Singapore: सिंगापुर टेक कर्मचारियों की छंटनी भारतीयों को कैसे प्रभावित कर रही है? जानें सबकुछ यहां
छंटनी के बाद मीडिया रिपोर्टों ने अनुमान लगाया कि अनुमानित 1,000 कर्मचारियों में से 100 पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। जिनमें से अधिकांश सॉफ्टवेयर इंजीनियरों सहित तकनीकी कर्मचारी हैं।
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फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने घोषणा की है कि वह लगभग 11,000 कर्मचारियों या अपने वैश्विक कर्मचारियों के 13 फीसदी की छंटनी करने जा रही है। इस छंटनी से भारतीय कर्मचारियों पर भी बुरा असर पड़ा है। मीडिया रिपोर्टों ने अनुमान लगाया कि अनुमानित प्रति 1,000 कर्मचारियों में से 100 पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। जिनमें से अधिकांश सॉफ्टवेयर इंजीनियरों सहित तकनीकी कर्मचारी हैं। साल 2021 के सिंगापुर मिनिस्ट्री ऑफ मैनपॉवर के आंकड़ों के आधार पर, 177,100 रोजगार पास धारकों में से लगभग एक चौथाई या लगभग 45,000 भारत से हैं। रोजगार पास धारक उच्चतम योग्य विदेशी पेशेवर हैं और वे प्रति माह कम से कम 2.96 लाख रुपये अर्जित करते हैं। इनमें से कई न केवल मेटा की छंटनी बल्कि तकनीकी क्षेत्र में होने वाली अन्य परेशानियों से भी प्रभावित हैं।
फेसबुक, ट्विटर और अमेजन कर रही छंटनी
फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा के शेयरो में इस वर्ष अब तक 73 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। कंपनी के शेयर वर्ष 2016 के अपने न्यूनतम स्तर से भी नीचे पहुंचकर एसएंडपी 500 इंडेक्स के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शेयरों की सूची में शामिल हो गए हैं। जिसके बाद से तेजी से छंटनी की प्रक्रिया की जा रही है। इतना ही नहीं 2004 में शुरू हुई कंपनी के 18 सालों के इतिहास में ये सबसे बड़ी छंटनी हैं। कंपनी की खस्ता माली हालत और खराब तिमाही नतीजों के चलते ये फैसला लिया गया है। इसके बाद ट्विटर ने भी घाटे की बात कही है औक कई कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अमेजन में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जेमी जांग ने लिंक्डइन पर लिखा कि उन्हें कंपनी से फायर कर दिया गया है। इसके अलावा, एक पूर्व कर्मचारी के एक पोस्ट में यह भी कहा गया था कि पूरी रोबोटिक्स टीम (Robotics Team) को पिंक स्पिल दी गई थी।
भारतीयों पर कैसे पड़ेगा बुरा प्रभाव
सिंगापुर मिनिस्ट्री ऑफ मैनपावर के आंकड़ों के आधार पर, 177,100 रोजगार पास धारकों में से लगभग एक चौथाई या लगभग 45,000 भारत से हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि विदेश में आए 1.77 लाख कर्मचारियों में एक चौथाई भारतीय कर्मचारी हैं। छंटनी के बाद इन्हें दूसरी जॉब पाने में दिक्कत आएगी। इसके अलावा नए पेशेवर जो सिंगापुर या अन्य देशों में जाकर जॉब करना चाहते हैं उन्हें निराश होना पड़ सकता है। या तो उन्हें देश में ही कम सैलरी पर काम करना पड़ सकता है या फिर कंपनी के घाटे से उबरने का इंतजार करना पड़ सकता है। अधिकतर कॉलेजों में मेटा, ट्विटर और अमेजन से प्लेसमेंट अधिक होते हैं लेकिन इस तरह से छंटनी भारतीय छात्रों को निराश कर सकते हैं।