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'सीआईए की झूठी कहानी, पहाड़ के दर्रों में खोज अभियान': कैसे दूसरे पायलट को भी बचा लाया अमेरिका, ऐसा रहा ऑपरेशन

Sun, 05 Apr 2026 03:02 PM IST
Kirtivardhan Mishra स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Sun, 05 Apr 2026 03:02 PM IST
सार

अमेरिका ने किस तरह ईरान के अंदर घुसकर अपने दो वायुसैनिकों को सुरक्षित निकाल लिया? अभियान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की क्या भूमिका रही? पहाड़ियों में छिपे एयरमैन को ढूंढने और बाहर निकालने के लिए क्या तरीका अपनाया गया? ईरान ने क्या दावे किए हैं? आइये जानते हैं...

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How US rescued its Pilot and Airman from Iran Deception Campaign CIA Aircrafts Special Forces C130J Black Hawk
ईरान में अमेरिका का एयरमैन को निकालने के लिए विशेष अभियान। - फोटो : अमर उजाला/AI

विस्तार

अमेरिकी विशेष बलों ने ईरान में फंसे अपने एक और फाइटर जेट के पायलट को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। एक दिन पहले ही अमेरिका ने क्रैश हुए एफ-15ई लड़ाकू विमान के मुख्य पायलट को विशेष अभियान चलाकर बाहर निकाला था। हालांकि, दोनों ही रेस्क्यू मिशन का तरीका और इसकी रणनीति काफी अलग रही है। 
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जहां पिछली कड़ी में हमने यह बताया था कि अमेरिक किस तरह अपने पायलट्स को दुश्मन की जमीन पर सुरक्षित रहने की ट्रेनिंग देता है और उनके फंसने पर किस तरह से और किस टीम के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया जाता है। अब जानते हैं कि अमेरिका ने अपने दूसरे पायलट को किस तरह ईरान की जमीन से बाहर निकाला और इसमें अमेरिका की विदेश मामलों की खुफिया एजेंसी- सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की क्या भूमिका रही? 
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यह भी पढ़ें: ईरान की जमीन से कैसे निकल आया अमेरिकी पायलट: क्या होती है ट्रेनिंग, किस टीम को मिली थी बचाने की जिम्मेदारी?
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कैसे अमेरिका ने चलाया फाइटर जेट के दूसरे क्रू को निकालने का अभियान?


1. सीआईए ने चलाया ईरान का ध्यान भटकाने का अभियान
ईरान में फंसे एफ-15ई के एक क्रू सदस्य, जिनकी पहचान हथियार प्रणाली अधिकारी के तौर पर हुई है, उन्हें बचाने के लिए सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की तरफ से एक खुफिया डिसेप्शन कैंपेन यानी ध्यान भटकाने का अभियान चलाया गया था। इसके तहत...

सीआईए ने इंटरनेट, अपने खुफिया स्रोतों और मानवीय मदद से ईरान के अंदर जानबूझकर यह अफवाह फैला दी कि अमेरिकी बलों ने लापता हुए दूसरे वायुसैनिक को पहले ही खोज लिया है और वे उसे जमीनी रास्ते से देश से बाहर निकालने यानी एक्सफिल्ट्रेट करने की प्रक्रिया में हैं।

अपनी इस रणनीति के जरिए सीआईए ईरानी बलों के बीच भारी भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही थी, ताकि उसका ध्यान उस क्षेत्र से भटक जाए, जहां अमेरिकी सेना वाकई में अपने वायुसैनिक को खोज रही थी। इससे अमेरिका को अपने क्रू सदस्य को खोजने में आसानी हुई। 

 

2. पहाड़ी के दर्रे में छिपे एयरमैन को खोजने के लिए चला वृहद अभियान
सीआईए ने कर्नल को खोजने के लिए जिन खास क्षमताओं का इस्तेमाल किया, उसकी सटीक तकनीकी जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका ने अपने ड्रोन्स, सैटेलाइट और मानवीय खुफिया जानकारी का भरपूर इस्तेमाल किया। इसके चलते ही उसे ईरान की पहाड़ियों के दर्रे में छिपे लगभग एक अदृश्य लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिली। अमेरिकी अधिकारियों ने इस खोज को भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा चुनौतीपूर्ण बताया, जिसे केवल सीआईए की इन विशिष्ट क्षमताओं के कारण ही पूरा किया जा सका।

इस सफल अभियान के दौरान सीआईए ने व्हाइट हाउस और पेंटागन के रक्षा अधिकारियों को सटीक लोकेशन मुहैया कराई। इसके तुरंत बाद विशेष बलों (स्पेशल फोर्सेज) और दर्जनों युद्धक विमानों ने भारी हवाई सुरक्षा के बीच एक जटिल बचाव अभियान चलाकर कर्नल को सुरक्षित निकाल लिया।

अमेरिका के 6 सील कमांडो गए थे ईरान के अंदर
पायलट को बचाने के लिए ईरान की धरती पर छह अमेरिकी सील कमांडो उतरे थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें रेस्क्यू अभियान के दौरान भारी गोलीबारी और प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। ईरानी क्षेत्र में उतरा अमेरिकी पायलट दो दिनों तक पहाड़ों पर छिपा रहा। ईरानी सेना और नागरिकों की नजरों से बचने के लिए एक पहाड़ी की दरार में छिपा और 7,000 फीट की ऊंचाई तक चढ़ गया। दो दिन के जीवन-मरण अभियान के बाद अमेरिकी सेना ने उसे शनिवार की रात सुरक्षित निकाला। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी विमानों ने ईरानी सैन्य काफिलों पर बम गिराए और गोलीबारी की, ताकि उन्हें उस जगह से दूर रखा जा सके जहां वह पायलट छिपा हुआ था।

सैन्य विशेषज्ञ जिम स्कियूटो के अनुसार, कर्नल को खोजने में एक आपातकालीन बीकन की भूमिका हो सकती है, जो लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से ही कमांड मुख्यालय को लगातार एयरमैन की लोकेशन के सिग्नल भेज रहा था। उन्होंने कहा कि इसकी संभावना सबसे ज्यादा है कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से ठीक पहले सुरक्षित बाहर निकले एयरमैन ने दुश्मन की सीमा के अंदर से ही अपने संचार उपकरणों के जरिए अमेरिकी सेना के साथ संपर्क स्थापित कर लिया था। इसी संपर्क के आधार पर उसके रेस्क्यू का रास्ता साफ हुआ।

विशेषज्ञ ने बताया कि उन्हें यह जानकारी भी मिली कि एयरमैन विमान से निकलने के बाद घायल अवस्था में था। ऐसे में अमेरिकी सेना के सामने उसे सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती थी। ऐसे में अगर पायलट बाहर निकल आया है तो यह एक बेहद सफल अभियान रहा। 




 

बचाव अभियान में किन खास सैन्य विमानों और हथियारों का इस्तेमाल किया गया?

इस जटिल बचाव अभियान में दर्जनों विशेष बलों के साथ-साथ कई दर्जन लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, इन विमानों को दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस किया गया था। अमेरिकी विशेष बलों ने पायलट और एयरमैन को निकालने के लिए खास अभियान में सैन्य विमानों के साथ-साथ पैराट्रूपर्स का भी बेहतरीन इस्तेमाल किया। 

1. सैन्य विमान

एचएच-60डब्ल्यू 'जॉली ग्रीन II' हेलीकॉप्टर: अमेरिकी वायुसेना के इस सबसे नए और विशेष कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू हेलीकॉप्टर को इस अभियान का बीस्ट कहा जा रहा है। यह सेल्फ-सीलिंग फ्यूल टैंक, रात और खराब मौसम के लिए एडवांस सेंसर, और बचाव के दौरान सुरक्षा प्रदान करने के लिए डोर गन जैसी खूबियों से लैस है।

ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर: दुश्मन की भारी गोलीबारी के बीच कर्नल को निकालने के लिए इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया। यह तेज रफ्तार हेलीकॉप्टर अपनी लचीली क्षमताओं की वजह से दुश्मनों के हमले से बचने में भी माहिर होते हैं। 

ए-10 वॉर्थोग अटैक जेट: इन जेट्स ने बचाव दल को करीब से हवाई सुरक्षा मुहैया कराई, ताकि दुश्मन रेस्क्यू के दौरान ईरान की जमीन पर उतरने वालों पर हमला न कर दें और हवाई हमलों से बचते रहें। हालांकि, खबर है कि इसी खोज अभियान के दौरान एक ए-10 जेट को मार गिराया गया था जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

एफ-35 स्टेल्थ जेट: इन उन्नत लड़ाकू विमानों ने स्टैंडऑफ रेंज से अभियान में अपनी भूमिका निभाई।

एचसी-130 मिड-एयर टैंकर: इसका इस्तेमाल हवा में ईंधन भरने या बचाव कार्यों में मदद के लिए किया गया। आमतौर पर किसी विशेष अभियान में इस रिफ्यूलर को बेड़े के साथ रखा ही जाता है, ताकि ऑपरेशन के बीच में विमान को ईंधन की कमी से न जूझना पड़े। 

परिवहन विमान सी-130जे: बचाव दल को वापस लाने के लिए इन विमानों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, दो परिवहन विमान उड़ान नहीं भर सके। अमेरिका के कुछ खुफिया सूत्रों का कहना है कि दुश्मन की तरफ से निशाना बनाए जाने के बाद इन्हें कब्जे में जाने से रोकने के लिए अमेरिकी बलों ने खुद ही नष्ट कर दिया।

2. सैन्य हथियार

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी विमानों ने बम गिराए और ईरानी सैन्य काफिलों पर भारी गोलाबारी की, ताकि उन्हें उस इलाके से दूर रखा जा सके जहां अमेरिकी कर्नल छिपे हुए थे। दूसरी ओर, यह भी एक चौंकाने वाला तथ्य है कि जब तक एयरमैन ईरान में फंसा हुआ था, तब तक दुश्मन की सीमा के पीछे अपना बचाव करने के लिए उसके पास केवल एक हैंडगन ही थी।

तो क्या इस बचाव अभियान में अमेरिका को नुकसान भी हुआ?

  • अमेरिकी सेना को इस रेस्क्यू अभियान में एक ए-10 वॉर्थोग का नुकसान हुआ, जो कि ईरान की गोलीबारी की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
  • ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि उन्होंने इस्फहान प्रांत में खोज अभियान में लगे एक अमेरिकी सी-130 विमान को तबाह कर दिया।
  • बचाव दल को वापस लाने के लिए गए दो अमेरिकी परिवहन विमान उड़ान भरने में विफल रहे, जिन्हें अमेरिकी बलों ने दुश्मन से बचाने के लिए खुद ही तबाह कर दिया। इस बीच तीन और लड़ाकू विमानों ने ईरान में फंसे सुरक्षा बलों को निकाला।
  • अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले बचाव अभियान के दौरान, ईरान की गोलाबारी से एक अमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे उसमें सवार चालक दल के सदस्य घायल हो गए।
  • हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस विशेष बचाव अभियान में कोई भी अमेरिकी सैनिक मरा या घायल नहीं हुआ है।

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