Nepal inflation: महंगाई से टूट रही है आम लोगों की कमर, सवालों के घेरे में सरकार
नेपाल के सेंट्रल बैंक- नेपाल राष्ट्र बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च के मध्य में एक साल पहले की तुलना में मुद्रास्फीति दर 7.44 फीसदी रही। अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि मुद्रास्फीति की दर पहले भी ऊंची थी। इसलिए यह वृद्धि अत्यधिक है...
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नेपाल में महंगाई पर काबू पाने की सरकार कोशिशें नाकाम रही हैं। पिछले तीन के सामने आए आंकड़ों से यह बात साफ हो गई है। इसके बाद अब अर्थशास्त्री सरकार के अब तक उठाए कदमों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए जिस तरह के ठोस कदमों की जरूरत है, सरकार ने अब तक उस दिशा में पहल नहीं की है।
नेपाल के सेंट्रल बैंक- नेपाल राष्ट्र बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च के मध्य में एक साल पहले की तुलना में मुद्रास्फीति दर 7.44 फीसदी रही। अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि मुद्रास्फीति की दर पहले भी ऊंची थी। इसलिए यह वृद्धि अत्यधिक है। दरअसल, कुछ अर्थशास्त्रियों का तो दावा है कि सरकारी आंकड़ों में पारदर्शिता नहीं है। इसलिए असल महंगाई दर उससे कहीं ज्यादा है, जितना यह सरकारी आंकड़ों में झलकती है।
अखबारों में छपी रिपोर्टों के मुताबिक देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों की यह आम शिकायत है कि कीमत एक बार जहां पहुंच जाती है, वहां से वह फिर कभी वापस आती। इस कारण देश भर में आम लोग बेहद परेशान हैं और बहुत से लोग इसकी वजह अपना उपभोग घटाने में मजबूर हुए हैं। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि महंगाई इसी तरह बेकाबू बनी रही, तो देश के आर्थिक विकास पर उसका बहुत खराब असर होगा।
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल कई बार कह चुके हैं कि महंगाई पर काबू पाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा है कि इसके लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों को जरूरी आदेश दिए गए हैं। लेकिन अखबार काठमांडू पोस्ट से बातचीत करते हुए अर्थशास्त्र के एक जानकार ने कहा- सरकार समस्या की जड़ पर ध्यान नहीं दे पा रही है। सतही कदमों से समस्या दूर नहीं होगी।
सबसे ज्यादा परेशानी खाने-पीने की चीजों की महंगाई से हो रही है। चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में खाद्य और पेय वस्तुओं की कीमतों में 5.64 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अगर सिर्फ आम अनाजों की कीमत पर गौर करें, तो साल भर पहले की तुलना में मध्य मार्च तक इसमें 14.35 फीसदी का इजाफा हो चुका था। इसी तरह फलों की कीमत लगभग आठ फीसदी और मसालों की कीमत 11 फीसदी बढ़ी है। एक साल के अंदर होटलों के किराये में 14 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। परिवहन पर आम खर्च 13 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है।
विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सब्जियों की महंगाई नेपाल में आम मुद्रास्फीति के ऊंचा रहने की एक प्रमुख वजह है। विश्व बैंक ने नेपाल को चेतावनी दी है कि महंगाई की दर ऊंची बने रहने के कारण आम घरों की क्रय शक्ति घटेगी, जिसका असर सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर पर पड़ेगा।
फोरम फॉर प्रोटेक्शन ऑफ कंज्यूमर राइट्स नेपाल नाम की संस्था के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिलसिना ने आरोप लगाया है कि ज्यादातर कमोडिटी एसोसिएशनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भरे-पड़े हैं। अखबार काठमांडू पोस्ट से उन्होंने कहा- ‘सरकार की ज्यादा दिलचस्पी बिचौलियों की भलाई पर है। उपभोक्ता अधिकारों और हितों के प्रति वह असंवेदशील है।’