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योजना: ग्लोबल मिनिमम टैक्स योजना की राह आसान नहीं, 130 देशों में सहमति, उठ रहे विरोध के भी स्वर

Sat, 03 Jul 2021 08:39 PM IST
कुमार संभव डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ब्रसेल्स
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: कुमार संभव Updated Sat, 03 Jul 2021 08:39 PM IST
सार

जानकारों का कहना है कि खुद अमेरिका और यूरोपियन यूनियन (ईयू) की अंदरूनी राजनीति इस मकसद को हासिल करने में सबसे बड़ी रुकावट बन सकती है। अब तक बनी सहमति के मुताबिक, 100 सबसे बड़ी कंपनियों को कम से कम अपनी आमदनी का 15 फीसदी टैक्स देना होगा, भले वे कहीं भी कारोबार करती हों।

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Global Minimum Tax Scheme path not easy 130 countries ready but difficulties also rising
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

दुनिया की 100 सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर न्यूनतम वैश्विक कर (ग्लोबल मिनिमम टैक्स) लगाने पर भले 130 देशों में सहमति बन गई हो, लेकिन अभी यह व्यवस्था लागू होने की राह में कई अड़चनें हैं। जानकारों का कहना है कि खुद अमेरिका और यूरोपियन यूनियन (ईयू) की अंदरूनी राजनीति इस मकसद को हासिल करने में सबसे बड़ी रुकावट बन सकती है। अब तक बनी सहमति के मुताबिक, 100 सबसे बड़ी कंपनियों को कम से कम अपनी आमदनी का 15 फीसदी टैक्स देना होगा, भले वे कहीं भी कारोबार करती हों।

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फिलहाल लक्ष्य यह है कि नई व्यवस्था को 2023 से लागू कर दिया जाए। प्रस्तावित व्यवस्था की कई बारीकियां अभी तय नहीं हैं। अभी महज सिद्धांत पर सहमति बनी है। बारीकियां तय करने के लिए अक्टूबर तक का समय रखा गया है, लेकिन इस प्रस्ताव खुद ईयू और अमेरिका के भीतर विरोध होने के संकेत हैं। 27 सदस्यीय ईयू के अंदर इस मुद्दे पर मतभेद के संकेत मिले हैं। कुछ देशों का सवाल है कि जब टैक्स दर किसी देश का अंदरूनी मामला है तो उसके नियम वैश्विक समझौते से कैसे तय हो सकते हैं? उधर, अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ नेता भी इस योजना को लेकर उत्साहित नहीं हैं।
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यूरोप में एस्तोनिया, हंगरी और आयरलैंड पहले भी न्यूनतम टैक्स दर करने का विरोध कर चुके हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था लागू होने पर उन जैसे छोटे देशों में कोई बड़ी कंपनी कारोबार करने नहीं आएगी। उनके विरोध से ब्रसेल्स स्थित ईयू के अधिकारी परेशानी में हैं। उन्हें अहसास है कि उनके लिए ईयू के भीतर इस समझौते पर अमल करवाना मुश्किल होगा। यूरोपीय आयोग के टैक्स प्रमुख पाअलो जेनतिलोनी ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा कि अगर ईयू इस समझौते पर अमल करने में नाकाम रहा तो उससे शर्मनाक से भी ज्यादा गंभीर स्थिति पैदा होगी। दूसरी तरफ बिना ईयू के शामिल हुए ऐसा कोई वैश्विक नियम लागू हो पाएगा, इसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता।
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उधर, अमेरिका में कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य केविन ब्रैडी ने न्यूनतम वैश्विक कर योजना को एक खतरनाक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह सहमति अमेरिकी नौकरियों को बाहर भेजने, हमारी अर्थव्यवस्था की अनदेखी करने और हमारे टैक्स आधार को क्षीण करने की दिशा में जाने वाला एक खतरनाक आत्मसमर्पण है। खबरों के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर इस प्रस्ताव पर सख्त एतराज है। अगर यह पार्टी नए प्रस्ताव पर सहमत नहीं बनी तो राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए न्यूनतम कर के विधेयक को सीनेट से पारित करा पाना लगभग असंभव हो जाएगा।


विश्लेषकों का कहना है कि जब इस साल के अंत तक ग्लोबल मिनिमम टैक्स के करार पर सहमति हो जाएगी, तब बाइडेन प्रशासन के सामने उसे कांग्रेस की मंजूरी दिलाने की चुनौती आएगी। सीनेट में इसके लिए कम से कम साठ सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। रिपब्लिकन पार्टी अगर विरोध पर अड़ी रही, यह समर्थन मिलना संभव नहीं होगा। जानकारों के मुताबिक, अगर सीनेट में प्रस्ताव गिर गया तो यह करार धरा का धरा रह जाएगा। खबरों के मुताबिक, ब्रिटेन और इटली में भी इस प्रस्ताव पर विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। इनसे पूरी दुनिया में न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स रेट लागू करने की महत्वाकांक्षा पर फिलहाल ग्रहण लगता दिख रहा है।

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