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नरमपंथी नेता हसन रूहानी लगातार दूसरी बार जीते चुनाव, बने रहेंगे ईरान के राष्ट्रपति
BBC
Updated Sat, 20 May 2017 03:00 PM IST
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हसन रूहानी दूसरी बार बने ईरान के राष्ट्रपति
- फोटो : Getty
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हसन रूहानी दूसरी बार ईरान के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। सरकारी टेलीविजन ने उन्हें दूसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है।
चुनाव समिति के प्रमुख अली असग़र अहमदी के अनुसार मतगणना पूरी गई है और हसन रूहानी को चार करोड़ वोट मिले हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उनके विरोधी उम्मीदवार एक करोड़ 15 लाख वोट मिले हैं।
रुहानी के विपक्षी के तौर पर चुनाव लड़े 56 साल के रईसी कट्टरपंथी न्यायविद हैं। उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामनेई का क़रीबी माना जाता है। उनके 'कट्टरपंथी' प्रतिद्वंद्वी इब्राहिम रईसी ने मतदान में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। उन्होंने रूहानी के समर्थकों पर वोटिंग बूथों पर सैकड़ों प्रतिबंधित तरीकों से प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप लगाया है।
ईरान में 70 फ़ीसदी मतदान दर्ज़ किया गया था। बता दें कि वोटरों का उत्साह को देखते हुए वोट देने का समय 5 घंटे आगे बढ़ाना पड़ा था। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि मतदान की अवधि 'अनुरोध' और 'उत्साही मतदाताओं की भागेदारी' को देखते हुए बढ़ाई गई थी।
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चुनाव समिति के प्रमुख अली असग़र अहमदी के अनुसार मतगणना पूरी गई है और हसन रूहानी को चार करोड़ वोट मिले हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उनके विरोधी उम्मीदवार एक करोड़ 15 लाख वोट मिले हैं।
रुहानी के विपक्षी के तौर पर चुनाव लड़े 56 साल के रईसी कट्टरपंथी न्यायविद हैं। उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामनेई का क़रीबी माना जाता है। उनके 'कट्टरपंथी' प्रतिद्वंद्वी इब्राहिम रईसी ने मतदान में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। उन्होंने रूहानी के समर्थकों पर वोटिंग बूथों पर सैकड़ों प्रतिबंधित तरीकों से प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप लगाया है।
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ईरान में 70 फ़ीसदी मतदान दर्ज़ किया गया था। बता दें कि वोटरों का उत्साह को देखते हुए वोट देने का समय 5 घंटे आगे बढ़ाना पड़ा था। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि मतदान की अवधि 'अनुरोध' और 'उत्साही मतदाताओं की भागेदारी' को देखते हुए बढ़ाई गई थी।
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विदेशी संबंधों को सुधारने की वकालत के लिए जाने जाते हैं रौहानी
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ग्लासगो कैलेडोनियन यूनिवर्सिटी से पीएचडी डिग्री प्राप्त रूहानी को शब्दशिल्पी कहा जाता है। कहते हैं कि रूहानी कड़वे फैसलों को मीठी चाशनी में डुबोकर लिया करते हैं।
उनके चार साल के शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ईरान का पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौता रहा, जिसके तहत यूरोप और अमरीका समेत संयुक्त राष्ट्र संघ ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया। हालांकि 2015 में पश्चिमी देशों के साथ हुए समझौते से ईरानी समाज की जितनी अपेक्षाएं बढ़ी उतना सकारात्मक असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा।
ईरान में राष्ट्रपति चुनाव फ़्रांसीसी चुनावी प्रणाली की तर्ज़ पर होते हैं। पहले दौर के मतदान में यदि किसी भी एक उम्मीदवार को 50 फीसद से अधिक वोट नहीं मिलते हैं तो दोबारा वोट डाले जाते हैं।
गौरतलब है कि 68 साल के हसन रूहानी सुधार और परिवर्तन का नारा देते हुए 2013 में पहली बार ईरान के 11वें राष्ट्रपति बने थे। चार साल के पहले दौर के बाद बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार यह उनका दूसरा चुनाव था। ईरान में साल 1985 से हर पदस्थ राष्ट्रपति दोबारा निर्वाचित हुए हैं। साल 1985 में ख़ामनेई दोबारा चुने गए थे।
उनके चार साल के शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ईरान का पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौता रहा, जिसके तहत यूरोप और अमरीका समेत संयुक्त राष्ट्र संघ ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया। हालांकि 2015 में पश्चिमी देशों के साथ हुए समझौते से ईरानी समाज की जितनी अपेक्षाएं बढ़ी उतना सकारात्मक असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा।
ईरान में राष्ट्रपति चुनाव फ़्रांसीसी चुनावी प्रणाली की तर्ज़ पर होते हैं। पहले दौर के मतदान में यदि किसी भी एक उम्मीदवार को 50 फीसद से अधिक वोट नहीं मिलते हैं तो दोबारा वोट डाले जाते हैं।
गौरतलब है कि 68 साल के हसन रूहानी सुधार और परिवर्तन का नारा देते हुए 2013 में पहली बार ईरान के 11वें राष्ट्रपति बने थे। चार साल के पहले दौर के बाद बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार यह उनका दूसरा चुनाव था। ईरान में साल 1985 से हर पदस्थ राष्ट्रपति दोबारा निर्वाचित हुए हैं। साल 1985 में ख़ामनेई दोबारा चुने गए थे।