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Google AI chatbard: जानिए उस सवाल का सही जवाब, जिसकी वजह से गूगल को हुआ 120 बिलियन डॉलर का नुकसान
Thu, 09 Feb 2023 12:36 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 09 Feb 2023 12:36 PM IST
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड गूगल चैटबॉट बार्ड (Bard) के एक गलत जवाब ने गूगल को 120 बिलियन डॉलर का नुकसान करा दिया। गलती पकड़े जाने के बाद से गूगल की मार्केट वैल्यू लगातार घट रही है। बुधवार को गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट अपने नीचले बिंदु तक पहुंच गया।मंगलवार को अल्फाबेट के एक शेयर का दाम 106.77 डॉलर था, जो बुधवार को घटकर 98.08 डॉलर हो गया। इसमें करीब 8.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। यह अक्टूबर 2022 के बाद से अल्फाबेट के मूल्य में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। इसके पहले जब कंपनी ने बिक्री, लाभ और विकास में बड़ी मंदी का खुलासा किया था, तब एक दिन में गूगल के शेयर्स में नौ प्रतिशत की गिरावट हुई थी।
खैर, अब सवाल उठ रहा है कि आखिर वो कौन सा सवाल था, जिसका गलत जवाब देने पर गूगल को इतना भारी नुकसान उठाना पड़ा? उस सवाल का सही जवाब क्या है? किसने गूगल एआई की इस गलती को पकड़ा? आइए समझते हैं...
जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल इस हफ्ते गूगल ने अपना नया एआई चैटबॉट बार्ड (Bard) लॉन्च किया है। गूगल ने इसका एक प्रमोशनल वीडियो लॉन्च किया था। इसमें (Bard) से सवाल पूछा गया, 'नौ साल के बच्चे को जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) की नई खोज के बारे में क्या बताना चाहिए?'
इसपर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड चैटबॉट Bard ने तीन बिंदुओं में जवाब दिया।
1. 2023 में JWST ने कई आकाशगंगाओं को चिन्हित किया और उन्हें 'ग्रीन पीस' नाम दिया गया। ये नाम इसलिए दिया गया क्योंकि, वो (आकाशगंगा) काफी छोटे, गोलाकार और हरे रंग के थे। बिल्कुल मटर की तरह।
2. टेलीस्कोप ने 13 बिलियन पुराने गैलेक्सी की तस्वीर खींची।
3. जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का इस्तेमाल मिल्की वे के बाहर के ग्रह की पहली तस्वीर लेने में किया गया था।
बार्ड का तीसरा पॉइंट गलत निकला। इसे रॉयटर्स ने पकड़ा। रॉयटर्स ने जैसे ही इसका खुलासा किया, गूगल की मार्केट वैल्यू घटने लगी। लोगों ने गूगल के एआई चैटबॉट पर सवाल खड़े करने लगे।
दरअसल इस हफ्ते गूगल ने अपना नया एआई चैटबॉट बार्ड (Bard) लॉन्च किया है। गूगल ने इसका एक प्रमोशनल वीडियो लॉन्च किया था। इसमें (Bard) से सवाल पूछा गया, 'नौ साल के बच्चे को जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) की नई खोज के बारे में क्या बताना चाहिए?'
इसपर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड चैटबॉट Bard ने तीन बिंदुओं में जवाब दिया।
1. 2023 में JWST ने कई आकाशगंगाओं को चिन्हित किया और उन्हें 'ग्रीन पीस' नाम दिया गया। ये नाम इसलिए दिया गया क्योंकि, वो (आकाशगंगा) काफी छोटे, गोलाकार और हरे रंग के थे। बिल्कुल मटर की तरह।
2. टेलीस्कोप ने 13 बिलियन पुराने गैलेक्सी की तस्वीर खींची।
3. जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का इस्तेमाल मिल्की वे के बाहर के ग्रह की पहली तस्वीर लेने में किया गया था।
बार्ड का तीसरा पॉइंट गलत निकला। इसे रॉयटर्स ने पकड़ा। रॉयटर्स ने जैसे ही इसका खुलासा किया, गूगल की मार्केट वैल्यू घटने लगी। लोगों ने गूगल के एआई चैटबॉट पर सवाल खड़े करने लगे।
क्या है सही जवाब?
रॉयटर्स ने नासा का हवाला दिया। बताया कि साल 2004 में यूरिपयन एडवांस टेलीस्कोप ने स्पेस के एक्सोप्लैनेट्स सदर्न ऑब्जर्वेटरी के सोलर सिस्टम के बाहर के ग्रहों की फोटोज ली थी। एक्सोप्लैनेट को 2M1207b कहा जाता है। यह बृहस्पति ग्रह से लगभग पांच गुना ज्यादा बड़ा है और पृथ्वी से लगभग 170 प्रकाश वर्ष दूरी पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम द्वारा उत्पन्न गलतियों को आसानी से नहीं पकड़ा जा सकता है।
रॉयटर्स ने नासा का हवाला दिया। बताया कि साल 2004 में यूरिपयन एडवांस टेलीस्कोप ने स्पेस के एक्सोप्लैनेट्स सदर्न ऑब्जर्वेटरी के सोलर सिस्टम के बाहर के ग्रहों की फोटोज ली थी। एक्सोप्लैनेट को 2M1207b कहा जाता है। यह बृहस्पति ग्रह से लगभग पांच गुना ज्यादा बड़ा है और पृथ्वी से लगभग 170 प्रकाश वर्ष दूरी पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम द्वारा उत्पन्न गलतियों को आसानी से नहीं पकड़ा जा सकता है।
क्या है एआई चैटबॉट?
आजकल एआई चैटबॉट का नाम भी खूब लिया जा रहा है। ओपनएआई के एआई चैटबॉट ChatGPT के बाद गूगल ने भी अपने एआई चैटबॉट BARD की घोषणा कर दी है। चैटबॉट्स शब्द का अर्थ है, चैट+बॉट। चैट का मतलब होता है बातचीत और बॉट का मतलब है रोबोट। दरअसल, एआई चैटबॉट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐसे टूल या रोबोट होते हैं जिनसे लोग चैट कर सकते हैं। यानी आप इनको सवाल लिखकर पूछते हैं और यह जवाब भी लिखित रूप में ही देते हैं।
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया पर किसी से चैट कर रहे हों। यहां फर्क इतना है कि जवाब एआई वाला सॉफ्टवेयर या एप देता है। इसे आसान भाषा में समझें तो कंपनियां किसी एप को इतना ज्यादा डाटा और जानकारियों से लैस कर देती हैं, जो कि उन्हें हम सवाल का जवाब देने में मदद करते हैं। यानी जो भी जानकारी आप इन चैटबॉट से मांगते हैं वो पहले से इसमें डाली जाती हैं।
आजकल एआई चैटबॉट का नाम भी खूब लिया जा रहा है। ओपनएआई के एआई चैटबॉट ChatGPT के बाद गूगल ने भी अपने एआई चैटबॉट BARD की घोषणा कर दी है। चैटबॉट्स शब्द का अर्थ है, चैट+बॉट। चैट का मतलब होता है बातचीत और बॉट का मतलब है रोबोट। दरअसल, एआई चैटबॉट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐसे टूल या रोबोट होते हैं जिनसे लोग चैट कर सकते हैं। यानी आप इनको सवाल लिखकर पूछते हैं और यह जवाब भी लिखित रूप में ही देते हैं।
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया पर किसी से चैट कर रहे हों। यहां फर्क इतना है कि जवाब एआई वाला सॉफ्टवेयर या एप देता है। इसे आसान भाषा में समझें तो कंपनियां किसी एप को इतना ज्यादा डाटा और जानकारियों से लैस कर देती हैं, जो कि उन्हें हम सवाल का जवाब देने में मदद करते हैं। यानी जो भी जानकारी आप इन चैटबॉट से मांगते हैं वो पहले से इसमें डाली जाती हैं।
हिंदी में बार्ड का क्या मतलब है?
Bard का मतलब है ‘वह व्यक्ति जो शायरी या कविता लिख सकता हो यानी कवि हो’। बार्ड का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो वीरों और उनके कामों पर छंदों की रचना और पाठ करने में कुशल होता है। गूगल ने अपने ग्राहकों के सवालों का सटीक जवाब देने के लिए बार्ड को विकसित किया है इस लिए इसे नाम दिया गया है बार्ड यानी कवि। अब गूगल का यह Bard सीधे-सीधे ओपनएआई की ओर से विकसित चैटजीपीटी को टक्कर देगा। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक ब्लॉग पोस्ट में इस परियोजना की घोषणा की, जिसमें बार्ड को प्रायोगिक संवादी AI सेवा बताया गया है यह उपयोगकर्ताओं के प्रश्नों का उत्तर देगा और उनसे बातचीत करेगा।
Bard का मतलब है ‘वह व्यक्ति जो शायरी या कविता लिख सकता हो यानी कवि हो’। बार्ड का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो वीरों और उनके कामों पर छंदों की रचना और पाठ करने में कुशल होता है। गूगल ने अपने ग्राहकों के सवालों का सटीक जवाब देने के लिए बार्ड को विकसित किया है इस लिए इसे नाम दिया गया है बार्ड यानी कवि। अब गूगल का यह Bard सीधे-सीधे ओपनएआई की ओर से विकसित चैटजीपीटी को टक्कर देगा। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक ब्लॉग पोस्ट में इस परियोजना की घोषणा की, जिसमें बार्ड को प्रायोगिक संवादी AI सेवा बताया गया है यह उपयोगकर्ताओं के प्रश्नों का उत्तर देगा और उनसे बातचीत करेगा।
क्या माइक्रोसॉफ्ट-ओपनएआई जैसा है गूगल-एंथ्रोपिक का संबंध?
इस सवाल का जवाब है हां। गूगल और एंथ्रोपिक की साझेदारी लगभग उसी तरह की है जो माइक्रोसॉफ्ट और चैटजीपीटी के निर्माता ओपनएआई के बीच है। जहां एक ओर ओपनएआई अपनी रिसर्च विशेषज्ञता मुहैया करा रहा है तो दूसरी ओर माइक्रोसॉफ्ट चैटजीपीटी के विकास के लिए अरबों के डॉलर के निवेश के साथ ओपनएआई को अपने विशाल क्लाउड प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध करा रहा है। ये क्लाउड सुविधाएं एआई आधारित स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। गूगल की ओर से एंथ्रोपिक में निवेश की इस खबर से कुछ हफ्तों पहले ही माइक्रोसॉफ्ट ने ओपनएआई में 10 अरब डॉलर के निवेश की बात कही थी।
इस सवाल का जवाब है हां। गूगल और एंथ्रोपिक की साझेदारी लगभग उसी तरह की है जो माइक्रोसॉफ्ट और चैटजीपीटी के निर्माता ओपनएआई के बीच है। जहां एक ओर ओपनएआई अपनी रिसर्च विशेषज्ञता मुहैया करा रहा है तो दूसरी ओर माइक्रोसॉफ्ट चैटजीपीटी के विकास के लिए अरबों के डॉलर के निवेश के साथ ओपनएआई को अपने विशाल क्लाउड प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध करा रहा है। ये क्लाउड सुविधाएं एआई आधारित स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। गूगल की ओर से एंथ्रोपिक में निवेश की इस खबर से कुछ हफ्तों पहले ही माइक्रोसॉफ्ट ने ओपनएआई में 10 अरब डॉलर के निवेश की बात कही थी।