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Hamas: जिसे यासिर अराफात पर नियंत्रण के लिए शह देता था इस्राइल, वही बन गया सबसे बड़े दुश्मन हमास का जनक

Fri, 13 Oct 2023 08:20 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 13 Oct 2023 08:20 PM IST
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सार
Hamas: हमास ने 1988 में गाजा में दो इस्राइली रक्षा बल (आईडीएफ) कर्मियों की हत्या कर दी। घटना के बाद से इस्राइल हमास के खिलाफ हो गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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Hamas founder sheikh ahmed yassin and his rival yasser arafat connection with Israel
हमास - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

हमास के अनायास हमले ने इस्राइल को स्तब्ध कर दिया। हमास के हमले के बाद इस्राइल ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी जिसमें हमास के कई आतंकी ढेर हो गए। बीते शनिवार को शुरू हुई लड़ाई के एक हफ्ते से जारी है। इसके साथ ही दुनियाभर में हमास की चर्चा हो रही है कि इसने शक्तिशाली देश को कैसे चकमा दे दिया। 


आज हमास इस्राइल के लिए खतरा बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में इसने कई इस्राइली नागरिकों की जान ली है। हालांकि, इस्राइल को 1980 के दशक में की गई गलती जरूर याद आ रही होगी जिससे हमास की नींव पड़ी। तो आइये जानते हैं कि आखिर क्या है हमास? यह क्यों बनाया गया था? इस्राइल ने इसके बनने में क्या मदद की? इस्राइल के लिए खतरा क्यों बना? 



 

आखिर क्या है हमास?
हमास की उत्पत्ति से पहले हमें फलस्तीन के मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन पलेस्टाइन लिबरेशन आर्गेनाइजेशन  (पीएलओ) को समझना चाहिए। पीएलओ की कल्पना 1964 में मिस्र के काहिरा में अरब लीग शिखर सम्मेलन में की गई थी। यासिर अराफात 1969 में पीएलओ के अध्यक्ष बने। पीएलओ ने अपने चार्टर में ही फलस्तीन की मुक्ति के लिए इस्राइल को खत्म करने की घोषणा कर दी। हालांकि, इस्राइल और पीएलओ की शांति के लिए हुए ओस्लो समझौते के बाद यह अनुच्छेद हटा दिया गया। इसके साथ ही पीएलओ ने इस्राइल को यहूदी देश के रूप में मान्यता दे दी।

इसी तरह 1980 और 1990 के दशक के अंत में इस्राइली सरकार ने पीएलओ पर लगाए प्रतिबंध हटा लिए। 13 सितम्बर 1993 को अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की मध्यस्थता में पीएलओ-इस्राइली समझौता हुआ। इसके साथ ही इस्राइल ने पीएलओ को मान्यता दे दी। 

उधर पीएलओ के प्रतिद्वंद्वी हमास को जन्म हो चुका था। हमास की उत्पत्ति इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन यानी इंतिफादा विद्रोह के दौरान 1987 में हुई। इसे ईरान का समर्थन मिला था जिसकी विचारधारा मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड की इस्लामी विचारधारा से मेल खाती थी। 

हमास की स्थापना मजहबी नेता शेख अहमद यासीन ने की थी। साल 1987 में यासीन ने इस्राइल के खिलाफ पहले इंतिफादा की घोषणा की थी। इंतिफादा आमतौर पर 'बगावत' या 'विद्रोह' को कहा जाता है। 1988 में हमास ने कहा था कि इसकी स्थापना फलस्तीन की मुक्ति के लिए हुई है।  

हमास का इतिहास
हमास का इतिहास - फोटो : amarujala.com
मुजामा अल-इस्लामिया बन गया हमास
दरअसल, जून 1967 के अरब-इजरायल युद्ध के इस्राइल का गाजा पर कब्जा हो गया। उधर गाजा ने मुजामा अल-इस्लामिया नाम के संगठन को संरक्षण दिया, जिसे फलस्तीनी मौलवी शेख अहमद यासीन ने बनाया था। तब इस्राइल ने मुजामा अल-इस्लामिया को एक ऐसा संगठन माना जो फलस्तीनी समुदाय के लिए दान और कल्याण कार्यों में शामिल रहता है और इससे उसे कोई खतरा नहीं है। दिसंबर 1987 में इस्लामी विद्रोह यानी इंतिफादा-I के लॉन्च होने से पहले मुजामा अल-इस्लामिया ही हमास बन गया। 

इस्राइल ने माना कि पीएलओ की तुलना में मुजामा अल-इस्लामिया और उससे उपजा संगठन हमास कम खतरनाक है। इस्राइल ने सोचा कि फलस्तीनियों को विभाजित करने से यहूदी राष्ट्र के हित में मदद मिलेगी। जहां इस्राइल ने पीएलओ को आतंकी संगठन और अपने हितों के लिए बड़ा खतरा बताया, तो हमास भी पीएलओ के धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के कारण उसके खिलाफ था। 
इस्राइल ने शेख अहमद यासीन नाम के इस अपाहिज मौलवी का साथ दिया जब वह हमास बनने की नींव रख रहा था। इस्राइल ने गाजा के इस्लामिक विश्वविद्यालय की स्थापना का भी समर्थन किया, जिसे अब वह उग्रवाद का केंद्र मानता है।   

इस तरह से हमास और इस्राइल दोनों को पीएलओ के खिलाफ स्वाभाविक सहयोगी के रूप में देखा जाने लगा। हालांकि, 1988 में हुई एक घटना ने पूरी तस्वीर बदल दी। दरअसल, हमास ने 1988 में गाजा में दो इस्राइली रक्षा बल (आईडीएफ) कर्मियों की हत्या कर दी। घटना के बाद से इस्राइल हमास के खिलाफ हो गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।  

हमास
हमास - फोटो : AMAR UJALA
हमास ने इस्राइल-पीएलओ समझौते का फायदा उठाया
जो हमास पहले खुद को एक कल्याणकारी और दान संगठन होने की बातें करता था और इस्राइल से समर्थन प्राप्त करता था उसी ने अपनी रणनीति बदल दी। हमास ने इस्राइल से नाखुश फलस्तीनियों का समर्थन हासिल करने के लिए इस्राइल-पीएलओ के बीच शांति प्रक्रिया का फायदा उठाया। दरअसल, कुछ फलस्तीनी इंतिफादा-I में सैकड़ों फिलिस्तीनियों की हत्या के बावजूद यासर अराफात द्वारा यहूदी राष्ट्र के साथ संबंधों को सुधारने से खफा थे। शेह अहमद यासीन ने इसी का फायदा उठाया। 

इस्राइली झंडा
इस्राइली झंडा - फोटो : Social media
अधिकारियों को गलती का अहसास...
हमास के बनने में मदद करने वाले इस्राइली अधिकारियों को जल्द ही अपनी गलती का अहसास हो गया। ट्यूनीशियाई मूल के यहूदी और इस्राइली अधिकारी अवनेर कोहेन कहते हैं, 'मुझे बहुत अफसोस है कि हमास इस्राइल की देन है'। कोहेन 1970 और 1980 के दशक के दौरान गाजा में धार्मिक मामलों को देखने वाले एक इजरायली अधिकारी थे। 

कोहेन ने तर्क दिया कि शुरू से ही गाजा के इस्लामवादियों पर अंकुश लगाने की कोशिश करने के बजाय इस्राइल ने वर्षों तक सहन किया। उनका मानना था कि कुछ मामलों में हमास को पीएलओ और उसके प्रमुख गुट यासिर अराफात के फतह के विरोधी के रूप में प्रोत्साहित किया। 

 इस्राइली अधिकारी एंड्रयू हिगिंस ने वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक साक्षात्कार में कहते हैं, 'जब मैं घटनाओं की श्रृंखला को देखता हूं तो मुझे लगता है कि हमने गलती की है लेकिन उस समय किसी ने संभावित परिणामों के बारे में नहीं सोचा था।'

धीरे-धीरे फलस्तीन में हमास का दखल बढ़ता गया। इसने 1993 में हुए पीएलओ-इस्राइली समझौते का पुरजोर विरोध किया। यहूदी राष्ट्र की मान्यता की खिलाफत करते हुए हमास ने इस्राइली के खात्मे का एलान कर दिया। 

Israel Hamas War
Israel Hamas War - फोटो : Amar Ujala
2007 से गाजा पट्टी पर शासन में हमास 
साल 1993 से लेकर साल 2005 तक हमास ने इस्राइल में कई आत्मघाती हमले किए। वहीं, शेख यासीन जिसे इस्रा इल ने पीएलओ के खिलाफ संरक्षण दिया था, 2004 में इस्राइली हवाई हमले में मारा गया था। वर्तमान में संगठन की कमान इस्माइल हनिया के हाथों में है। हमास का 2007 से गाजा पट्टी पर शासन है। आज हमास अमेरिका समेत कई देशों में प्रतिबंधित संगठन है।
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