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तुर्किये में बदलेगी सत्ता?: सबसे मुश्किल दौर में राष्ट्रपति एर्दोगन, सर्वे में विपक्ष के 'गांधी' से पीछे,जानें
Mon, 03 Apr 2023 11:50 AM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 03 Apr 2023 11:50 AM IST
सार
ओपिनियन पोल के नतीजे बताते हैं कि एर्दोगन अपने प्रतिद्वंदी कमाल किलिकडारोग्लू से दस अंकों से पीछे चल रहे हैं। पोल सर्वे के अनुसार, एर्दोगन की एकेपी पार्टी और राष्ट्रपति सहयोगी एमएचपी को संसदीय चुनावों में 45 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, कमाल इससे दस प्रतिशत अधिक अंक से आगे हैं।
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Recep Tayyip Erdogan
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
तुर्कीये में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर उठापठत तेज हो गई है। 20 साल के अपने शासन में इस बार राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन को सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एर्दोगन के खिलाफ संयुक्त रूप से छह विपक्षी दलों ने कमाल किलिकदरोग्लु (Kemal Kilicdaroglu) को अपना प्रत्याशी बनाया है। कमाल किलिकडारोग्लू 'तुर्किये के गांधी' कहे जाते हैं। कमाल तुर्किये में लोगों के हक, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र की लड़ाई लड़ते हैं। तुर्किये की मीडिया भी उन्हें कमाल गांधी कहती है। वह महात्मा गांधी की तरह की चश्मा भी पहनते हैं।
ओपिनियन पोल के नतीजे बताते हैं कि एर्दोगन अपने प्रतिद्वंदी कमाल किलिकडारोग्लू से दस अंकों से पीछे चल रहे हैं। पोल सर्वे के अनुसार, एर्दोगन की एकेपी पार्टी और राष्ट्रपति सहयोगी एमएचपी को संसदीय चुनावों में 45 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, कमाल इससे दस प्रतिशत अधिक अंक से आगे हैं।
खराब नीतियों के चलते सबसे बुरे दौर में तुर्कीये
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एर्दोगन की खराब आर्थिक नीतियों के चलते देश की स्थिति काफी बदहाल हो चुकी है। महंगाई तेजी से बढ़ रही है। मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर हो गई है और तुर्कीये की करेंसी लीरा लगातार कमजोर हो रही है। महंगाई दर 57% के करीब है। कॉस्ट ऑफ लिविंग के बढ़ने से जनता परेशान है।
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घर का किराया 19,700 से 131,000 रुपए पहुंचा
तुर्किये में आलम ये है कि घर का किराया भी बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक महिला ने कहा, 'पिछले साल मैं 4,500 लीरा (करीब 19,700 रुपए) रेंट दे रही थी, लेकिन मेरे मकान मालिक ने कहा कि उसे कीमत बढ़ानी होगी। हमने पेमेंट को दोगुना कर दिया, लेकिन फिर भी हमें फ्लैट छोड़ना पड़ा।' तुर्किये में अब रेंट पर मकान तकरीबन 30,000 लीरा (करीब 131,000 रुपए) में मिल रहा है।
एक अन्य नागरिक ने कहा, 'हम अचानक गरीब हो गए हैं। स्ट्रीट पर महंगाई 600% महसूस हो रही है, लेकिन पेंशन में बढ़ोतरी केवल 30% है।' इस्तांबुल में, एक रेस्तरां मैनेजर, एर्सिन फुआट उलकु ने कहा, 'अब केवल बहुत अमीर या बहुत गरीब हैं। कोई मिडिल क्लास नहीं है। सरकारी सहायता के बाद भी महंगाई का सामना करना मुश्किल है। यहां भविष्य अंधकार में है।'
एर्दोगन के खिलाफ ये भी लड़ रहे चुनाव
तुर्की के राष्ट्रपति पद के लिए एर्दोगन के खिलाफ कई अन्य प्रत्याशी भी मैदान में हैं। यही कारण है कि एर्दोगन की उम्मीदवारी अन्य के मुकाबले थोड़ी मजबूत हो जाती है। उम्मीदवारों की अंतिम सूची के अनुसार, एर्दोगन को चुनौती देने वाले किलिकडारोग्लू के अलावा मुहर्रम इन्स, जो 2021 में रिपब्लिकन पार्टी (सीएचपी) से अलग हो गए और सिनान ऑर्गन, जो एमएचपी के पूर्व सदस्य हैं, लेकिन अब पांच छोटे राष्ट्रवादी दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
गौरतलब है कि 2018 के पिछले चुनाव में इन्स सीएचपी के उम्मीदवार थे क्योंकि उस समय पार्टी ने सोचा था कि उनके पास एर्दोगन को हराने के लिए हल्के-फुल्के किलिकडारोग्लू से बेहतर मौका है। उन चुनावों में इंस को 30.6 फीसदी वोट मिले थे।
उनकी उम्मीदवारी से किलिकडारोग्लू को नुकसान होने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें हजारों वोट मिल सकते हैं जो अन्यथा किलिकडारोग्लू को चले जाते और "तुर्की के गांधी" के लिए 50 प्रतिशत वोट हासिल करना आसान हो जाता, जो एक उम्मीदवार के लिए आवश्यक प्रतिशत है पहले दौर से अध्यक्ष चुना जाना है।
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ओपिनियन पोल के नतीजे बताते हैं कि एर्दोगन अपने प्रतिद्वंदी कमाल किलिकडारोग्लू से दस अंकों से पीछे चल रहे हैं। पोल सर्वे के अनुसार, एर्दोगन की एकेपी पार्टी और राष्ट्रपति सहयोगी एमएचपी को संसदीय चुनावों में 45 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, कमाल इससे दस प्रतिशत अधिक अंक से आगे हैं।
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खराब नीतियों के चलते सबसे बुरे दौर में तुर्कीये
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एर्दोगन की खराब आर्थिक नीतियों के चलते देश की स्थिति काफी बदहाल हो चुकी है। महंगाई तेजी से बढ़ रही है। मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर हो गई है और तुर्कीये की करेंसी लीरा लगातार कमजोर हो रही है। महंगाई दर 57% के करीब है। कॉस्ट ऑफ लिविंग के बढ़ने से जनता परेशान है।
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घर का किराया 19,700 से 131,000 रुपए पहुंचा
तुर्किये में आलम ये है कि घर का किराया भी बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक महिला ने कहा, 'पिछले साल मैं 4,500 लीरा (करीब 19,700 रुपए) रेंट दे रही थी, लेकिन मेरे मकान मालिक ने कहा कि उसे कीमत बढ़ानी होगी। हमने पेमेंट को दोगुना कर दिया, लेकिन फिर भी हमें फ्लैट छोड़ना पड़ा।' तुर्किये में अब रेंट पर मकान तकरीबन 30,000 लीरा (करीब 131,000 रुपए) में मिल रहा है।
एक अन्य नागरिक ने कहा, 'हम अचानक गरीब हो गए हैं। स्ट्रीट पर महंगाई 600% महसूस हो रही है, लेकिन पेंशन में बढ़ोतरी केवल 30% है।' इस्तांबुल में, एक रेस्तरां मैनेजर, एर्सिन फुआट उलकु ने कहा, 'अब केवल बहुत अमीर या बहुत गरीब हैं। कोई मिडिल क्लास नहीं है। सरकारी सहायता के बाद भी महंगाई का सामना करना मुश्किल है। यहां भविष्य अंधकार में है।'
एर्दोगन के खिलाफ ये भी लड़ रहे चुनाव
तुर्की के राष्ट्रपति पद के लिए एर्दोगन के खिलाफ कई अन्य प्रत्याशी भी मैदान में हैं। यही कारण है कि एर्दोगन की उम्मीदवारी अन्य के मुकाबले थोड़ी मजबूत हो जाती है। उम्मीदवारों की अंतिम सूची के अनुसार, एर्दोगन को चुनौती देने वाले किलिकडारोग्लू के अलावा मुहर्रम इन्स, जो 2021 में रिपब्लिकन पार्टी (सीएचपी) से अलग हो गए और सिनान ऑर्गन, जो एमएचपी के पूर्व सदस्य हैं, लेकिन अब पांच छोटे राष्ट्रवादी दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
गौरतलब है कि 2018 के पिछले चुनाव में इन्स सीएचपी के उम्मीदवार थे क्योंकि उस समय पार्टी ने सोचा था कि उनके पास एर्दोगन को हराने के लिए हल्के-फुल्के किलिकडारोग्लू से बेहतर मौका है। उन चुनावों में इंस को 30.6 फीसदी वोट मिले थे।
उनकी उम्मीदवारी से किलिकडारोग्लू को नुकसान होने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें हजारों वोट मिल सकते हैं जो अन्यथा किलिकडारोग्लू को चले जाते और "तुर्की के गांधी" के लिए 50 प्रतिशत वोट हासिल करना आसान हो जाता, जो एक उम्मीदवार के लिए आवश्यक प्रतिशत है पहले दौर से अध्यक्ष चुना जाना है।