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अंतरराष्ट्रीय अदालत में पाक ने मुंह की खाई, कुलभूषण जाधव की फांसी पर लगी रोक

Wed, 17 Jul 2019 09:18 PM IST
Gaurav Pandey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Gaurav Pandey Updated Wed, 17 Jul 2019 09:18 PM IST
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Hearing of Kulbhushan Jadhav case in International Court of Justice
अंतरराष्ट्रीय अदालत, हेग - फोटो : PTI

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद का विषय बने रहे कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) ने अंतिम फैसला सुना दिया। आईसीजे का फैसला भारत के पक्ष में आया है। अदालत ने जाधव की फांसी पर रोक लगाते हुए कहा कि उन्हें कांसुलर एक्सेस दिया जाए।

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भारत की बड़ी जीत 

अदालत के अध्यक्ष जज अब्दुलकावी अहमद यूसुफ की अगुवाई वाली पीठ ने कुलभूषण सुधीर जाधव को दोषी ठहराये जाने और उन्हें सुनाई गई सजा की प्रभावी समीक्षा करने और उस पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया।
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पीठ ने एक के मुकाबले 15 वोटों से यह व्यवस्था भी दी कि पाकिस्तान ने जाधव की गिरफ्तारी के बाद कंसुलर संपर्क के भारत के अधिकार का उल्लंघन किया। जजों ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत को कुलभूषण जाधव से संवाद करने और उन तक पहुंच के अधिकार से, हिरासत के दौरान उनसे मिलने और उनका कानूनी पक्ष रखने की व्यवस्था करने के अधिकार से वंचित रखा। 
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जज यूसुफ ने व्यवस्था दी कि पाकिस्तान वियना समझौते के तहत जाधव की गिरफ्तारी और उसे हिरासत में रखने के बारे में भारत को सूचित करने के लिए बाध्य था। पीठ ने कहा कि भारत को तीन मार्च, 2016 को जाधव की गिरफ्तारी के बारे में सूचित करने में तीन सप्ताह की देरी हुई और इस तरह समझौते के तहत पाकिस्तान की बाध्यता को तोड़ा गया।

अदालत ने कहा कि भारत ने कई बार कंसुलर एक्सेस का अनुरोध किया जिससे पाकिस्तान ने इनकार कर दिया। उसने कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि पाकिस्तान ने भारत की अपीलों को नहीं माना। अदालत ने कहा कि पाकिस्तान ने इस बात को स्पष्ट नहीं किया कि भारत द्वारा कथित तौर पर किया गया कोई भी गलत काम पाकिस्तान को उसकी बाध्यता के तहत काम पूरा करने से कैसे रोक सकता है।

अदालत ने कहा, जाधव की फांसी की सजा पर तबतक रोक रहेगी जब तक पाकिस्तान प्रभावी तौर पर इस पर पुनर्विचार नहीं करता। अदालत ने कहा कि वियना समझौते को तोड़ते हुए पाकिस्तान ने जाधव तक कांसुलर एक्सेस रोककर भारत के अधिकार का हनन किया है।  
 

-आईसीजे की कानूनी सलाहकार रीमा ओमर ने फैसला पढ़े जाने से पहले ही बता दिया था कि अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है। 
 
 



 

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया 

वहीं, पाकिस्तान ने कहा है कि कुलभूषण जाधव मामले में अब कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगे।  


 

जाधव पर आए फैसले पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के पक्ष में आए फैसले का हम इसका स्वागत करते हैं। अदालत ने 15-1 से भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है।  साथ ही कहा है कि पाकिस्तान ने कई बार विएना समझौते का उल्लंघन किया है।  

आज फैसले को पढ़ते हुए अदालत के अध्यक्ष जज अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने कुलभूषण सुधीर जाधव को दोषी ठहराये जाने और सजा पर फिर से विचार करने का आदेश दिया।

आईसीजे के जज यूसुफ के नेतृत्व में 15 सदस्यीय पीठ ने भारत और पाकिस्तान की मौखिक दलीलों को सुनने के बाद 21 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। मामले की कार्यवाही पूरी होने में दो साल दो महीने का समय लगा।

भारत ने जाधव तक बार-बार कंसुलर एक्सेस नहीं मिलने पर पाकिस्तान द्वारा वियना समझौते के प्रावधानों का जबरदस्त उल्लंघन करने के लिए आठ मई, 2017 को आईसीजे का रुख किया था। 

मौत की सजा मिली है

बता दें कि अप्रैल 2017 में जासूसी और आतंकवाद का आरोप लगाते हुए पाक की एक सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई थी। भारत इस फैसले के साथ आईसीजे के पास गया था। आईसीजे ने जाधव की सजा पर रोक लगा दी थी। 

जानकारी के अनुसार, फैसले को सुनने के लिए अटॉर्नी जनरल के नेतृत्व में पाकिस्तानी टीम नीदरलैंड के हेग पहुंच गई है। टीम में पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल भी शामिल हैं। भारत ने वियना संधि के प्रावधानों का पाकिस्तान द्वारा घोर उल्लंघन किए जाने को लेकर मई 2017 में आईसीजे का रुख किया था। दरअसल, पाक ने जाधव को भारत द्वारा दूतावासीय मदद मुहैया कराने की इजाजत देने से बार-बार इनकार किया था।

सुनवाई पूरी होने में लगा दो साल और दो महीने का वक्त

‘प्रेसीडेंट ऑफ द कोर्ट’ न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ सार्वजनिक सुनवाई के दौरान फैसला पढ़ेंगे। सुनवाई नीदरलैंड के द हेग स्थित पीस पैलेस में बुधवार को भारतीय समयानुसार शाम 6.30 बजे होगी। इस हाई प्रोफाइल मामले में फैसला आने के करीब पांच महीने पहले न्यायाधीश यूसुफ के नेतृत्व में आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ ने भारत और पाकिस्तान की मौखिक दलीलें सुनने के बाद 21 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में दो साल और दो महीने का वक्त लगा।

पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा कि पाकिस्तान ने आईसीजे के समक्ष मुकदमा पूरी तरह से लड़ा। पाक की सरकारी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान ने उनके हवाले से कहा, ‘पाकिस्तान अच्छे फैसले की उम्मीद कर रहा है और वह आईसीजे के फैसले को स्वीकार करेगा।’

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