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प्रोग्रेसिव गुटों को कैसे संभाल पाएंगे बाइडन? मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए प्रगतिशील गुटों ने लिखा पत्र

Thu, 19 Nov 2020 06:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 19 Nov 2020 06:06 PM IST
सार

सनराइज मूवमेंट नौजवानों का मजबूत संगठन है, जो खासकर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सक्रिय रहता है। उसकी नेता वर्षिनी प्रकाश ने एक बयान में कहा कि हम अपने साथ धोखा हुआ महसूस कर रहे हैं...

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How will Biden be able to handle progressive groups, they wrote a letter to get a place in the cabinet
Joe Biden - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

अमेरिका में निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के शपथ ग्रहण में अभी लगभग दो महीने का वक्त बाकी है, लेकिन उनके मंत्रिमंडल में किस रूझान के लोग शामिल हों, इसको लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी में टकराव अभी से चरम सीमा पर पहुंच रहा है। पार्टी का प्रगतिशील धड़ा इस आशंका में है कि बाइडन वॉलस्ट्रीट के नुमाइंदों और दक्षिणपंथी नेताओं को अपनी कैबिनेट में महत्वपूर्ण पद दे देंगे। प्रगतिशील धड़ा चाहता है कि अहम मंत्रालय प्रगतिशील रूझान वाले नेताओं को दिए जाएं। इसके लिए इन गुटों ने बाइडन पर दबाव डालने की जोरदार मुहिम छेड़ दी है।

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इन गुटों की तरफ से बाइडन को खुला पत्र लिखा गया है। इसमें उन नेताओं की लिस्ट भी है, जिन्हें ये समूह मंत्रिमंडल में चाहते हैं या जिन्हें वे वहां बिल्कुल देखना नहीं चाहते। बाइडन ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी जीतने के बाद प्रगतिशील मतदाताओं को लुभाने के लिए सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स के साथ एक करार किया था। उसके तहत छह वर्किंग ग्रुप बनाए गए थे। उन्होंने दोनों गुटों की सहमति से महत्वपूर्ण छह मसलों पर एजेंडा तैयार किया। अब प्रगतिशील गुट ये मांग कर रहे हैं कि इस एजेंडे पर अमल की जिम्मेदारी प्रगतिशील छवि के नेताओं को ही दी जाए।
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जो बाइडन ने अब तक जो नियुक्तियां की हैं, उनमें से कुछ नामों को लेकर प्रोगेसिव खेमे में खास एतराज देखने को मिला है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व की तरफ से दलील दी जा रही है कि चूंकि सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए मंत्रिमंडल में ऐसे लोग रखे जाने चाहिए, जिनके रिपब्लिकन नेताओं से निजी संबंध बेहतर हों। ऐसा इसलिए कि सीनेट में सारे बिल रिपब्लिकन पार्टी के सहयोग से ही पारित कराने होंगे। लेकिन ये बात सनराइज मूवमेंट जैसे समूहों के गले नहीं उतरी है।
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सनराइज मूवमेंट नौजवानों का मजबूत संगठन है, जो खासकर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सक्रिय रहता है। उसकी नेता वर्षिनी प्रकाश ने एक बयान में कहा कि हम अपने साथ धोखा हुआ महसूस कर रहे हैं। निर्वाचित राष्ट्रपति ने सबसे पहले की गई अपनी नियुक्तियों में एक ऐसे व्यक्ति को भी शामिल किया है, जो तेल और गैस इंडस्ट्री से चंदा लेता रहा है। प्रकाश का इशारा सेड्रिक रिचमंड की तरफ था।

प्रोग्रेसिव चेंज इंस्टीट्यूट नाम के एक संगठन ने 400 व्यक्तियों की एक सूची उनके संक्षिप्त जीवन परिचय के साथ जारी की है और कहा है कि प्रमुख पदों के लिए लोग इस सूची से लिए जाने चाहिए। इस संगठन का संबंध मैसाचुसेट्स से सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन से है, जो खुद डेमोक्रेटिक पार्टी में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की होड़ में उतरी थीं। एक अन्य प्रोग्रेसिव गुट- जस्टिस डेमोक्रेट्स और सनराइज मूवमेंट ने भी उन नामों की सूची जारी की है, जिन्हें वे मंत्रिमंडल में देखना चाहते हैं।

प्रोग्रेसिव गुटों का कहना है कि 2008 में बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद हुए अनुभव के कारण वे सतर्क हैं। ओबामा प्रगतिशील मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति बने थे, लेकिन उन्होंने अतीत के राष्ट्रपतियों की तरह वॉलस्ट्रीट के एजेंडे को लागू किया। लेकिन तब वामपंथी खेमा कमजोर था। अब संसद में उसकी मजबूत लॉबी है और कई राज्यों की विधायिका और सिटी काउंसिल्स में भी उसके लोग चुनाव जीत कर पहुंच गए हैं। इसलिए अब उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

श्रम, ऊर्जा, शिक्षा मंत्रालयों के साथ-साथ रक्षा और विदेश मंत्री कौन बनता है, इस पर प्रोग्रेविस खेमे की खास निगाहें हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मिशेल फ्लॉरनॉय रक्षा मंत्री बनाई जाएंगी। ऐसा हुआ तो इस पद पर पहुंचने वाली वे पहली महिला होंगी। लेकिन उनका नाम डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़ा रहा है, इसलिए प्रोग्रेसिव खेमा उनका विरोध कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस खेमे की आशंकाओं को दूर करने के लिए हाल में फ्लॉरनॉय ने प्रोग्रेसिव नेताओं से फोन पर बात की। लेकिन इससे बात नहीं, ऐसा नहीं लगता। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद रो खन्ना ने सीएनएन से कहा कि अमेरिका की रक्षा और विदेश नीति में जिस बदलाव की जरूरत है, उस बारे में फ्लॉरनॉय ने अभी कोई भरोसा नहीं बंधाया है।


प्रोग्रेसिव गुटों को चिंता इस बात से है कि बाइडेन रिपब्लिकन पार्टी से मिलकर काम करने की बात कर रहे हैं। इसका यह मतलब हो सकता है कि वे उस प्रोगेसिव एजेंडे पर समझौता कर लें, जिसको सामने रखकर उन्होंने चुनाव लड़ा। उनका पिछला रिकॉर्ड व्यवस्था से जुड़े नेता का रहा है। इसलिए प्रोग्रेसिव गुट उनको कोई मौका नहीं देना चाहते। बर्नी सैंडर्स कह चुके हैं कि वे अपनी तरफ से एक 100 दिन का एजेंडा जारी करेंगे। अगर उस पर इस अवधि में अमल नहीं हुआ, तो फिर वे अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतर जाएंगे।

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