एच-1 बी : ट्रंप के विरोध में उतरीं तकनीकी कंपनियां, एलन मस्क और ब्रेड स्मिथ ने भी आपत्ति जताई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एच-1 बी वीजा समेत विदेशियों को जारी होने वाले काम से जुड़े वीजा साल के अंत तक निलंबित करने के फैसले की अमेरिकी प्रौद्योगिकी दिग्गजों ने तीखी आलोचना की है। ट्रंप के इस फैसले का गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के बाद टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रेड स्मिथ ने भी विरोध किया है।
बता दें कि दिग्गज गूगल कंपनी के सीईओ और भारतीय मूल के सुंदर पिचाई ने ट्वीट किया कि अमेरिका की आर्थिक सफलता में अप्रवासियों का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने देश को तकनीक में वैश्विक रूप से अग्रणी बनाया है। मैं इस घोषणा से निराश हूं।
हम अप्रवासियों के साथ खड़े रहेंगे। पिचाई ने ट्रंप की घोषणा को अमेरिकी आर्थिक संपत्ति को कमजोर करने वाला बताया। माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने कहा, ट्रंप के फैसले का यह खराब समय था, क्योंकि इस संकट के समय में अप्रवासी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने कहा, यह वक्त हमारे देश को वैश्विक प्रतिभा से दूर रखने या अनिश्चितता पैदा करने का नहीं है। उधर, फेसबुक के प्रवक्ता ने भी कहा कि ट्रंप की घोषणा से उच्च प्रशिक्षित प्रतिभाएं अमेरिका नहीं आ सकेंगीए जिससे आर्थिक सुधार में मुश्किलें आएंगी।
बेरोजगारी के चलते लिया फैसला
ट्रंप प्रशासन ने एच-1 बी वीजा के अलावा एच-2 बी, एल और इंटर्न और प्रशिक्षु के लिए जे-वीजा भी खत्म किए हैं। ये वीजाधारक और इनके निर्भर सदस्य 31 दिसंबर 2020 तक अमेरिका नहीं जा पाएंगे। व्हाइट हाउस ने कहा है कि मौजूदा आर्थिक संकट के कारण नौकरियां खोने वाले लाखों अमेरिकियों के लिए यह जरूरी था।
यह प्रतिबंध 24 जून से प्रभावी होंगे। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस कदम से करीब पांच लाख 25 हजार पद खाली होंगे। इससे इतने ही अमेरिका के मूल निवासियों को रोजगार मिल पाएगा।
इन पेशेवरों पर पड़ेगा असर
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से बड़ी संख्या में ऐसे भारतीय आईटी प्रोफेशनल प्रभावित होंगे जिनको अमेरिकी और भारतीय कंपनियों ने 1 अक्तूबर से शुरू होने वाले वित्तवर्ष 2021 के लिए यह वीजा जारी किया है। अब ऐसे पेशेवरों को कम से कम इस साल के अंत तक इंतजार करना होगा। इस फैसले का असर उन पेशेवरों पर भी पड़ेगा जो अपना एच-1 बी वीजा नवीनीकृत कराना चाहते हैं।
इन लोगों पर कोई प्रभाव नहीं
ट्रंप की घोषणा के मुताबिक, इस फैसले का असर अमेरिका से बाहर रह रहे लोगों पर पड़ेगा। कानूनी रूप से अमेरिका में स्थायी रूप से रह रहे लोगों और ऐसे विदेशी नागरिक जो अमेरिकी नागरिकों के स्पाउस या बच्चे हैं, उन पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा अस्थायी श्रम और खाद्य आपूर्ति शृंखला जैसी जरूरी सेवाओं के लिए अमेरिका आने वालों को भी इस प्रतिबंध से छूट रहेगी।
भारतीय होंगे प्रभावित
ट्रंप का फैसला भारतीयों पर सर्वाधिक असर डालेगा, क्योंकि वे एच-2 बी को छोड़कर अन्य वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अमेरिका में करीब चार लाख एच-1 बी और एक लाख एल-1 भारतीय वीजा धारक हैं जो कई टेक और आईटी फर्मों में कार्यरत हैं।
वीजा प्रतिबंध से आईटी कंपनियों की प्रतिभा व आपूर्ति शृंखला प्रभावित होगी। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां गूगल, फेसबुक और अमेजन जैसी अमेरिकी टेक फर्मों के साथ वीजा की सबसे बड़ी लाभार्थी हैं। बता दें कि एच-2 बी वीजा मेक्सिको के प्रवासियों पर लागू होता है।
दुरुपयोग रोकने का निर्देश
ट्रंप ने एच-1 बी वीजा का गलत इस्तेमाल रोकने का भी निर्देश दिया है। अगर कोई वीजा से जुड़े नियमों का पालन नहीं करता है तो अमेरिका का श्रम मंत्रालय कार्रवाई करेगा। हालांकि फूड इंडस्ट्री, मेडिकल और कुछ अन्य क्षेत्रों के लिए वीजा जारी करने को मंजूरी दी जा सकती है।