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संकट में इमरान: आतंकवाद पर नहीं डाल सके नकेल, एफएटीएफ की ग्रे सूची से पाक का बाहर निकलना मुश्किल

Tue, 19 Oct 2021 07:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 19 Oct 2021 07:38 PM IST
सार

एफएटीएफ की अगली मीटिंग अगले साल अप्रैल में होने वाली है। यानी पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर इआने के लिए 6 महीने और इंतजार करना पड़ेगा।

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Imran in trouble: Could not crack down on terror, difficult to get out of FATF gray list
इमरान खान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। बदहाल अर्थव्यवस्था, अफगान संकट के साथ घरेलू परेशानियों से घिरे पीएम इमरान खान को इस बार भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान को शर्तें पूरी नहीं करने के कारण अगले साल अप्रैल तक एफएटीएफ की ग्रे सूची में रखा जाएगा।

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एफएटीएफ की अगली मीटिंग अगले साल अप्रैल में होने वाली है। यानी पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर इआने के लिए 6 महीने और इंतजार करना पड़ेगा। फ्रांस की राजधानी पेरिस में एफएटीएफ की बैठक जारी है। गुरुवार को इस पर विचार होगा कि पाकिस्तान को ग्रे सूची में ही रखा जाए या बाहर निकाला जाए। अगला फैसला अप्रैल 2022 में किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने इस अंतरराष्ट्रीय संगठन की शर्तें अब भी पूरी नहीं की हैं।
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ग्रे में बने रहना भी इमरान के लिए उपलब्धि क्योंकि...
चौतरफा मुश्किलों में घिरी इमरान सरकार के लिए राहत की बात सिर्फ यह है कि उसे अभी ब्लैक लिस्ट नहीं किया जा रहा है, बल्कि वह ग्रे सूची में कायम है। संगठन चाहता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे, लेकिन तमाम आतंकी संगठन बदले हुए नामों से देश में अब भी सक्रिय हैं। उन पर इमरान सरकार काबू नहीं कर पा रही है।
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2018 से है ग्रे सूची में
पड़ोसी देश जून 2018 से ग्रे सूची में है। वह एफएटीएफ की अब तक 26 शर्तें पूरी कर चुका है, लेकिन बची दो शर्तों पर वह अमल नहीं कर पा रहा है। ये शर्तें हैं- आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे और दूसरा कार्रर्वा के सबूत भी पेश करे। इनमें हाफिज सईद और मसूद अजहर पर कार्रवाई शामिल है। इसके पहले जून में संगठन की बैठक हुई थी और तब पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखने का फैसला किया गया था।
ग्रे सूची में रहने से यह हो रहा है नुकसान
लगातार ग्रे सूची में रहने के कारण पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और यूरोपियन यूनियन से कर्ज या मदद नहीं ले पा रहा है। इमरान सरकार चीन, तुर्की और मलेशिया की मदद से इस सूची से बाहर आने के प्रयास कर रही है, लेकिन भारत, अमेरिका और फ्रांस उसे कामयाब नहीं होने दे रहे।

क्या है ग्रे सूची
आतंकी संगठनों की वित्तीय मदद करने और हवाला व अन्य चैनलों के माध्यम से उन तक पैसा पहुंचाने वाले देशों को इसमें रखा जाता है। उन्हें ये अवैध गतिविधियां बंद करने और आतंकियों पर ठोस कार्रवाई करने के लिए चेतावनी देते हुए कुछ वक्त दिया जाता है। जब तक वे ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें ग्रे सूची में रखा जाता है। वहीं यदि कोई देश चेतावनी के बाद भी आतंकियों व उनके संगठनों की मदद नहीं रोकता है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाता है।

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