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असद की कहानी: राष्ट्रपति बनने की उम्र नहीं थी, घंटों में संविधान बदला; 12 दिन में खत्म हुआ 53 साल का परिवारराज
Mon, 09 Dec 2024 05:45 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Mon, 09 Dec 2024 05:45 PM IST
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सारिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद का परिवार
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
सीरिया में इस वक्त गहरा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार गिर गई है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब विद्रोही अचानक हमला करके सरकार के कब्जे वाले क्षेत्र से होते राजधानी दमिश्क में घुस गए। विद्रोहियों के कब्जे के चलते असद को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। असद और उनका परिवार रूस आ गया है जिसने उन्हें शरण दी है।सीरियाई सरकार गिरने के साथ ही असद परिवार के 53 साल के शासन का भी अचानक अंत हो गया है। दुनिया भर के नेताओं ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है और कुछ ने संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की भी मांग की है।
आइये जानते हैं कि सीरिया में क्या हुआ है? असर सरकार क्यों गिर गई? कौन हैं अपदस्थ राष्ट्रपति असद? असद परिवार का इतिहास क्या है?अब आगे क्या होगा?
पहले जानते हैं कि सीरिया में क्या हुआ है?
देश में कुछ वर्षों से शांत पड़ा गृह युद्ध अचानक उभर आया। बमुश्किल दो हफ्तों के अंदर सीरियाई विद्रोही समूहों ने अलप्पो, होम्स और दारा जैसे कई बड़े शहरों पर कब्जा कर लिया। इसी कड़ी में रविवार को विद्रोही राजधानी दमिश्क में घुस गए, जिसके चलते राष्ट्रपति बशर अल-असद को देश से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। रविवार को दमिश्क पर कब्जा करने के बाद विद्रोहियों ने कहा कि दमिश्क अब बशर अल-असद से मुक्त है। सशस्त्र विद्रोहियों ने एक बयान में कहा, 'अत्याचारी बशर अल-असद भाग गए हैं।'
देश में कुछ वर्षों से शांत पड़ा गृह युद्ध अचानक उभर आया। बमुश्किल दो हफ्तों के अंदर सीरियाई विद्रोही समूहों ने अलप्पो, होम्स और दारा जैसे कई बड़े शहरों पर कब्जा कर लिया। इसी कड़ी में रविवार को विद्रोही राजधानी दमिश्क में घुस गए, जिसके चलते राष्ट्रपति बशर अल-असद को देश से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। रविवार को दमिश्क पर कब्जा करने के बाद विद्रोहियों ने कहा कि दमिश्क अब बशर अल-असद से मुक्त है। सशस्त्र विद्रोहियों ने एक बयान में कहा, 'अत्याचारी बशर अल-असद भाग गए हैं।'
सीरिया में असद सरकार गिरी
- फोटो :
अमर उजाला
सीरिया में फिर से गृहयुद्ध कैसे शुरू हुआ?
सीरिया में जो कुछ हुआ वो सब दो हफ्ते के भीतर ही हुआ। इसकी शुरुआत उस वक्त हुई जब नवंबर के अंत में कट्टरपंथी समूह हयात तहरीर अल-शाम ने सीरिया में अचानक हमला किया। हयात तहरीर अल-शाम या एचटीएस लंबे समय से देश का सबसे मजबूत विद्रोही गुट माना जाता रहा है। इन विद्रोहियों ने 26 नवंबर को अचानक अलप्पो के उत्तर और उत्तर-पश्चिम के इलाकों से हमला किया। वहीं 29-30 नवंबर को वे शहर में घुस आए और सेना को वहां से खदेड़ दिया। इसके बाद एचटीएस के हजारों लड़ाकों ने एक प्रमुख शहर अलप्पो पर कब्जा कर लिया। धीरे-धीरे विद्रोहियों ने देश के एक हिस्से से बशर अल-असद की सेना को पीछे कर दिया। इस टकराव से देश में 13 साल से चल रहे गृहयुद्ध में एक नया दौर शुरू हो गया जिसके बारे में कई लोगों का मानना था कि यह खत्म हो गया है।
यह 2016 के बाद पहली बार है जब अलप्पो शहर का नियंत्रण असद सरकार से छिन गया। आठ साल पहले रूस और ईरान समर्थित सैन्य बलों ने अलप्पो के पूर्वी जिलों पर कब्जा करने वाले विद्रोहियों को खदेड़ दिया था। हालिया हमले ने संघर्ष की बढ़ती गंभीर स्थिति के संकेत दे दिए थे। 2011 में असद सरकार के खिलाफ अरब स्प्रिंग विद्रोह से शुरू हुए में युद्ध में करीब पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है। गृह युद्ध से 2.3 करोड़ की आबादी वाले देश से करीब 68 लाख लोगों को अपने घरों से मजबूर बेघर होना पड़ा है और लाखों लोग विदेश में शरणार्थी बन गए हैं।
सीरिया में जो कुछ हुआ वो सब दो हफ्ते के भीतर ही हुआ। इसकी शुरुआत उस वक्त हुई जब नवंबर के अंत में कट्टरपंथी समूह हयात तहरीर अल-शाम ने सीरिया में अचानक हमला किया। हयात तहरीर अल-शाम या एचटीएस लंबे समय से देश का सबसे मजबूत विद्रोही गुट माना जाता रहा है। इन विद्रोहियों ने 26 नवंबर को अचानक अलप्पो के उत्तर और उत्तर-पश्चिम के इलाकों से हमला किया। वहीं 29-30 नवंबर को वे शहर में घुस आए और सेना को वहां से खदेड़ दिया। इसके बाद एचटीएस के हजारों लड़ाकों ने एक प्रमुख शहर अलप्पो पर कब्जा कर लिया। धीरे-धीरे विद्रोहियों ने देश के एक हिस्से से बशर अल-असद की सेना को पीछे कर दिया। इस टकराव से देश में 13 साल से चल रहे गृहयुद्ध में एक नया दौर शुरू हो गया जिसके बारे में कई लोगों का मानना था कि यह खत्म हो गया है।
यह 2016 के बाद पहली बार है जब अलप्पो शहर का नियंत्रण असद सरकार से छिन गया। आठ साल पहले रूस और ईरान समर्थित सैन्य बलों ने अलप्पो के पूर्वी जिलों पर कब्जा करने वाले विद्रोहियों को खदेड़ दिया था। हालिया हमले ने संघर्ष की बढ़ती गंभीर स्थिति के संकेत दे दिए थे। 2011 में असद सरकार के खिलाफ अरब स्प्रिंग विद्रोह से शुरू हुए में युद्ध में करीब पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है। गृह युद्ध से 2.3 करोड़ की आबादी वाले देश से करीब 68 लाख लोगों को अपने घरों से मजबूर बेघर होना पड़ा है और लाखों लोग विदेश में शरणार्थी बन गए हैं।
सीरिया में हालिया संकट से पहले कहां किसका नियंत्रण था
- फोटो :
Amar Ujala GFX/Janes
असद सरकार को हटाने वाले विद्रोही कौन हैं?
हाल के दिनों में सीरियाई शहरों पर हमले की शुरुआत हयात तहरीर अल-शाम ने की थी। हयात तहरीर अल-शाम का अर्थ है ग्रेटर सीरिया की मुक्ति के लिए आंदोलन। इसने उत्तर-पश्चिमी सीरियाई प्रांत इदलिब को नियंत्रित किया है। एचटीएस लंबे समय से इदलिब में प्रमुख ताकत रहा है। हयात तहरीर अल-शाम का नेता 42 वर्षीय अहमद हुसैन अल-शरा है, जिसे अबू मुहम्मद अल-गोलानी के नाम से भी जाना जाता है।
तहरीर अल-शाम को पहले जबात नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था। दरअसल, एचटीएस को अल-कायदा ने बनाया था ताकि यह सीरिया के गृहयुद्ध खत्म होने के बाद यहां की स्थिति का फायदा उठा सके। यह जल्द ही अपने मकसद में कामयाब भी हो गया और इसने विद्रोही हमलों के साथ-साथ सेना और अन्य दुश्मनों के खिलाफ आत्मघाती बम विस्फोट किए। हालांकि, यह समूह धीरे-धीरे सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट का कट्टर दुश्मन बन गया और अंततः 2016 में अल-कायदा से भी अलग हो गया। अमेरिका, रूस, तुर्किये और अन्य देशों ने तहरीर अल-शाम को आतंकवादी समूह घोषित किया है। एक अन्य विद्रोही गठबंधन ने अलप्पो के उत्तरी इलाकों से अलग से हमला किया। इन विद्रोहियों को तुर्किये का समर्थन है और ये सीरियाई राष्ट्रीय सेना के बैनर तले संगठित हैं।
हाल के दिनों में सीरियाई शहरों पर हमले की शुरुआत हयात तहरीर अल-शाम ने की थी। हयात तहरीर अल-शाम का अर्थ है ग्रेटर सीरिया की मुक्ति के लिए आंदोलन। इसने उत्तर-पश्चिमी सीरियाई प्रांत इदलिब को नियंत्रित किया है। एचटीएस लंबे समय से इदलिब में प्रमुख ताकत रहा है। हयात तहरीर अल-शाम का नेता 42 वर्षीय अहमद हुसैन अल-शरा है, जिसे अबू मुहम्मद अल-गोलानी के नाम से भी जाना जाता है।
तहरीर अल-शाम को पहले जबात नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था। दरअसल, एचटीएस को अल-कायदा ने बनाया था ताकि यह सीरिया के गृहयुद्ध खत्म होने के बाद यहां की स्थिति का फायदा उठा सके। यह जल्द ही अपने मकसद में कामयाब भी हो गया और इसने विद्रोही हमलों के साथ-साथ सेना और अन्य दुश्मनों के खिलाफ आत्मघाती बम विस्फोट किए। हालांकि, यह समूह धीरे-धीरे सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट का कट्टर दुश्मन बन गया और अंततः 2016 में अल-कायदा से भी अलग हो गया। अमेरिका, रूस, तुर्किये और अन्य देशों ने तहरीर अल-शाम को आतंकवादी समूह घोषित किया है। एक अन्य विद्रोही गठबंधन ने अलप्पो के उत्तरी इलाकों से अलग से हमला किया। इन विद्रोहियों को तुर्किये का समर्थन है और ये सीरियाई राष्ट्रीय सेना के बैनर तले संगठित हैं।
पुतिन लंबे समय से असद के सहयोगी रहे हैं
- फोटो :
अमर उजाला
कहां हैं अपदस्थ राष्ट्रपति असद?
सीरिया में जब एक ओर विद्रोही असद के शासन के खात्मे का जश्न मना रहे थे तब दूसरी ओर राष्ट्रपति के ठिकाने को लेकर अलग-अलग सूचनाएं आने लगीं। इसी दिन रूसी सरकारी मीडिया ने घोषणा की कि वह मॉस्को पहुंच गए हैं। न्यूज एजेंसी TASS ने क्रेमलिन सूत्र के हवाले से जानकारी दी कि असद और उनका परिवार मॉस्को पहुंच चुका है। मानवीय कारणों से रूस ने उन्हें शरण दी है।
जब से विद्रोह शुरू हुआ है तब से ही असद सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं दिखे। पिछले सप्ताह के अंत में राष्ट्रपति असद ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ एक बैठक की थी जिसमें विद्रोही गुटों को 'आतंकवादी संगठन' बताते हुए इनसे लड़ने की चेतावनी दी थी, लेकिन विद्रोहियों द्वारा प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लेने के बाद उन्होंने इसके अलावा कोई टिप्पणी नहीं की। शनिवार को जब विद्रोहियों ने दमिश्क को घेर लिया, तब असद शहर में कहीं नहीं दिखाई दिए। असद के राष्ट्रपति सुरक्षा गार्ड भी उनके निवास पर तैनात नहीं थे, जबकि यदि वह वहां होते तो वे वहां तैनात होते। रविवार के घटनाक्रम से पहले यह अटकलें तेज हो गई थीं कि शायद वह भाग गए हैं।
पहले सीरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस बात से इनकार किया था कि असद दमिश्क छोड़कर किसी अन्य देश चले गए हैं और कहा था कि कुछ विदेशी मीडिया अफवाहें और झूठी खबरें फैला रहे हैं। उधर विद्रोहियों ने कहा कि राजधानी पर कब्जा करने के बाद वह भाग गए हैं और उनकी तलाश की जा रही है। कुछ लड़ाकों ने उनके सरकारी आवासों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। अफवाहों के बीच, रूस के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि असद ने राष्ट्रपति पद छोड़ने का फैसला किया है और शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण के निर्देश देते हुए देश छोड़ दिया है। बयान में यह भी कहा गया कि रूस ने इन वार्ताओं में भाग नहीं लिया। बाद में यह खुलासा हुआ कि असद मास्को पहुंच चुके हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लंबे समय से असद के सहयोगी माने जाते रहे हैं और उन्होंने सीरियाई सरकार को हवाई शक्ति और अन्य सैन्य मदद के साथ मदद की थी।
सीरिया में जब एक ओर विद्रोही असद के शासन के खात्मे का जश्न मना रहे थे तब दूसरी ओर राष्ट्रपति के ठिकाने को लेकर अलग-अलग सूचनाएं आने लगीं। इसी दिन रूसी सरकारी मीडिया ने घोषणा की कि वह मॉस्को पहुंच गए हैं। न्यूज एजेंसी TASS ने क्रेमलिन सूत्र के हवाले से जानकारी दी कि असद और उनका परिवार मॉस्को पहुंच चुका है। मानवीय कारणों से रूस ने उन्हें शरण दी है।
जब से विद्रोह शुरू हुआ है तब से ही असद सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं दिखे। पिछले सप्ताह के अंत में राष्ट्रपति असद ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ एक बैठक की थी जिसमें विद्रोही गुटों को 'आतंकवादी संगठन' बताते हुए इनसे लड़ने की चेतावनी दी थी, लेकिन विद्रोहियों द्वारा प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लेने के बाद उन्होंने इसके अलावा कोई टिप्पणी नहीं की। शनिवार को जब विद्रोहियों ने दमिश्क को घेर लिया, तब असद शहर में कहीं नहीं दिखाई दिए। असद के राष्ट्रपति सुरक्षा गार्ड भी उनके निवास पर तैनात नहीं थे, जबकि यदि वह वहां होते तो वे वहां तैनात होते। रविवार के घटनाक्रम से पहले यह अटकलें तेज हो गई थीं कि शायद वह भाग गए हैं।
पहले सीरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस बात से इनकार किया था कि असद दमिश्क छोड़कर किसी अन्य देश चले गए हैं और कहा था कि कुछ विदेशी मीडिया अफवाहें और झूठी खबरें फैला रहे हैं। उधर विद्रोहियों ने कहा कि राजधानी पर कब्जा करने के बाद वह भाग गए हैं और उनकी तलाश की जा रही है। कुछ लड़ाकों ने उनके सरकारी आवासों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। अफवाहों के बीच, रूस के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि असद ने राष्ट्रपति पद छोड़ने का फैसला किया है और शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण के निर्देश देते हुए देश छोड़ दिया है। बयान में यह भी कहा गया कि रूस ने इन वार्ताओं में भाग नहीं लिया। बाद में यह खुलासा हुआ कि असद मास्को पहुंच चुके हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लंबे समय से असद के सहयोगी माने जाते रहे हैं और उन्होंने सीरियाई सरकार को हवाई शक्ति और अन्य सैन्य मदद के साथ मदद की थी।
बशर अल-असद
- फोटो :
अमर उजाला ग्राफिक्स
कौन हैं बशर अल-असद?
बशर अल-असद अपने परिवार में दूसरी पीढ़ी के नेता हैं। असद परिवार पांच दशकों से अधिक समय तक सीरिया की सत्ता पर काबिज रहा। असद अरब सोशलिस्ट बाथ पार्टी के केंद्रीय कमान के महासचिव थे। वह हाफिज अल-असद के बेटे हैं जो 1971 से 2000 में अपनी मृत्यु तक राष्ट्रपति थे। बशर अल-असद एक नेत्र रोग विशेषज्ञ रह चुके हैं जिन्होंने लंदन में मेडिकल की पढ़ाई की थी। उन्होंने ब्रिटिश-सीरियाई पत्नी अस्मा से 2000 में निकाह किया था। अस्मा अल-असद सीरियाई मूल की पूर्व निवेश बैंकर हैं, जो लंदन में पली-बढ़ी हैं।
बशर ने 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद की मृत्यु के बाद हुए चुनाव में सत्ता संभाली थी। हाफिज ने बाथ पार्टी का नेतृत्व करते हुए 1970 में सीरिया की सत्ता पर कब्जा किया और अगले साल देश के राष्ट्रपति बने। युवा बशर अल-असद अपने पिता की सियासी छाया में भले ही बड़े हुए लेकिन अपने पिता की विरासत को संभालने के लिए तैयार नहीं थे। उनके बड़े भाई बैसेल को पिता हाफिज का उत्तराधिकारी बनने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, बैसेल की 1994 में एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद बशर अल-असद राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए। उन्होंने आगे चलकर सैन्य विज्ञान की पढ़ाई की और सीरियाई सेना में कर्नल बन गए। बशर अल-असद के भाई के जाने के करीब छह साल बाद 2000 में उनके पिता की भी मौत हो गई। इसके बाद असद परिवार के सामने सत्ता को लेकर संकट खड़ा हो गया क्योंकि बशर अल-असद अपनी उम्र के चलते राष्ट्रपति पद संभालने के लिए योग्य नहीं थे। जून 2000 में हाफिज अल-असद की मृत्यु के बाद सीरियाई संसद में कुछ ही घंटे में संविधान में बदलाव कर दिया गया। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की उम्र 40 वर्ष से घटाकर 34 वर्ष कर दी गई। उस वक्त बशर अल-असद की आयु भी 34 वर्ष ही थी। संविधान में हुए बदलाव के चलते जुलाई 2000 में चुनावों के बाद बशर को अपने पिता का उत्तराधिकारी बनने का मौका मिल गया। असद को हर सात साल में व्यापक बहुमत से फिर से चुना जाता रहा है। सबसे हालिया चुनाव 2021 में हुआ था जिसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे कई देशों ने फर्जी चुनाव माना था।
बशर अल-असद अपने परिवार में दूसरी पीढ़ी के नेता हैं। असद परिवार पांच दशकों से अधिक समय तक सीरिया की सत्ता पर काबिज रहा। असद अरब सोशलिस्ट बाथ पार्टी के केंद्रीय कमान के महासचिव थे। वह हाफिज अल-असद के बेटे हैं जो 1971 से 2000 में अपनी मृत्यु तक राष्ट्रपति थे। बशर अल-असद एक नेत्र रोग विशेषज्ञ रह चुके हैं जिन्होंने लंदन में मेडिकल की पढ़ाई की थी। उन्होंने ब्रिटिश-सीरियाई पत्नी अस्मा से 2000 में निकाह किया था। अस्मा अल-असद सीरियाई मूल की पूर्व निवेश बैंकर हैं, जो लंदन में पली-बढ़ी हैं।
बशर ने 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद की मृत्यु के बाद हुए चुनाव में सत्ता संभाली थी। हाफिज ने बाथ पार्टी का नेतृत्व करते हुए 1970 में सीरिया की सत्ता पर कब्जा किया और अगले साल देश के राष्ट्रपति बने। युवा बशर अल-असद अपने पिता की सियासी छाया में भले ही बड़े हुए लेकिन अपने पिता की विरासत को संभालने के लिए तैयार नहीं थे। उनके बड़े भाई बैसेल को पिता हाफिज का उत्तराधिकारी बनने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, बैसेल की 1994 में एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद बशर अल-असद राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए। उन्होंने आगे चलकर सैन्य विज्ञान की पढ़ाई की और सीरियाई सेना में कर्नल बन गए। बशर अल-असद के भाई के जाने के करीब छह साल बाद 2000 में उनके पिता की भी मौत हो गई। इसके बाद असद परिवार के सामने सत्ता को लेकर संकट खड़ा हो गया क्योंकि बशर अल-असद अपनी उम्र के चलते राष्ट्रपति पद संभालने के लिए योग्य नहीं थे। जून 2000 में हाफिज अल-असद की मृत्यु के बाद सीरियाई संसद में कुछ ही घंटे में संविधान में बदलाव कर दिया गया। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की उम्र 40 वर्ष से घटाकर 34 वर्ष कर दी गई। उस वक्त बशर अल-असद की आयु भी 34 वर्ष ही थी। संविधान में हुए बदलाव के चलते जुलाई 2000 में चुनावों के बाद बशर को अपने पिता का उत्तराधिकारी बनने का मौका मिल गया। असद को हर सात साल में व्यापक बहुमत से फिर से चुना जाता रहा है। सबसे हालिया चुनाव 2021 में हुआ था जिसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे कई देशों ने फर्जी चुनाव माना था।
बशर अल-असद
- फोटो :
ANI
असद सरकार गिरने के बाद अब क्या होगा?
सीरिया में 13 साल के युद्ध के बाद बशर असद की सरकार जाने से दशकों पुराना राजवंश खत्म हो गया। हालिया घटनाक्रम के बाद असद देश छोड़कर रूस चले गए हैं। उधर सीरियाई प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली ने कहा कि सरकार विद्रोहियों की ओर हाथ बढ़ाने और अपनी सत्ता को एक नई सरकार को सौंपने के लिए तैयार हैं। जलीली ने एक वीडियो बयान में कहा, 'मैं अपने घर में हूं और मैंने घर नहीं छोड़ा है।'
सीरिया में 13 साल के युद्ध के बाद बशर असद की सरकार जाने से दशकों पुराना राजवंश खत्म हो गया। हालिया घटनाक्रम के बाद असद देश छोड़कर रूस चले गए हैं। उधर सीरियाई प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली ने कहा कि सरकार विद्रोहियों की ओर हाथ बढ़ाने और अपनी सत्ता को एक नई सरकार को सौंपने के लिए तैयार हैं। जलीली ने एक वीडियो बयान में कहा, 'मैं अपने घर में हूं और मैंने घर नहीं छोड़ा है।'