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नेपाल में मानसून शुरू होते ही तेज बारिश, बाढ़ का खतरा बढ़ा
Tue, 23 Jun 2020 08:54 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 23 Jun 2020 08:54 PM IST
सार
- बागमती, कोसी समेत तमाम नदियां उफान पर, काठमांडू घाटी में अलर्ट जारी,
- भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ा, अगले दो दिनों तक तेज बारिश के आसार
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नेपाल बाढ़
- फोटो : For Refernce Only
विस्तार
नेपाल में मानसून के आते ही तमाम इलाकों में बाढ़ का जबरदस्त खतरा पैदा हो गया है। तमाम नदियों का जलस्तर अभी से ही बढ़ने लगा है। इनमें से कई नदियां भारत से सीमाई इलाकों के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
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काठमांडू घाटी में रविवार से हो रही तेज बारिश और आने वाले दो-तीन दिनों तक लगातार बारिश की भविष्यवाणी के बाद बाढ़ के खतरे का अलर्ट जारी कर दिया गया है।
कई रिहाइशी इलाकों में भी बाढ़ का पानी घरों में घुसने का खतरा बढ़ गया है और लोगों को एहतियात बरतते हुए सुरक्षित जगहों पर जाने को कह दिया गया है।
बालकुमारी के मनोहोरा नदी का जलस्तर करीब पांच मीटर बढ़ गया है। उसी तरह घाटी की तमाम बड़ी नदियों में पानी तेजी से बढ़ रहा है। इनमें बागमती, बिष्णुमति, मनोहारा, नक्कू खोला, गोदावरी खोला, हनुमंते नदियां शामिल हैं जहां जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
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जानकारों के मुताबिक, मानसून के एकदम शुरुआती दौर में ही नदियों में पानी का इस तेजी से बढ़ना आने वाले खतरे का संकेत है। उनका कहना है कि इसकी वजह नदियों में फएंका जाने वाला कूड़ा और गंदगी है जिससे तमाम रास्ते जाम हो गए हैं और नदियों का स्वाभाविक बहाव कई जगहों पर रुक गया है।
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उधर भारत की सीमा में आने वाली नारायणी गंडक नदी पर इसका असर दिखने लगा है। नदी का जलस्तर दो दिन तो तेजी से बढ़ा, लेकिन फिर मंगलवार को घट गया। लेकिन आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दो तीन दिनों में अगर पहाड़ों में बारिश लगातार हुई तो जलस्तर बढ़कर तटबंधों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
दरअसल तमाम तटबंध वैसे भी खस्ता हालत में हैं, उनकी मरम्मत काफी वक्त से नहीं हुई है। इससे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमाई इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।