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लॉकडाउन के साइड-इफेक्ट्स: कोरोना महामारी ने खड़ी की कई दिमागी और सामाजिक दिक्कतें

Sat, 26 Jun 2021 02:24 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 26 Jun 2021 02:24 PM IST
सार

ब्रिटेन में जारी हुई एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि इंग्लैंड में जब लॉकडाउन के दौरान लोगों को घर में रहने पर मजबूर होना पड़ा, तो कई छोटी उम्र के बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार हुए। कुछ मामलों में स्थिति गंभीर हो जाने पर बच्चों को डिप्रेशन की दवा देनी पड़ी...

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In Australian state of Victoria, ten percent of people seriously considered committing suicide during the lockdown
मेलबर्न - फोटो : Agency

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान दस फीसदी लोगों ने कभी न कभी आत्महत्या करने पर गंभीरता से विचार किया। एक नए अध्ययन से ये बात सामने आई है। इससे इस बात पर रोशनी पड़ी है कि कोरोना महामारी का गंभीर असर सिर्फ शारीरिक सेहत पर ही नहीं, बल्कि लोगों के मनोविज्ञान पर भी हुआ है।

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जर्नल ऑफ साइकियाट्रिक रिसर्च (मनोचिकित्सा अनुसंधान की पत्रिका) के ताजा अंक में इस अध्ययन की रिपोर्ट छपी है। इसके मुताबिक जब पिछले साल विक्टोरिया राज्य में लॉकडाउन लगा, तो उसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग डिप्रेशन का शिकार हुए। लगभग दस फीसदी लोगों के मन में कभी ना कभी आत्महत्या कर लेने की बात आई। एक तिहाई लोगों ने कहा कि वे इस दौरान चिंता (एंजाइटी) या डिप्रेशन से जुड़ी समस्याओं के शिकार हुए। 20 फीसदी लोग इस दौरान अनिद्रा का शिकार हो गए।
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इस अध्ययन से एक चिंताजनक पहलू ये सामने आया है कि विक्टोरिया के 12.3 फीसदी लोगों ने महामारी के मनोवैज्ञानिक प्रभाव से उबरने की कोशिश में नशीले पदार्थों का सेवन शुरू कर दिया। ऐसे लोग अब एक सामाजिक समस्या का हिस्सा बन गए हैं।
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इस अध्ययन रिपोर्ट के लेखक मार्क जीसलर ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन से कहा कि कोरोना महामारी ने बड़े पैमाने पर मानसिक और व्यवहार संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा की हैं। उन्होंने कहा- ‘जो लोग मानसिक समस्या से पीड़ित हुए हैं, उनके लिए यह जानना महत्त्वपूर्ण है कि ऐसा सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ है।’ गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया में सबसे सख्त लॉकडाउन विक्टोरिया राज्य में ही लागू किया गया था।

ऑस्ट्रेलिया के अंदर कोरोना वायरस के संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले वहीं सामने आए थे। ऑस्ट्रेलिया में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 30 हजार मामले सामने आए थे। उनमें 20 हजार सिर्फ विक्टोरिया राज्य में थे। इसे देखते हुए विक्टोरिया में सख्त लॉकडाउन लगा दिया गया। उस दौरान प्रतिबंधों को बेहद सख्ती से लागू करने के लिए विक्टोरिया की पुलिस की काफी आलोचना हुई थी। उस दौरान घर से बाहर निकले लोगों के साथ क्रूरता से पेश आते हुए पुलिस कर्मियों के कई वीडियो वायरल हुए थे। इसकी प्रतिक्रिया में विक्टोरिया में लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शन भी आयोजित किए गए थे।

अब विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन की संक्रमण रोकने में चाहे जितनी भूमिका हो, लेकिन अगर उस दौरान ज्यादा सख्ती बरती जाती है, तो उसके दूसरे दुष्परिणाम सामने आते हैं। विक्टोरिया में जारी हुई नई अध्ययन रिपोर्ट के निष्कर्षों को ऐसे ही दुष्परिणामों का संकेत माना गया है।


इस बीच इसी हफ्ते ब्रिटेन में जारी हुई एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि इंग्लैंड में जब लॉकडाउन के दौरान लोगों को घर में रहने पर मजबूर होना पड़ा, तो कई छोटी उम्र के बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार हुए। कुछ मामलों में स्थिति गंभीर हो जाने पर बच्चों को डिप्रेशन की दवा देनी पड़ी। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि स्कूल बंद हो जाने और दोस्तों और पास-पड़ोस से मेल-जोल मना हो जाने का बच्चों के मनोविज्ञान पर गंभीर असर देखने को मिला है। ये अध्ययन रिपोर्ट फार्मास्यूटिकल जर्नल के मानसिक स्वास्थ्य खंड में प्रकाशित हुई है।

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