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रिपोर्ट: जल-जंगल-जमीन बचाने वालों की आवाजें खामोश, 14 वर्षों में 2375 पर्यावरण रक्षकों की हत्या या गुमशुदगी
Fri, 02 Oct 2026 04:31 AM IST
देवेश त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, लंदन
अमर उजाला नेटवर्क, लंदन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 02 Oct 2026 04:31 AM IST
सार
ग्लोबल विटनेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में कम से कम 124 भूमि और पर्यावरण रक्षकों की हत्या हुई। इनमें करीब 85 प्रतिशत मामले लैटिन अमेरिका के थे। कोलंबिया में 39 और ब्राजील में 26 हत्याएं दर्ज की गईं। 2012 से 2025 के बीच ऐसे 2375 लोगों की हत्या या गुमशुदगी के मामले सामने आए।
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पर्यावरण रक्षकों की जान पर खतरा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठाना दुनिया के कई हिस्सों में लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। वर्ष 2025 में कम से कम 124 भूमि और पर्यावरण रक्षकों की हत्या कर दी गई। इनमें बड़ी संख्या छोटे किसानों, आदिवासी समुदायों और अन्य स्थानीय समूहों से जुड़े लोगों की थी।
नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 से 2025 के बीच दुनिया में पर्यावरण और भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कम से कम 2,375 लोगों की हत्या या गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए हैं। ग्लोबल विटनेस की रिपोर्ट कलेक्टिव पावर : द स्ट्रगल फॉर प्रोटेक्शन फॉर लैंड एंड एनवायरनमेंटल डिफेंडर्स के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में 124 पर्यावरण और भूमि रक्षकों की हत्या हुई। इनमें करीब 85 फीसदी मामले लैटिन अमेरिका में दर्ज किए गए।
भारत में हिंसा का स्वरूप आपराधिक मुकदमे, धमकी
भारत में 2025 के दौरान दो पर्यावरण रक्षकों की हत्या दर्ज की गई। संख्या के लिहाज से यह आंकड़ा छोटा है, लेकिन यहां हिंसा का स्वरूप केवल हत्या तक सीमित नहीं है। आपराधिक मुकदमे, धमकियां और कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से बदनाम करने के अभियान भी दबाव के प्रमुख तरीके बन रहे हैं।
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ब्राजील और कोलंबिया में हुई सबसे अधिक हत्याएं
2012 से अब तक हत्या या गुमशुदगी के 2,375 मामले सामने आ चुके हैं। कोलंबिया में 39 और ब्राजील में 26 पर्यावरण रक्षक मारे गए। दोनों देशों के मामले मिलाकर वैश्विक कुल का आधे से अधिक हैं। कोलंबिया लगातार चौथे वर्ष सबसे अधिक हत्याओं वाला देश रहा। वहां मारे गए लोगों में करीब आधे स्वदेशी समुदायों से जुड़े थे।
2025 में ब्राजील में हत्याओं की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुने से अधिक रही। होंडुरास 12, मैक्सिको में 10 और ग्वाटेमाला में आठ हत्याएं दर्ज की गईं। पेरू में चार, इक्वाडोर और निकारागुआ में तीन-तीन तथा तंजानिया में दो मामले सामने आए।
एशिया में फिलीपीन सबसे अधिक प्रभावित
एशिया में फिलीपीन सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 12 पर्यावरण और भूमि रक्षकों की हत्या दर्ज की गई। यह लगातार 13वां वर्ष है जब फिलीपीन एशिया में पर्यावरण रक्षकों के लिए सबसे घातक देश रहा। देश में मारे गए पांच रक्षकों के मामलों में सेना की संभावित भूमिका का भी रिपोर्ट में उल्लेख है।
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नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 से 2025 के बीच दुनिया में पर्यावरण और भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कम से कम 2,375 लोगों की हत्या या गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए हैं। ग्लोबल विटनेस की रिपोर्ट कलेक्टिव पावर : द स्ट्रगल फॉर प्रोटेक्शन फॉर लैंड एंड एनवायरनमेंटल डिफेंडर्स के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में 124 पर्यावरण और भूमि रक्षकों की हत्या हुई। इनमें करीब 85 फीसदी मामले लैटिन अमेरिका में दर्ज किए गए।
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भारत में हिंसा का स्वरूप आपराधिक मुकदमे, धमकी
भारत में 2025 के दौरान दो पर्यावरण रक्षकों की हत्या दर्ज की गई। संख्या के लिहाज से यह आंकड़ा छोटा है, लेकिन यहां हिंसा का स्वरूप केवल हत्या तक सीमित नहीं है। आपराधिक मुकदमे, धमकियां और कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से बदनाम करने के अभियान भी दबाव के प्रमुख तरीके बन रहे हैं।
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ब्राजील और कोलंबिया में हुई सबसे अधिक हत्याएं
2012 से अब तक हत्या या गुमशुदगी के 2,375 मामले सामने आ चुके हैं। कोलंबिया में 39 और ब्राजील में 26 पर्यावरण रक्षक मारे गए। दोनों देशों के मामले मिलाकर वैश्विक कुल का आधे से अधिक हैं। कोलंबिया लगातार चौथे वर्ष सबसे अधिक हत्याओं वाला देश रहा। वहां मारे गए लोगों में करीब आधे स्वदेशी समुदायों से जुड़े थे।
2025 में ब्राजील में हत्याओं की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुने से अधिक रही। होंडुरास 12, मैक्सिको में 10 और ग्वाटेमाला में आठ हत्याएं दर्ज की गईं। पेरू में चार, इक्वाडोर और निकारागुआ में तीन-तीन तथा तंजानिया में दो मामले सामने आए।
एशिया में फिलीपीन सबसे अधिक प्रभावित
एशिया में फिलीपीन सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 12 पर्यावरण और भूमि रक्षकों की हत्या दर्ज की गई। यह लगातार 13वां वर्ष है जब फिलीपीन एशिया में पर्यावरण रक्षकों के लिए सबसे घातक देश रहा। देश में मारे गए पांच रक्षकों के मामलों में सेना की संभावित भूमिका का भी रिपोर्ट में उल्लेख है।