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Google: यूरोप में गूगल पर जुर्माना क्यों, कहां-कहां जांच के दायरे में यह टेक कंपनी, जानें भारत में क्या आरोप?

Thu, 15 Sep 2022 07:12 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 15 Sep 2022 07:12 PM IST
सार

यह जानना अहम है कि आखिर गूगल जैसी कंपनी यूरोप से लेकर एशिया तक लगातार विवादों में क्यों घिरी है? गूगल पर अब तक क्या-क्या आरोप लगे हैं? इसके अलावा किन-किन देशों में इस कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई हैं और इसे लेकर किस तरह की तैयारी है? क्या भारत में भी गूगल किसी बड़े विवाद में फंसी है? और मामले में अब तक क्या प्रगति हुई है?

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Google Anti Trust Cases and other allegations on Tech Company by EU US South Korea and India explained news
कहां-कहां जांच के दायरे में गूगल। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक गूगल के लिए पिछला एक हफ्ता काफी भारी रहा। बुधवार को ही यूरोपीय संघ की तरफ से गूगल पर लगाए गए 4 अरब डॉलर से ज्यादा के भारी भरकम जुर्माने को यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अदालत ने सही ठहराया। दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया ने भी गूगल पर 5 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है।
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इस बीच यह जानना अहम है कि आखिर गूगल जैसी कंपनी यूरोप से लेकर एशिया तक लगातार विवादों में क्यों घिरी है? गूगल पर अब तक क्या-क्या आरोप लगे हैं? इसके अलावा किन-किन देशों में इस कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई हैं और इसे लेकर किस तरह की तैयारी है? क्या भारत में भी गूगल किसी बड़े विवाद में फंसी है? और मामले में अब तक क्या प्रगति हुई है?
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गूगल क्रोम - फोटो : Istock
गूगल के खिलाफ यूरोप में किन-किन मामलों की जांच हो रही?
गौरतलब है कि गूगल पर जिन मामलों में जुर्माने को बरकरार रखा गया है, वह करीब एक दशक से ज्यादा पुराने हैं। 2010 के करीब गूगल के खिलाफ यूरोपीय संघ ने तीन मामलों की जांच शुरू की थी। इनमें एक मामला गूगल के सर्च इंजन में दिखाए जाने वाले सर्च रिजल्ट यानी नतीजों से जुड़ा है। दूसरा मामला एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म के प्रमोशन और खुद की कुछ ऐप्स और सर्च इंजन को जबरदस्ती प्रमोट करने का है। गूगल के खिलाफ तीसरा मामला उसकी एडसेंस तकनीक से जुड़ा है। आरोप है कि गूगल ने ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग में कुछ खास वर्गों को प्राथमिकता दी, जिससे बाकी वर्गों का भारी नुकसान हुआ। इन तीनों ही मामलों में यूरोपीय संघ गूगल और उसकी पैरेंट कंपनी एल्फाबेट पर जुर्माना लगा चुका है। 

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गूगल - फोटो : पेक्सेल्स
अभी किस मामले पर बरकरार रहा है जुर्माना?
गूगल पर अभी जिस मामले में जुर्माना बरकरार रखा गया है, वह कंपनी की एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। आरोप है कि जब गूगल द्वारा निर्मित एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म अपने शुरुआती चरणों में ही था, तब कंपनी ने बाजार में अपनी ताकतवर स्थिति का इस्तेमाल करते हुए यूरोप के प्रतियोगिता संबंधी कानूनों का उल्लंघन किया। 

शिकायत थी कि गूगल ने एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले फोन निर्माताओं से कॉन्ट्रैक्ट किया था कि अगर उन्हें मोबाइल पर 'प्ले स्टोर' की सुविधा का फायदा लेना है तो उन्हें उपभोक्ताओं को गूगल की एप्स का पूरा सुइट पहले से ही मोबाइल में देना होगा, यानी गूगल एप्स का जत्था पहले से ही मोबाइल में प्रीइंस्टाल्ड रहेगा। इनमें क्रोम से लेकर कई अन्य एप शामिल करने का आरोप लगाया गया। गूगल पर कथित तौर पर मोबाइल निर्माताओं से इन एप्स को प्राथमिकता से डिवाइस पर रखने का दबाव बनाने का भी आरोप लगा। 
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गूगल - फोटो : blog.google
मामले में गूगल पर कितना जुर्माना लगा?
यूरोपीय संघ ने इस मामले में 2018 में गूगल पर 4.3 अरब यूरो का जुर्माना लगाया था। हालांकि, ईयू के इस फैसले के खिलाफ गूगल ने केस दायर किया। इसी मामले में यूरोपीय संघ की जनरल कोर्ट ने जुर्माने को बरकरार रखा। हालांकि, जुर्माने को घटाकर 4.125 अरब डॉलर कर दिया। 

गूगल ने कहा है कि वह इस फैसले से निराश है। कंपनी का तर्क है कि कुछ इसी तरह एपल भी अपने डिवाइस में सिर्फ सफारी ब्राउजर को प्रीइंस्टाल कर के उपभोक्ताओं तक पहुंचाता है और अपने एप्स को प्राथमिकता देने का काम करता है। गूगल का कहना है कि एंड्रॉयड मोबाइल पर प्रतियोगी एप्स को डाउनलोड करना सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर है और उपभोक्ताओं पर गूगल के एप्स के इस्तेमाल का बिल्कुल दबाव नहीं बनाया गया। 

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गूगल - फोटो : google
यूरोप के अलावा गूगल के खिलाफ और कहां-कहां शिकायतें
यूरोप के बाद गूगल के खिलाफ कुछ और देशों में भी शिकायतें दर्ज की गईं। 

1. अमेरिका
अमेरिका का न्याय विभाग गूगल के सर्च इंजन और ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग में एकाधिकार के आरोपों की जांच कर रहा है। इसके अलावा 10 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स ने ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग में तो 38 राज्यों ने सर्च में एकाधिकार के आरोपों की जांच शुरू की है। इतना ही नहीं गूगल के खिलाफ अमेरिका में एप पेमेंट सेवा में एकाधिकार स्थापित करने के आरोप भी लगे हैं। 

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गूगल सर्च - फोटो : Social media
2. दक्षिण कोरिया 
कंपनी पर दक्षिण कोरिया में भी एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल से जुड़ी जांच जारी है। मामले में कोरिया के व्यापार आयोग ने गूगल पर 2021 में 17.7 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया। गूगल ने इसके खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है।

दक्षिण कोरिया में हाल ही में गूगल पर एक और मामले में जुर्माना लगा है। हालांकि, यह मामला यूजर्स की निजी जानकारी बिना उनकी मर्जी से लेने के आरोपों से जुड़ा है। कंपनी को इसके लिए 5 करोड़ डॉलर चुकाने होंगे। इस मामले में गूगल के अलावा फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा पर भी जुर्माना लगाया गया है। 

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गूगल - फोटो : source
गूगल के खिलाफ एंटी-ट्रस्ट मामले की जांच शुरू करने वाला भारत तीसरा देश
गूगल के खिलाफ जांच शुरू करने वाला तीसरा देश है भारत। कॉम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने 2019 में ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ बंडल एप्स मुहैया कराने के मामले में गूगल की जांच शुरू की। 2021 में सीसीआई की जांच में सामने आया कि गूगल ने मोबाइल एप मार्केट में वर्चस्व बनाने के लिए प्रतियोगिता को खत्म करने का प्रयास किया और अपनी एप्स को बढ़ावा दिया। हालांकि, मामले में सीसीआई की तरफ से फैसला आना अभी बाकी है। 

सीसीआई ने नवंबर 2020 में भी गूगल के खिलाफ एक और जांच शुरू की थी। यह जांच मोबाइल पेमेंट सिस्टम (गूगल पे) में एकाधिकार स्थापित कर प्रतियोगिता को खत्म करने के आरोपों पर थी। इस मामले में भी आयोग की जांच जारी है।
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