धूम्रपान की पुरानी आदत छोड़ दें तो फेफड़े की जादुई ताकत बचा सकती है कैंसर से
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वर्षों से धूम्रपान कर रहे लोग भी इस आदत को छोड़ दें तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बच सकते हैं। इसका कारण है इंसानी फेफड़ों की जादुई शक्ति जो धूम्रपान से खराब हुई कोशिकाओं को बदल देता है। यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन और वेलकम सेंगर इंस्टीट्यूट ने एक शोध के जरिये यह जानकारी दी है।
स्वस्थ हो जाती हैं खराब कोशिकाएं
शोधकर्ताओं ने बताया है कि धूम्रपान की आदत छोड़ने के बाद फेफड़ा खराब कोशिकाओं को बदल देता है। खास बात यह है कि नई कोशिकाएं पूरी तरह स्वस्थ होती हैं। उन्होंने आगे बताया कि लंबे समय तक धूम्रपान करने से कोशिकाओं के गुणों में बदलाव आ जाता है।
उनमें अक्सर कैंसर के लक्षण दिखने लगते हैं, लेकिन ये आदत छोड़ दें तो समय के साथ खराब हुई कोशिकाएं स्वस्थ कोशिकाओं में तब्दील हो जाती हैं। शोध के प्रमुख लेखक डॉ पीटर कैंपबेल ने बताया कि धूम्रपान की आदत कितनी भी पुरानी क्यों न हो, इसे छोड़ देने में ही भलाई है। फेफड़ों में कोशिकाओं का एक समूह खराब हो चुकी कोशिकाओं को स्वस्थ कोशिकाओं में बदल देता है। ऐसा फेफड़ों की जादुई ताकत के चलते होता है।
सालों पुरानी आदत छोड़ने से भी फायदा
नेचर पत्रिका में प्रकाशित शोध में शोधकर्ताओं ने 16 लोगों को शामिल किया। इनमें लंबे समय से धूम्रपान कर रहे, धूम्रपान छोड़ चुके, कभी धूम्रपान नहीं करने वाले और कुछ बच्चे शामिल थे। इनके फेफड़ों की बायोप्सी की गई और फिर उसका विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं को धूम्रपान करने वालों की कोशिकाओं में करीब दस हजार अतिरिक्त आनुवांशिक बदलाव देखने को मिले। ये तंबाकू और उसके रसायनों से पैदा हुए। खराब हुई एक-चौथाई कोशिकाओं में कम से कम एक ऐसा बदलाव नजर आया जो कैंसर की ओर इशारा कर रहा था। वहीं, धूम्रपान छोड़ चुके लोगों में ऐसी कोशिकाओं की संख्या कम थी। उनकी कोशिकाओं काफी हद तक कभी धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों के जैसी थीं। यानी समय के साथ उनकी खराब कोशिकाएं स्वस्थ हो रही थीं।फैक्ट फाइल
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर से होने वाली 22 फीसदी मौतों का कारण तंबाकू का सेवन है।
- भारत में हर एक लाख में 5.6 लोगों को फेफड़े का कैंसर होता है।
- ब्रिटेन में हर साल करीब 47 हजार लोगों को फेफड़े का कैंसर होता है। इनमें से 72 फीसदी का कारण धूम्रपान है।