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Hezbollah: हमास के बाद हिज्बुल्ला क्यों है इस्राइल की चिंता? जानें इस आतंकी संगठन को, जो US जैसे देशों में बैन
Thu, 12 Oct 2023 06:03 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 12 Oct 2023 06:03 PM IST
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हिज्बुल्ला का खतरा!
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अमर उजाला
विस्तार
हमास के हमले ने इस्राइल को स्तब्ध कर दिया है। चारों ओर दुश्मनों से घिरे देश ने भले ही हमास का नामों-निशान मिटाने की कसम खाई है, लेकिन उसके सामने और भी मुश्किलें है। दरअसल, हमास के हमले के बाद इस्राइल ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी, जिसमें कई हमास आतंकी ढेर हो गए। इसके बाद लेबनान स्थित आतंकी संगठन हिज्बुल्ला ने भी इस्राइल में रॉकेट हमले किए। इसके साथ ही इसने हमास को खुला समर्थन दिया है, जिससे इस्राइल की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। आइये जानते है कि आखिर इस्राइल-हमास लड़ाई में हिज्बुल्ला की चर्चा क्यों? है क्या हिज्बुल्ला? यह संगठन कहां से चलता है?
आखिर इस्राइल-हमास लड़ाई में हिज्बुल्ला की चर्चा क्यों?
शनिवार को हमास के हमले के बाद इस्राइल के साथ इसकी भयंकर लड़ाई शुरू हो गई। इसी बीच हमास पर हुई कार्रवाई से बौखलाया आतंकी गुट हिज्बुल्ला भी सक्रिय हो गया। लेबनान स्थित संगठन ने इस्राइली इलाकों में मिसाइलें और मोर्टार से हमला किया। लेबनान की तरफ से दागी गईं मिसाइलें माउंट दोव क्षेत्र में आकर गिरीं।
वहीं इस्राइल के सुरक्षा बलों ने भी जवाबी हमला किया। उसने लेबनान में तोप से गोले दागे। इस्राइली सेना ने कहा कि आईडीएफ इस तरह के हमले की संभावना को ध्यान में रखते हुए पहले से ही तैयारी कर रहा था। सैनिक लेबनान सीमा पर मौजूद हैं।
आतंकवादी समूह हिज्बुल्ला ने उत्तरी इस्राइल में लेबनान से मोर्टार हमले की जिम्मेदारी ली है। एक बयान में हिज्बुल्ला ने कहा कि उसने माउंट डोव इलाके में तीन इस्राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
शनिवार को हमास के हमले के बाद इस्राइल के साथ इसकी भयंकर लड़ाई शुरू हो गई। इसी बीच हमास पर हुई कार्रवाई से बौखलाया आतंकी गुट हिज्बुल्ला भी सक्रिय हो गया। लेबनान स्थित संगठन ने इस्राइली इलाकों में मिसाइलें और मोर्टार से हमला किया। लेबनान की तरफ से दागी गईं मिसाइलें माउंट दोव क्षेत्र में आकर गिरीं।
वहीं इस्राइल के सुरक्षा बलों ने भी जवाबी हमला किया। उसने लेबनान में तोप से गोले दागे। इस्राइली सेना ने कहा कि आईडीएफ इस तरह के हमले की संभावना को ध्यान में रखते हुए पहले से ही तैयारी कर रहा था। सैनिक लेबनान सीमा पर मौजूद हैं।
आतंकवादी समूह हिज्बुल्ला ने उत्तरी इस्राइल में लेबनान से मोर्टार हमले की जिम्मेदारी ली है। एक बयान में हिज्बुल्ला ने कहा कि उसने माउंट डोव इलाके में तीन इस्राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
Terrorist
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क्या है हिज्बुल्ला?
हिज्बुल्ला एक आतंकी संगठन है, जो लेबनान की सरजमीं पर मौजूद है। इसे 1975 से 1990 तक चले लेबनान गृहयुद्ध की उपज माना जाता है। 1982 में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इसकी स्थापना की। इसका लक्ष्य ईरान में हुई इस्लामी क्रांति दूसरे देशों में फैलाना और लेबनान में लड़ रही इस्राइली सेना के खिलाफ एक संगठन खड़ा करना था।
अमेरिकी राष्ट्रीय आतंक निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) के मुताबिक, हिज्बुल्ला कई आतंकवादी हमलों में शामिल रहा है, जिसमें अप्रैल 1983 में बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर आत्मघाती ट्रक बम विस्फोट, अक्तूबर 1983 में बेरूत में अमेरिकी मरीन बैरक और सितंबर 1984 में बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर हमला शामिल है। इसके साथ ही 1985 में TWA 847 विमान का अपहरण और 1996 में सऊदी अरब में खोबार टावर्स पर हमला भी इसी द्वारा किया गया था।
हिज्बुल्ला एक आतंकी संगठन है, जो लेबनान की सरजमीं पर मौजूद है। इसे 1975 से 1990 तक चले लेबनान गृहयुद्ध की उपज माना जाता है। 1982 में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इसकी स्थापना की। इसका लक्ष्य ईरान में हुई इस्लामी क्रांति दूसरे देशों में फैलाना और लेबनान में लड़ रही इस्राइली सेना के खिलाफ एक संगठन खड़ा करना था।
अमेरिकी राष्ट्रीय आतंक निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) के मुताबिक, हिज्बुल्ला कई आतंकवादी हमलों में शामिल रहा है, जिसमें अप्रैल 1983 में बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर आत्मघाती ट्रक बम विस्फोट, अक्तूबर 1983 में बेरूत में अमेरिकी मरीन बैरक और सितंबर 1984 में बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर हमला शामिल है। इसके साथ ही 1985 में TWA 847 विमान का अपहरण और 1996 में सऊदी अरब में खोबार टावर्स पर हमला भी इसी द्वारा किया गया था।
सियासी साये में पला आतंकी संगठन
हिज्बुल्ला 1992 से लेबनानी सरकार में शामिल हुआ। 12 जुलाई 2006 को हिज्बुल्ला ने दो इस्राइली सैनिकों का अपहरण कर लिया, जिसके बाद 2006 का युद्ध छिड़ गया। 2006 में हिज्बुल्ला आतंकियों ने इस्राइल की सीमा में घुसपैठ कर पांच सप्ताह का युद्ध लड़ा। इस दौरान उसने लेबनान में 1200 और इस्राइल में 158 हत्याएं की। इस्राइल पर हजारों रॉकेट भी दागे।
वहीं, सऊदी अरब का दावा है कि यमन में भी यह आतंकी संगठन उसके खिलाफ काम कर रहा है। 2005 में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफीक अल हरीरी की हत्या के बाद हिज्बुल्ला के सहयोगी ने सीरिया में वापसी की। इसके बाद राजनीति में उतरा, लेबनान की सरकार को अमेरिका और सऊदी अरब समर्थक बताकर 2008 में राजधानी बेरुत के कुछ हिस्सों पर कब्जा किया। 2018 में हिज्बुल्ला गठबंधन ने संसद में बहुमत हासिल किया। हालांकि, 2022 में उसे हार मिली। अपने कमांडर मुगनियाह की मृत्यु के बाद से समूह के निशाने पर मध्य पूर्व के बाहर मौजूद इस्राइली समर्थक रहे हैं।
तब से यह संगठन अपने सबसे आक्रामक आतंकवादी अभियान में लगा हुआ है। जुलाई 2012 में हिज्बुल्ला ने बुल्गारिया के बर्गास में एक बस पर बम विस्फोट किया, जिसमें पांच इस्राइली पर्यटक और एक बुल्गारियाई की मौत हो गई। कई अन्य साजिशों को विफल कर दिया गया, जिसमें 2014 में पेरू और थाईलैंड में गुर्गों की गिरफ्तारी और 2015 में विस्फोटक भंडार की जब्ती और साइप्रस में एक गुर्गे की गिरफ्तारी शामिल है।
हिज्बुल्ला 1992 से लेबनानी सरकार में शामिल हुआ। 12 जुलाई 2006 को हिज्बुल्ला ने दो इस्राइली सैनिकों का अपहरण कर लिया, जिसके बाद 2006 का युद्ध छिड़ गया। 2006 में हिज्बुल्ला आतंकियों ने इस्राइल की सीमा में घुसपैठ कर पांच सप्ताह का युद्ध लड़ा। इस दौरान उसने लेबनान में 1200 और इस्राइल में 158 हत्याएं की। इस्राइल पर हजारों रॉकेट भी दागे।
वहीं, सऊदी अरब का दावा है कि यमन में भी यह आतंकी संगठन उसके खिलाफ काम कर रहा है। 2005 में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफीक अल हरीरी की हत्या के बाद हिज्बुल्ला के सहयोगी ने सीरिया में वापसी की। इसके बाद राजनीति में उतरा, लेबनान की सरकार को अमेरिका और सऊदी अरब समर्थक बताकर 2008 में राजधानी बेरुत के कुछ हिस्सों पर कब्जा किया। 2018 में हिज्बुल्ला गठबंधन ने संसद में बहुमत हासिल किया। हालांकि, 2022 में उसे हार मिली। अपने कमांडर मुगनियाह की मृत्यु के बाद से समूह के निशाने पर मध्य पूर्व के बाहर मौजूद इस्राइली समर्थक रहे हैं।
तब से यह संगठन अपने सबसे आक्रामक आतंकवादी अभियान में लगा हुआ है। जुलाई 2012 में हिज्बुल्ला ने बुल्गारिया के बर्गास में एक बस पर बम विस्फोट किया, जिसमें पांच इस्राइली पर्यटक और एक बुल्गारियाई की मौत हो गई। कई अन्य साजिशों को विफल कर दिया गया, जिसमें 2014 में पेरू और थाईलैंड में गुर्गों की गिरफ्तारी और 2015 में विस्फोटक भंडार की जब्ती और साइप्रस में एक गुर्गे की गिरफ्तारी शामिल है।
कई देशों में प्रतिबंधित है हिज्बुल्ला
अपने सैन्य कमांडर मुगनियाह की मृत्यु के बाद से हिज्बुल्ला आतंकवादी अभियान में लिप्त है। इसके निशाने पर इस्राइली समर्थक लोग रहे हैं। अमेरिका, सऊदी अरब सहित कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। यूरोपीय संघ ने 22 जुलाई 2013 को हिज्बुल्ला की सैन्य शाखा को एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया। 2021 में इसके मुखिया सैयद हसन नसरुल्ला ने संगठन में एक लाख सदस्य होने का दावा किया।
अपने सैन्य कमांडर मुगनियाह की मृत्यु के बाद से हिज्बुल्ला आतंकवादी अभियान में लिप्त है। इसके निशाने पर इस्राइली समर्थक लोग रहे हैं। अमेरिका, सऊदी अरब सहित कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। यूरोपीय संघ ने 22 जुलाई 2013 को हिज्बुल्ला की सैन्य शाखा को एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया। 2021 में इसके मुखिया सैयद हसन नसरुल्ला ने संगठन में एक लाख सदस्य होने का दावा किया।
इस्राइल-हमास के बीच युद्ध
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हमास के अलावा हिज्बुल्ला इस्राइल के लिए बड़ा खतरा
लेबनान में सक्रिय आतंकी संगठन हिज्बुल्ला अचानक इस्राइल-हमास युद्ध में कूद पड़ा है। उसने भी रविवार को इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमले किए, खुद को फलस्तीनियों के साथ बताया। इससे रक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि हिज्बुल्ला इस्राइल के खिलाफ युद्ध का नया मोर्चा खड़ा कर सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस्राइल को आतंकी संगठन हिज्बुल्ला से सचेत रहना होगा। 2006 की तरह वह उत्तरी इस्राइल में एक नया युद्ध मोर्चा खोल सकता है। उसे इस्राइल के कट्टर दुश्मन ईरान का समर्थन और सहयोग है। ईरान ही उसे और हमास को हथियार और खुफिया मदद देता है।
दरअसल, लेबनान और इस्राइल दोनों एक-दूसरे को दुश्मन देश मानते हैं। दोनों के बीच हुए संघर्ष के बाद 2006 में एक शांति समझौता हुआ, जिसके बाद से ही शांति बनी रही है। मगर हाल के सालों में लेबनान की तरफ से छोटे-मोटे मिसाइल हमले इस्राइल की ओर किए जाते रहे हैं। इस्राइल भी इसका जवाब देता रहा है। अधिकतर हमलों के पीछे हिज्बुल्ला का हाथ होता है, जो लेबनान में काफी ज्यादा सक्रिय है।
लेबनान में सक्रिय आतंकी संगठन हिज्बुल्ला अचानक इस्राइल-हमास युद्ध में कूद पड़ा है। उसने भी रविवार को इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमले किए, खुद को फलस्तीनियों के साथ बताया। इससे रक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि हिज्बुल्ला इस्राइल के खिलाफ युद्ध का नया मोर्चा खड़ा कर सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस्राइल को आतंकी संगठन हिज्बुल्ला से सचेत रहना होगा। 2006 की तरह वह उत्तरी इस्राइल में एक नया युद्ध मोर्चा खोल सकता है। उसे इस्राइल के कट्टर दुश्मन ईरान का समर्थन और सहयोग है। ईरान ही उसे और हमास को हथियार और खुफिया मदद देता है।
दरअसल, लेबनान और इस्राइल दोनों एक-दूसरे को दुश्मन देश मानते हैं। दोनों के बीच हुए संघर्ष के बाद 2006 में एक शांति समझौता हुआ, जिसके बाद से ही शांति बनी रही है। मगर हाल के सालों में लेबनान की तरफ से छोटे-मोटे मिसाइल हमले इस्राइल की ओर किए जाते रहे हैं। इस्राइल भी इसका जवाब देता रहा है। अधिकतर हमलों के पीछे हिज्बुल्ला का हाथ होता है, जो लेबनान में काफी ज्यादा सक्रिय है।