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Harvard University: क्या जिनपिंग के एजेंडे पर काम कर रही हार्वर्ड? US की संसद ने जांच को तेज करने के दिए आदेश
Sun, 03 Aug 2025 05:12 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 03 Aug 2025 05:12 PM IST
सार
अमेरिकी संसद की जांच में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीसीपी से गहरे संबंध रखने के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हार्वर्ड ने सीसीपी से जुड़े संस्थानों के साथ मिलकर उनके अधिकारियों को प्रशिक्षित किया। खासतौर पर शी जिनपिंग की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों में भागीदारी सामने आई है। इस पर कांग्रेस ने 7 अगस्त तक सभी रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है।
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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी
- फोटो : Harvard.edu
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विस्तार
अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था हार्वर्ड यूनिवर्सिटी इन दिनों भारी विवादों में घिर गई है। अमेरिकी कांग्रेस की जांच में यह सामने आया है कि हार्वर्ड ने बीते एक दशक से भी अधिक समय तक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े संगठनों के साथ औपचारिक साझेदारी रखी। इन रिश्तों के जरिए हार्वर्ड पर आरोप है कि वह चीन के भविष्य के नेताओं को प्रशिक्षण देने में मदद कर रहा था।
इस मामले में अमेरिकी सांसदों जॉन मोलनार, टिम वालबर्ग और एलिस स्टेफनिक ने एक पत्र के जरिए आरोप लगाया है कि हार्वर्ड ने चीन की सत्तारूढ़ पार्टी की केंद्रीय संगठन विभाग के साथ मिलकर काम किया, जो 'शी जिनपिंग विचारधारा' के प्रचार और चीनी नेतृत्व के चयन के लिए जिम्मेदार है। खासतौर पर हार्वर्ड के केनेडी स्कूल और चीन के एक सरकारी संस्थान लीडरशिप एकेडमी के बीच लंबे समय से सहयोग जारी था।
अमेरिकी धरती पर विदेशी प्रभाव का खतरा
सूत्रों के अनुसार, चीनी सरकारी संस्थानों के अधिकारी हार्वर्ड में आधिकारिक प्रशिक्षण के लिए भेजे गए थे। व्हिसलब्लोअर की गवाही में यह भी कहा गया कि इन कार्यक्रमों के जरिए चीन को अपने अधिकारियों को अमेरिका में प्रशिक्षित करने का मौका मिला, जो अमेरिकी नीति और समाज पर विदेशी प्रभाव का सीधा खतरा है।
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मानवाधिकार हनन से जुड़े समूहों को प्रशिक्षण का भी खुलासा
यह खुलासे ऐसे समय पर हुए हैं जब हार्वर्ड पहले ही कैंपस में यहूदी विरोधी घटनाओं और विवादित डीईआई (डाइवर्सिटी, इक्वटी, इन्क्लूजन) नीतियों को लेकर जांच का सामना कर रहा है। अप्रैल में भी एक रिपोर्ट में सामने आया था कि हार्वर्ड ने शिनजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प्स (एक सीसीपी अर्धसैनिक संगठन) के अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया था, जिस पर उइगर मुसलमानों के नरसंहार में शामिल होने का आरोप है।
ये भी पढ़ें- पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ ICT में मुकदमा शुरू, अंतरिम सरकार बोली- शेख हसीना सभी अपराधों की जड़
कांग्रेस की चेतावनी और टैक्स छूट खत्म करने की धमकी
कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद ने हार्वर्ड से कहा है कि वह 7 अगस्त तक सीसीपी से जुड़े सभी संबंधों, लेनदेन और साझेदारियों की पूरी जानकारी दे। सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि हार्वर्ड पूरी पारदर्शिता नहीं दिखाता, तो उसकी टैक्स छूट वाली स्थिति को रद्द किया जा सकता है। यह मामला अब सिर्फ नैतिकता या कानून के उल्लंघन का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
ये भी पढ़ें- कामचटका के बाद कुरील द्वीप पर आया शक्तिशाली भूकंप, रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता; सुनामी की चेतावनी
क्या हार्वर्ड चीन के एजेंडे का उपकरण बन गया?
अब सवाल उठ रहा है कि क्या हार्वर्ड जैसी शीर्ष अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने जानबूझकर चीन की अधिनायकवादी सत्ता के हित में काम किया? क्या उसकी स्वतंत्रता और अकादमिक प्रतिष्ठा अब संदेह के घेरे में है? जांच पूरी होने तक यह मामला अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था और विदेश नीति के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना रहेगा।
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इस मामले में अमेरिकी सांसदों जॉन मोलनार, टिम वालबर्ग और एलिस स्टेफनिक ने एक पत्र के जरिए आरोप लगाया है कि हार्वर्ड ने चीन की सत्तारूढ़ पार्टी की केंद्रीय संगठन विभाग के साथ मिलकर काम किया, जो 'शी जिनपिंग विचारधारा' के प्रचार और चीनी नेतृत्व के चयन के लिए जिम्मेदार है। खासतौर पर हार्वर्ड के केनेडी स्कूल और चीन के एक सरकारी संस्थान लीडरशिप एकेडमी के बीच लंबे समय से सहयोग जारी था।
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अमेरिकी धरती पर विदेशी प्रभाव का खतरा
सूत्रों के अनुसार, चीनी सरकारी संस्थानों के अधिकारी हार्वर्ड में आधिकारिक प्रशिक्षण के लिए भेजे गए थे। व्हिसलब्लोअर की गवाही में यह भी कहा गया कि इन कार्यक्रमों के जरिए चीन को अपने अधिकारियों को अमेरिका में प्रशिक्षित करने का मौका मिला, जो अमेरिकी नीति और समाज पर विदेशी प्रभाव का सीधा खतरा है।
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यह खुलासे ऐसे समय पर हुए हैं जब हार्वर्ड पहले ही कैंपस में यहूदी विरोधी घटनाओं और विवादित डीईआई (डाइवर्सिटी, इक्वटी, इन्क्लूजन) नीतियों को लेकर जांच का सामना कर रहा है। अप्रैल में भी एक रिपोर्ट में सामने आया था कि हार्वर्ड ने शिनजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प्स (एक सीसीपी अर्धसैनिक संगठन) के अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया था, जिस पर उइगर मुसलमानों के नरसंहार में शामिल होने का आरोप है।
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कांग्रेस की चेतावनी और टैक्स छूट खत्म करने की धमकी
कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद ने हार्वर्ड से कहा है कि वह 7 अगस्त तक सीसीपी से जुड़े सभी संबंधों, लेनदेन और साझेदारियों की पूरी जानकारी दे। सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि हार्वर्ड पूरी पारदर्शिता नहीं दिखाता, तो उसकी टैक्स छूट वाली स्थिति को रद्द किया जा सकता है। यह मामला अब सिर्फ नैतिकता या कानून के उल्लंघन का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
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क्या हार्वर्ड चीन के एजेंडे का उपकरण बन गया?
अब सवाल उठ रहा है कि क्या हार्वर्ड जैसी शीर्ष अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने जानबूझकर चीन की अधिनायकवादी सत्ता के हित में काम किया? क्या उसकी स्वतंत्रता और अकादमिक प्रतिष्ठा अब संदेह के घेरे में है? जांच पूरी होने तक यह मामला अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था और विदेश नीति के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना रहेगा।