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पाकिस्तान पंजाब विधानसभा में सिख विवाह बिल पारित हुआ

Thu, 15 Mar 2018 02:11 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 15 Mar 2018 02:11 PM IST
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in first time of history, under andand marriage act pakistan allow sikh weddings

पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से पंजाब सिख आनंद विवाह अधिनियम 2017 पारित कर इतिहास रच दिया। यह विधेयक मुस्लिम बहुसंख्यक देश में सिख विवाहों को कानूनी दर्जा प्रदान करेगा। सिख विवाहों को आधिकारिक मान्यता नहीं मिलने से इंसाफ के दरवाजे उनके लिए बंद थे। अब शादियों व समुदाय से जुड़े अन्य मामलों का निपटारा करना आसान हो जाएगा। 

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पंजाब विधानसभा के अल्पसंख्यक सदस्य सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने यह बिल पेश किया। राज्यपाल की मंजूरी के तुरंत बाद बिल लागू हो जाएगा। अरोड़ा ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है, जो इस विधेयक के कानून के बाद सिख विवाहों को पंजीकृत करेगा। अब तक सिख विवाह के आंकड़ों को गुरूद्वारों द्वारा ही संभाला जाता रहा है।
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अरोड़ा ने यह भी कहा था कि यह दिन सिख सामुदाय के लिए ऐतिहास है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहली बार होगा जब पाकिस्तान में अलग से सिखों के पारिवारिक कानूनों को नियमित किया जाएगा। इस बात का श्रय उन्होंने पूरी तरह से पंजाब सरकार को दिया। 
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कानून के मुताबिक अब पाकिस्तान में सिख विवाह को धर्मग्रंथ गुरूग्रंथ साहिब में वर्णित रीतियों के अनुरूप ही पूरा किया जाएगा। जिसके बाद पंजाब प्रांत के द्वारा नियुक्त किया गया रजिस्ट्रार वैधता पत्र जारी करेगा। इसके तहत पाकिस्तान में रहने वाले सिख अपनी शादी का पंजीकरण करवा पाएंगे। पारित विधेयक ब्रिटिश शासन के दौरान पारित किए गए आनंद विवाह विधेयक 1909 का ही संशोधित रूप है। यानि अब हर सिख विवाह को कानूनी हैसियत मिलेगी। 

आपको बता दें कि यह बिल हिंदू विवाह पंजीकरण के नियमों पर आधारित है। जिसमें शादी करने वाले जोड़े की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। बिल में यह भी वर्णित है कि यदि पति-पत्नी एक साल से एक दूसरे से अलग रह रहे हैं और आगे साथ नहीं रहना चाहते तो वह अपनी मर्जी से शादी रद्द भी करवा सकते हैं। 


बिल में विधवा महिला को पति की मृत्यु के 6 महीने बाद दूसरी शादी करने का अधिकार भी दिया गया है। बिल में यह भी प्रावधान है कि कोई पुरूष पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकता यदि वह ऐसा करता है तो यह दंडनीय अपराध माना जाएगा। साथ ही विधेयक में हिंदू विवाह पंजीकरण के नियमों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की सजा भी दी जाएगी। 

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