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इंग्लैंड: अमेरिकी एयरबेस पर सुरक्षा में चूक मामले में ब्रिटिश-ईरानी नागरिक गिरफ्तार, आतंकवादी साजिश का शक
Fri, 02 Oct 2026 01:11 AM IST
देवेश त्रिपाठी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 02 Oct 2026 01:11 AM IST
सार
इंग्लैंड में अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई सुरक्षा घटना की जांच में ब्रिटिश पुलिस ने ब्रिटेन और ईरान की दोहरी नागरिकता वाले 27 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने लंदन में दो ठिकानों की तलाशी भी ली। इससे पहले मामले में पांच ब्रिटिश नागरिक गिरफ्तार हुए थे, जिन्हें बाद में सख्त शर्तों पर जमानत मिली।
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ब्रिटेन ने ईरान की भूमिका के संकेत दिए
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
इंग्लैंड में अमेरिका द्वारा संचालित एक एयरबेस के पास हुई सुरक्षा घटना की जांच के सिलसिले में ब्रिटिश पुलिस ने ब्रिटेन और ईरान की दोहरी नागरिकता रखने वाले 27 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उस पर आतंकवादी हमले की साजिश रचने के संदेह में कार्रवाई की है।
पुलिस के अनुसार, व्यक्ति को गुरुवार को लंदन में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद ब्रिटेन की राजधानी में दो ठिकानों की तलाशी ली गई। यह मामला रॉयल एयर फोर्स यानी आरएएफ फेयरफोर्ड में सप्ताहांत के दौरान हुई सुरक्षा घटना से जुड़ा है। इस एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने ईरान पर हमले के लिए किया है।
पहले गिरफ्तार किए गए पांच लोग हुए रिहा
रविवार को इस मामले में लंदन के रहने वाले 20 साल की उम्र के पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। आतंकवाद रोधी पुलिस ने बताया कि 26 वर्षीय एक अन्य ब्रिटिश नागरिक से भी चेतावनी के तहत पूछताछ की गई है।
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मेट्रोपॉलिटन पुलिस की आतंकवाद रोधी इकाई की वरिष्ठ राष्ट्रीय समन्वयक विकी इवांस ने कहा, "जैसा कि हमने स्पष्ट किया है, हम सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिसमें किसी विदेशी राज्य की संभावित संलिप्तता भी शामिल है।" उन्होंने कहा, "मैं जनता को उनके लगातार समर्थन और धैर्य के लिए धन्यवाद देना चाहती हूं, क्योंकि हम इस जांच को आगे बढ़ा रहे हैं।"
ब्रिटिश पीएम ने ईरान की भूमिका का संकेत दिया
इस मामले में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बुधवार को कहा कि ब्रिटेन का मानना है कि दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के एक गांव में आरएएफ एयरबेस के पास हुई घटना में ईरान की भूमिका रही है। इस मामले की जांच देश की आतंकवाद रोधी पुलिस कर रही है।
रविवार को आरएएफ फेयरफोर्ड के पास व्हेलफोर्ड गांव में पुलिस को सूचना मिलने के बाद 20 साल की उम्र के पांच ब्रिटिश नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। आरएएफ फेयरफोर्ड में बड़ी संख्या में अमेरिकी वायुसेना के कर्मी और संचालन मौजूद हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संदिग्धों को जमानत दिए जाने पर सवाल उठाया था। बर्नहम ने पत्रकारों से कहा, "वास्तव में इस बात के मजबूत संकेत हैं कि ईरान की इसमें भूमिका थी।"
उन्होंने कहा, "हालांकि, यह अब भी एक जटिल और बेहद गंभीर पुलिस जांच है। इसलिए मैं इस समय इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। मैंने सोमवार को कैबिनेट ऑफिस ब्रीफिंग रूम ए यानी कोबरा की बैठक की अध्यक्षता की थी। हम यह पुष्टि होने का इंतजार कर रहे थे कि हम क्या कह सकते हैं, लेकिन अब हम यह पुष्टि कर सकते हैं कि हमारा मानना है कि ईरान की इसमें भूमिका थी।"
ईरान ने आरोपों से किया इनकार
ईरान पहले ही इस घटना में किसी भी तरह की भूमिका से स्पष्ट रूप से इनकार कर चुका है। लंदन स्थित ईरानी दूतावास ने इसे "ईरानोफोबिया" करार दिया था। पांच संदिग्धों को जमानत दिए जाने के सवाल पर बर्नहम ने कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि किसी व्यक्ति के "रिहा" होने का मतलब सामान्य तौर पर रिहा होना नहीं है।
उन्होंने कहा कि संदिग्धों पर जमानत की बेहद सख्त शर्तें लागू हैं। उन्होंने कहा, "अधिकारी इस मामले पर बेहद कड़ी निगरानी और निकट नियंत्रण रख रहे हैं और मैं आपको इसका भरोसा दिला सकता हूं।"
एक संदिग्ध ने खुद अधिकारियों से संपर्क किया था
द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों में से एक ने घटना से करीब एक घंटे पहले खुद अधिकारियों से संपर्क किया था। ब्रिटेन की आतंकवाद रोधी पुलिस ने मंगलवार को बताया था कि एयरबेस के पास रोके गए वैन से कोई विस्फोटक उपकरण नहीं मिला। हालांकि, वहां से कुछ मात्रा में पेट्रोल बरामद किया गया था।
आरएएफ फेयरफोर्ड से ईरान पर अमेरिकी हमले
आरएएफ फेयरफोर्ड का हाल के महीनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई हमले शुरू करने के लिए इस्तेमाल किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि यह घटना "स्पष्ट रूप से किसी विदेशी पक्ष के हाथ" से जुड़ी है। हालांकि, उन्होंने इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी थी।
ग्लॉस्टरशायर में हुई यह घटना जुलाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की ओर से "ब्रिटिश राजशाही शासन" को लेकर दी गई परोक्ष धमकियों के बाद सामने आई है।
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पुलिस के अनुसार, व्यक्ति को गुरुवार को लंदन में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद ब्रिटेन की राजधानी में दो ठिकानों की तलाशी ली गई। यह मामला रॉयल एयर फोर्स यानी आरएएफ फेयरफोर्ड में सप्ताहांत के दौरान हुई सुरक्षा घटना से जुड़ा है। इस एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने ईरान पर हमले के लिए किया है।
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पहले गिरफ्तार किए गए पांच लोग हुए रिहा
रविवार को इस मामले में लंदन के रहने वाले 20 साल की उम्र के पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। आतंकवाद रोधी पुलिस ने बताया कि 26 वर्षीय एक अन्य ब्रिटिश नागरिक से भी चेतावनी के तहत पूछताछ की गई है।
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मेट्रोपॉलिटन पुलिस की आतंकवाद रोधी इकाई की वरिष्ठ राष्ट्रीय समन्वयक विकी इवांस ने कहा, "जैसा कि हमने स्पष्ट किया है, हम सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिसमें किसी विदेशी राज्य की संभावित संलिप्तता भी शामिल है।" उन्होंने कहा, "मैं जनता को उनके लगातार समर्थन और धैर्य के लिए धन्यवाद देना चाहती हूं, क्योंकि हम इस जांच को आगे बढ़ा रहे हैं।"
ब्रिटिश पीएम ने ईरान की भूमिका का संकेत दिया
इस मामले में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बुधवार को कहा कि ब्रिटेन का मानना है कि दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के एक गांव में आरएएफ एयरबेस के पास हुई घटना में ईरान की भूमिका रही है। इस मामले की जांच देश की आतंकवाद रोधी पुलिस कर रही है।
रविवार को आरएएफ फेयरफोर्ड के पास व्हेलफोर्ड गांव में पुलिस को सूचना मिलने के बाद 20 साल की उम्र के पांच ब्रिटिश नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। आरएएफ फेयरफोर्ड में बड़ी संख्या में अमेरिकी वायुसेना के कर्मी और संचालन मौजूद हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संदिग्धों को जमानत दिए जाने पर सवाल उठाया था। बर्नहम ने पत्रकारों से कहा, "वास्तव में इस बात के मजबूत संकेत हैं कि ईरान की इसमें भूमिका थी।"
उन्होंने कहा, "हालांकि, यह अब भी एक जटिल और बेहद गंभीर पुलिस जांच है। इसलिए मैं इस समय इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। मैंने सोमवार को कैबिनेट ऑफिस ब्रीफिंग रूम ए यानी कोबरा की बैठक की अध्यक्षता की थी। हम यह पुष्टि होने का इंतजार कर रहे थे कि हम क्या कह सकते हैं, लेकिन अब हम यह पुष्टि कर सकते हैं कि हमारा मानना है कि ईरान की इसमें भूमिका थी।"
ईरान ने आरोपों से किया इनकार
ईरान पहले ही इस घटना में किसी भी तरह की भूमिका से स्पष्ट रूप से इनकार कर चुका है। लंदन स्थित ईरानी दूतावास ने इसे "ईरानोफोबिया" करार दिया था। पांच संदिग्धों को जमानत दिए जाने के सवाल पर बर्नहम ने कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि किसी व्यक्ति के "रिहा" होने का मतलब सामान्य तौर पर रिहा होना नहीं है।
उन्होंने कहा कि संदिग्धों पर जमानत की बेहद सख्त शर्तें लागू हैं। उन्होंने कहा, "अधिकारी इस मामले पर बेहद कड़ी निगरानी और निकट नियंत्रण रख रहे हैं और मैं आपको इसका भरोसा दिला सकता हूं।"
एक संदिग्ध ने खुद अधिकारियों से संपर्क किया था
द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों में से एक ने घटना से करीब एक घंटे पहले खुद अधिकारियों से संपर्क किया था। ब्रिटेन की आतंकवाद रोधी पुलिस ने मंगलवार को बताया था कि एयरबेस के पास रोके गए वैन से कोई विस्फोटक उपकरण नहीं मिला। हालांकि, वहां से कुछ मात्रा में पेट्रोल बरामद किया गया था।
आरएएफ फेयरफोर्ड से ईरान पर अमेरिकी हमले
आरएएफ फेयरफोर्ड का हाल के महीनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई हमले शुरू करने के लिए इस्तेमाल किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि यह घटना "स्पष्ट रूप से किसी विदेशी पक्ष के हाथ" से जुड़ी है। हालांकि, उन्होंने इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी थी।
ग्लॉस्टरशायर में हुई यह घटना जुलाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की ओर से "ब्रिटिश राजशाही शासन" को लेकर दी गई परोक्ष धमकियों के बाद सामने आई है।