रतिशत भाग हैं।
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यूनीसेफ की यूरोप और मध्य एशिया की क्षेत्रीय निदेशक अफशान खान ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र के बच्चे, इस भयानक युद्ध की चपेट में आ गए हैं।

युद्ध में निहित

रूस-यूक्रेन युद्ध से पूरे क्षेत्र में जीवन यापन में मुश्किलों के बढ़ने से बाल निर्धनता बढ़ी है जिसका लगभग तीन-चौथाई हिस्सा रूस में है– जहां अतिरिक्त 28 लाख बच्चे, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों में रहते हैं। अध्ययन में कहा गया है कि यूक्रेन में 5 लाख अतिरिक्त बच्चे गरीबी झेलने को मजबूर हैं, जोकि बाल निर्धनता का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके बाद रोमानिया है, जहां गरीब बच्चों की संख्या में 1 लाख 10 हजार की वृद्धि हुई है।
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अफशान खान ने कहा कि युद्ध की भयावहता के अलावा- बच्चों की हत्या और उन्हें अपंग करने की घटनाएं, सामूहिक विस्थापन- यूक्रेन में युद्ध के आर्थिक परिणाम भी, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के बच्चों पर विनाशकारी प्रभाव डाल रहे हैं।
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वित्तीय संकट से परे

बाल निर्धनता के परिणाम केवल वित्तीय संकट तक ही सीमित नहीं हैं। अध्ययन में कहा गया है कि बाल निर्धनता में तेज वृद्धि के परिणामस्वरूप अतिरिक्त 4,500 बच्चों की अपने पहले जन्मदिन से पूर्व मृत्यु होने की संभावना है और इस वर्ष अतिरिक्त 1 लाख 17 हजार बच्चे स्कूलों से वंचित हो सकते हैं। अफशान खान ने चेताया है कि अगर हम अभी इन बच्चों और परिवारों की मदद नहीं करते हैं, तो बाल निर्धनता में तेज वृद्धि जान-माल के लिए हानिकारक होगी। इससे शिक्षा और भविष्य पर भी खतरा मंडराने लगेगा। 

निर्धनता का चक्र

एक परिवार जितना निर्धन होगा, भोजन, ईंधन और अन्य आवश्यकताओं पर खर्च होने वाली आय का अनुपात भी उतना ही अधिक होगा। अध्ययन में कहा गया है कि जब बुनियादी वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है, तो स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध धन में कमी आती है। इसके परिणामस्वरूप उपजे जीवन-यापन संकट का मतलब है कि सबसे निर्धन बच्चों तक आवश्यक सेवाओं के पहुंचने की संभावना कम होगी, और उनके हिंसा, शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार होने का खतरा अधिक होगा। कई लोगों के लिए बचपन में झेली गई गरीबी का असर जीवनभर रहता है, जिससे कठिनाई और अभाव का पीढ़ी दर पीढ़ी एक चक्र कायम हो जाता है।

जब सरकारें सार्वजनिक व्यय में कटौती करती हैं, कर बढ़ाती हैं, या अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए कठिन उपायों का सहारा लेती हैं, तो वे उन पर निर्भर होकर जीवनयापन करने वालों के लिए समर्थन सेवाएं कम कर देती हैं। अफशान खान ने कहा कि सख्त उपायों से बच्चों को सबसे ज्यादा हानि होगी – जिससे अधिक बच्चे गरीबी की गर्त में ढकेले जाएंगे और उन परिवारों के लिए कठिनाई बढ़ जाएंगी, जो पहले से ही संघर्षमय जीवन जी रहे हैं।

राहत योजना

इस अध्ययन में, वित्तीय संकट में फंसे लोगों की मदद करने के लिए सिफारिशें भी दी गई हैं, जैसे कि बच्चों के लिए सार्वभौमिक नकदी लाभ प्रदान करना; जरूरतमंद बच्चों के परिवारों के लिए सामाजिक सहायता का विस्तार करना; और सामाजिक खर्च पर ध्यान देना। इसमें, गर्भवती माताओं, शिशुओं और छोटे बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक देखभाल सेवाओं की मदद देने के साथ-साथ परिवारों के लिए बुनियादी खाद्य पदार्थों पर मूल्य नियम स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है।

इस बीच, बच्चों पर गरीबी के प्रभाव को कम करने के लिए EU Child Guarantee पहल के संचालन हेतु यूनीसेफ ने यूरोपीय संघ आयोग और कई यूरोपीय संघ के देशों के साथ भागीदारी की है।


सख्त प्रतिक्रिया की जरूरत

इस पूरे क्षेत्र में गरीबी झेल रहे अधिकाधिक बच्चों और परिवारों को लेकर एक मजबूत कार्रवाई की आवश्यकता है। यूनीसेफ, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में उच्च एवं मध्यम आय वाले देशों में सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए विस्तारित समर्थन और कमजोर बच्चों और परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के वित्तपोषण का आह्वान कर रहा है। यूनीसेफ की क्षेत्रीय निदेशक ने जोर देते हुए कहा कि स्थिति बदतर हो, उससे पहले हमें कमजोर परिवारों के लिए अपना समर्थन देना होगा।


(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
 
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