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नाराज हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता: रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ जोर-जबर्दस्ती कर रहा है बांग्लादेश?

Sat, 27 Nov 2021 05:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 27 Nov 2021 05:50 PM IST
सार

शरणार्थियों ने शिकायत की है कि द्वीप पर भेजे जाने के बाद उन्हें मुख्य भूमि पर मनचाहे ढंग से आने-जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि अगर आने-जाने की आजादी से शरणार्थियों को वंचित किया गया, तो भाशान चार द्वीप पर उन्हें बसाने की पूरी परियोजना पर सवाल उठ खड़े होंगे...

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Human rights activists have strongly criticized the strictness being taken on Rohingya refugees in Bangladesh
बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों को नई जगह पर भेजने के काम में गंभीर दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस सिलसिले में बांग्लादेश के अधिकारियों की तरफ से बरती जा रही सख्ती की कड़ी आलोचना की है। रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में सैनिक दमन से बचने के लिए वहां से भाग कर बांग्लादेश आए थे। लेकिन यहां उन्हें अब तक स्थायी आवास मुहैया नहीं कराया जा सका है। अब बांग्लादेश के अधिकारी उन्हें दूसरी जगह पर ले जाकर बसाने की कोशिश में जुटे हैं।

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11 शरणार्थियों की डूबने से मौत

अब 19 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को भाशान चार नाम के द्वीप पर भेजा गया है। लेकिन इस क्रम में शरणार्थियों से सख्ती बरती गई। बताया जाता है कि ज्यादातर शरणार्थी इस द्वीप पर जाने के इच्छुक नहीं हैं। द्वीप पर भेजे गए बहुत से शरणार्थियों ने वहां से भागने की कोशिश की है। इस आरोप में सैकड़ों शरणार्थियों को गिरफ्तार किया गया है। एक खबर के मुताबिक बीते अगस्त में एक नौका के जरिए इस द्वीप से भागने की कोशिश कर रहे 11 शरणार्थियों की डूबने के कारण मौत हो गई थी।

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इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस के एशिया- पैसिफिक क्षेत्र के निदेशक एलेक्जेंडर मैथ्यू ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि बांग्लादेश के अधिकारी फिलहाल द्वीप पर भेजे गए शरणार्थियों को छोटी अवधि के लिए देश की मुख्य भूमि पर लौटने की इजाजत दे रहे हैं। लेकिन इस दौरान गंभीर समस्याएं खड़ी हुई हैं। मैथ्यू ने इस हफ्ते मंगलवार को द्वीप का दौरा किया। मैथ्यू ने कहा कि द्वीप पर आवासीय सुविधा तो बेहतर तैयार की गई है, लेकिन वहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।
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शरणार्थियों ने शिकायत की है कि द्वीप पर भेजे जाने के बाद उन्हें मुख्य भूमि पर मनचाहे ढंग से आने-जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि अगर आने-जाने की आजादी से शरणार्थियों को वंचित किया गया, तो भाशान चार द्वीप पर उन्हें बसाने की पूरी परियोजना पर सवाल उठ खड़े होंगे।

चक्रवात से प्रभावित है द्वीप

भाशान चार बांग्लादेश की मुख्य भूमि से 60 किलोमीटर दूर है। ये द्वीप खतरनाक चक्रवात से प्रभावित होता रहा है। टीवी चैनल अल-जजीरा की एक खबर के मुताबिक इस द्वीप पर पिछले 50 वर्षों के दौरान चक्रवात की वजह से लगभग दस लाख लोगों की मौत हो चुकी है। शरणार्थियों को 53 वर्ग किलोमीटर के दायरे मे बसाया गया है। बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि इस स्थान को चक्रवात से बचाने के लिए एक दीवार बनाई गई है।

शरणार्थियों को मुख्य भूमि से द्वीप पर भेजने के लिए बांग्लादेश सरकार का संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायोग से पिछले महीने एक समझौता हुआ था। इसके तहत बांग्लादेश सरकार द्वीप पर शरणार्थियों की सहायता करने और उनकी सुरक्षा का इंतजाम करने पर राजी हुई थी। लेकिन मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच के शरणार्थी अधिकार विभाग के निदेशक बिल फ्रेलिक ने कहा है कि इस समझौते से बांग्लादेश को इस बात का फ्री टिकट नहीं मिल गया है कि वह जबरन शरणार्थियों को द्वीप पर भेजे।



बांग्लादेश का कहना है कि शरणार्थियों को स्वैच्छिक आधार पर द्वीप पर ले जाया जा रहा है। लेकिन ह्यूमन राइट्स वाच ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश सरकार रोहिंग्या समुदाय के नेताओं को राजी करने के लिए उनसे जोर-जबर्दस्ती कर रही है। आरोप है कि ऐसे कई नेताओं के पहचान पत्र जब्त कर लिए गए हैं।

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