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11 दिन बाद भी तबाही का कहर: चीन-नेपाल आर्थिक गलियारा तबाह; मलबे से जिंदा निकलीं बुजुर्ग महिला और चीनी नागरिक

Sun, 06 Sep 2026 06:19 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 06 Sep 2026 06:19 AM IST
सार

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन के 11 दिन बाद भी संकट गहरा है। चीन-नेपाल व्यापार का प्रमुख ग्यिरोंग पोर्ट तबाह होने से दोनों देशों के बीच व्यापार और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है, जिससे नेपाल में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर, राहत एवं बचाव अभियान में चमत्कारिक रूप से दो लोगों 60 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ और एक चीनी नागरिक को मलबे व सुरंग से जिंदा बचाया गया।

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Havoc devastation continues even after 11 days China Nepal Economic Corridor destroyed
महिला को निकाला गया बाहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन के 11 दिन बाद भी तबाही का मंजर जारी है। चीन-नेपाल के बीच जमीनी व्यापार का प्रमुख केंद्र ग्यिरोंग पोर्ट और उससे जुड़ी सीमा चौकी पूरी तरह तबाह हो चुकी है। लगातार सामने आ रहीं तस्वीरें इसकी भयावह स्थिति बयां कर रही हैं। चीन ने नेपाल में हुई इस तबाही से हुए नुकसान पर भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन इस आर्थिक गलियारे के ठप होने से नेपाल की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति शृंखला पर असर साफ दिखने लगा है। भारत के जाने-माने भू-रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि इस रास्ते होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप होने से काठमांडो को अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए भारत पर और अधिक निर्भर होना पड़ेगा।

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महंगाई का दिखने लगा असर 
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत ट्रांस-हिमालय कनेक्टिविटी नेटवर्क में चीन ग्यिरोंग क्रॉसिंग को एक रणनीतिक केंद्र मानता है। ग्यिरोंग बंद होने से आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है। इससे चीनी सामानों की कमी हो रही है और नेपाल के घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। यहां दोनों देशों के बीच ट्रकों की आवाजाही, माल की चेकिंग, क्लियरेंस और स्टोरेज के लिए बड़े ड्राई पोर्ट और गोदाम बने थे।
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लाखों टन मलबा साफ करने के बाद ही शुरू हो पाएगा मार्ग 
तबाही के बाद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बहाल करने में अभी काफी समय लगेगा। भारी मालवाहक ट्रैफिक सुरक्षित रूप से फिर से शुरू होने से पहले इंजीनियरों को लाखों टन मलबा साफ करना होगा, ऊंचे पहाड़ी रास्तों को स्थिर करना होगा, हिमस्खलन के कारण ऊपर की ओर बनी झीलों के खतरे को कम करना होगा और बह चुके पुलों का पुनर्निर्माण करना होगा।
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चमत्कार: दो और जिंदगियां बचाई गईं
अब इसे कुदरत का करिश्मा कहें या चमत्कार, नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के 11वें दिन शनिवार को मलबे में दबे एक चार मंजिला मकान से एक बुजुर्ग महिला को जिंदा निकाला गया। परिजनों ने महिला के जीवित मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी और उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर दिया था। वहीं, बचाव दलों ने अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से जुड़ी एक सुरंग से एक चीनी नागरिक को भी सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के अनुसार, नुवाकोट जिले के बिदुर शहर में 60 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ एक चार मंजिला इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर कीचड़ और मलबे के नीचे फंसी हुई थीं।


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अब तक 1,344 की मौत
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आए हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। देश भर में मृतकों का आंकड़ा 1,344 तक पहुंच गया है, जबकि 589 विदेशी नागरिकों सहित लगभग 5,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें भारत के भी 250 से अधिक नागरिक शामिल हैं। तेज धारा देख पहाड़ की ओर भागे 130 लोग, सामने ही बह गया एक साथी... गोरखपुर। पिपराइच निवासी आशुतोष उपाध्याय हाइड्रो पावर में काम कर रहे थे। बचकर किसी तरह पहुंचे हैं। बताया अचानक सभी लोग भागने लगे। नदी की तेज होती धारा देखकर मैं और करीब 130 लोग जान बचाने के लिए पहाड़ की ओर भागे। हम लोग तो बच गए पर एक साथी सामने ही बह गया।

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