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जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी पार्टी की हार से राहत, लेकिन सीडीयू की चुनौतियां बरकरार
Mon, 07 Jun 2021 06:16 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बॉन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बॉन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 07 Jun 2021 06:16 PM IST
सार
एएफडी इस बार 20.8 फीसदी वोट हासिल कर प्रांतीय विधायिका में मुख्य विपक्षी दल बनी है। विश्लेषकों ने कहा है कि अगर एएफडी के नजरिए से देखें तो उसकी ये कामयाबी छोटी नहीं है। एएफडी को जर्मनी की मुख्यधारा राजनीति में उग्रवादी और पराया माना जाता है...
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जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
जर्मनी के पॉलिटिकल एस्टैबलिशमेंट ने राहत की सांस ली है। पूर्वी राज्य सैक्सॉनी-अनहाल्ट में तमाम मतदान पूर्व चुनाव सर्वेक्षणों के नतीजों को झुठलाते हुए सत्ताधारी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) ने बड़ी जीत दर्ज की। इसके बावजूद वहां धुर दक्षिणपंथी ऑल्टरनेटिव फॉर ड्यूशलैंड (एएफडी) ने कमोबेस अपना समर्थन आधार बरकरार रखा। 2016 के प्रांतीय चुनाव के मुकाबले उसके वोटों में कुछ गिरावट आई है। फिर भी राष्ट्रीय स्तर के जनमत सर्वेक्षणों उसके लिए बताए जा रहे समर्थन से यह दो गुना ज्यादा रहा। इस रूप में सैक्सॉनी-अऩहाल्ट राज्य एक बार फिर उसका प्रमुख गढ़ साबित हुआ है।
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एएफडी इस बार 20.8 फीसदी वोट हासिल कर प्रांतीय विधायिका में मुख्य विपक्षी दल बनी है। विश्लेषकों ने कहा है कि अगर एएफडी के नजरिए से देखें तो उसकी ये कामयाबी छोटी नहीं है। एएफडी को जर्मनी की मुख्यधारा राजनीति में उग्रवादी और पराया माना जाता है। उसके खिलाफ चरमपंथ के आरोप में जांच चल रही है। फिर भी उसके समर्थन आधार में ज्यादा सेंध नहीं लगी।
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दूसरी तरफ कभी जर्मनी की राजनीति में ताकतवर रहीं वामपंथी पार्टियां संघर्ष करती नजर आईं। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) का वोट शेयर घट कर सिर्फ 8.4 फीसदी रह गया। जर्मनी के बाकी हिस्सों में हाल में ग्रीन पार्टी का तेजी का उदय हुआ है। वहां वह बहुत से वामपंथी और मध्यमार्गी मतदाताओं की पसंद बन गई है। लेकिन सैक्सॉनी-एनहाल्ट में वह सिर्फ 5.9 फीसदी वोट पा सकी, जो पांच साल पहले की तुलना में महज 0.7 फीसदी ज्यादा है। वामपंथी डाइ लिन्के पार्टी ने 2016 में इस राज्य में 16 फीसदी वोट हासिल किए थे। लेकिन इस बार उसके वोटों का फीसदी सिर्फ 11 रह गया। उदारवादी फ्री डेमोक्रेट्स पार्टी (एफडीपी) को भी महज 6.4 फीसदी वोट हासिल हो सके।
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विश्लेषकों ने कहा है कि एएफडी की जीत की आशंका को लेकर मतदाताओं को आगाह करने की जो रणनीति सीडूयू ने अपनाई, वह कामयाब रही। उससे बहुत से ऐसे मतदाताओं ने एएफडी को रोकने के लिए उसे वोट देने का फैसला किया, जो आम हालत में किसी और मध्यमार्गी या वामपंथी पार्टी को वोट देते। नतीजा हुआ कि सीडीयू को 37.1 फीसदी वोट हासिल हो गए। लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक ये जीत इस बात का संकेत नहीं है कि सितंबर में होने वाले राष्ट्रीय आम चुनाव में सीडीयू की संभावनाएं अब बेहतर हो गई हैं।
राष्ट्रीय जनमत सर्वेक्षणों में भी सीडीयू को ग्रीन पार्टी के तगड़ी चुनौती मिलती दिख रही है। इस बार सीडीयू के नेतृत्व वाला गठबंधन चांसलर अंगेला मैर्केल के उत्तराधिकारी अर्मिन लैशेट की अगुआई में मैदान में उतरेगा। सर्वेक्षणों के मुताबिक लैशेट के प्रति मतदाताओं में ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा है। सैक्सॉनी-एनहाल्ट एक छोटा राज्य है, जहां 20 लाख से भी कम मतदाता हैं। इस राज्य के चुनाव ने इस बार इसलिए दुनिया का ध्यान खींचा, क्योंकि वहां आव्रजक विरोधी धुर दक्षिणपंथी एएफडी के जीतने के संकेत मिल रहे थे। मतदान के एक दिन पहले जारी हुए सर्वे नतीजों में एएफडी को सीडीयू के बराबर समर्थन मिलता दिखाया गया था।
विश्लेषकों का कहना है कि इस राज्य में सीडीयू की जीत तय करने में वहां के प्रधानमंत्री रेइनर हेसलॉफ की लोकप्रियता की भी बड़ी भूमिका रही। हेसलॉफ 2011 से लगातार प्रधानमंत्री हैं। विश्लेषकों के मुताबिक इस जीत से सीडीयू को राहत जरूर मिली है, लेकिन 26 सितंबर को होने वाले चुनाव की संभावनाओं पर इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।